Sun, 23 Aug 2026 06:02 PM IST
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 23 Aug 2026 06:02 PM IST
सार
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से धमनियों में जमाव होने और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इसे कम करना बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, वजन, खान-पान और पारिवारिक जोखिम भी हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
दिल की सेहत के दुश्मनों की जब भी चर्चा होती है तो उसमें हाई कोलेस्ट्रॉल का नाम सबसे पहले आता है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से दिल तक खून ले जाने वाली धमनियां जाम होने लगती हैं, जिससे रक्त का संचार प्रभावित हो सकता है और हार्ट अटैक का खतरा रहता है। हालांकि यहां समझना जरूरी है कि हार्ट अटैक का खतरा सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि आपकी रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल कितना है। सवाल यह भी है कि कौन-सा कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, हृदय तक खून पहुंचाने वाली नसों में पहले से कितनी रुकावट है और साथ में ब्लड प्रेशर-डायबिटीज जैसी समस्याएं तो नहीं हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोलेस्ट्रॉल कम करना हार्ट अटैक से बचाव का एक जरूरी हिस्सा है, लेकिन सिर्फ यही काफी नहीं है। बैड कोलेस्ट्रॉल के अलावा ट्राइग्लिसराइड, लिपोप्रोटीन-ए और ब्लड प्रेशर-डायबिटीज को कंट्रोल में रखना भी बहुत जरूरी है।
आइए जानते हैं कि हृदय को स्वस्थ रखने और हार्ट अटैक के खतरे को टालने के लिए कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के साथ-साथ और किन बातों पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी हो जाता है?
कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : freepik.com
पहले कोलेस्ट्रॉल के खतरे को जान लीजिए
बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा होने पर धमनियों की दीवारों में जमाव होने की आशंका बढ़ जाती है। समय के साथ ये धमनियों को संकरी कर देती है जिससे हृदय तक रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। समस्या तब ज्यादा गंभीर हो सकती है जब यह जमाव टूटने लगे और रक्त का थक्का बन जाए।
- यदि ये थक्के हृदय की रक्तवाहिकाओं को बंद कर देते हैं तो हृदय की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाता है और हार्ट अटैक हो सकता है।
- इसी कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कंट्रोल में रखने की सलाह देते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर भी हो सकता है खतरनाक - फोटो : Freepik.com
कोलेस्ट्रॉल के अलावा भी कई खतरे
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में केवल टोटल कोलेस्ट्रॉल देखना काफी नहीं होता। रिपोर्ट में एलडीएल, एचडीएल (गुड कोलेस्ट्रॉल), ट्राइग्लिसराइड और अन्य संकेतकों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
- लिपोप्रोटीन-ए कुछ लोगों में हार्ट अटैक के लिए महत्वपूर्ण जोखिम संकेत हो सकता है। ये खून में पाया जाने वाला एक खास प्रकार का बैड कोलेस्ट्रॉल कण है। इसका बढ़ना धमनियों में ब्लॉकेज, दिल हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक बढ़ा देता है।
- ट्राइग्लिसराइड या शुगर लेवल का अक्सर हाई रहना भी हार्ट अटैक के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
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हृदय रोगों के खतरे को कैसे कम करें? - फोटो : Adobe Stock Images
इन जोखिमों पर भी दें ध्यान
कोलेस्ट्रॉल कम करना जरूरी है, लेकिन हार्ट अटैक का जोखिम कई चीजों से मिलकर बनता है।
- हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, अधिक वजन और परिवार में हृदय रोगों की हिस्ट्री रही तो भी आपका जोखिम बढ़ सकता हैं।
- साल 2026 की गाइडलाइन में भी हार्ट अटैक से प्राथमिक बचाव के लिए समय -समय पर जांच के साथ बीपी-शुगर को कंट्रोल रखने पर भी जोर दिया जाता रहा है।
हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, हृदय की समस्याओं को कम करने के लिए कोलेस्ट्रॉल को कम करना जरूरी है, लेकिन सिर्फ इतना ही काफी नहीं है। कम उम्र से ही ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, वजन, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि और भोजन पर भी ध्यान देना जरूरी है। अगर आपको पहले से हृदय रोग है तो बैड एलडीएल के स्तर को 55 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से नीचे रखने की सलाह दी जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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