August 23, 2026

दिल्ली में क्यों बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के केस? H1N1 कितना खतरनाक, डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताए लक्षण

Aug 23, 2026 01:55 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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h1n1 swine flu: जेपी नड्डा ने दिल्ली में बढ़ते स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की थी। दिल्ली में इस साल H1N1 के 1777 तक मामले सामने आ चुके हैं।

दिल्ली में क्यों बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के केस? H1N1 कितना खतरनाक, डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताए लक्षण

दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

H1N1 swine flu in Delhi: दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बढ़ रहे मामलों से अधिक चिंता इस वायरस के बदलते स्वरूप को लेकर है। नई दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) के पूर्ण डायरेक्डर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने भी इसको लेकर चेताया है। उन्होंने कहा कि वायरस के इस बदलते स्वरूप को मेडिकल की भाषा में एंटीजेनिक ड्रिफ्ट कहा जाता है। इसके कारण यह वायरस पहले से अधिक संक्रामक हो गया है और लोगों में पहले से मौजूद प्रतिरोधक क्षमता को भी चकमा देने में सक्षम है। हालांकि, गुलेरिया ने यह भी स्पष्ट किया है कि वायरस में म्यूटेशन एक सामान्य प्रक्रिया है और जनता को घबराने या पैनिक करने की आवश्यकता नहीं है।

आपको बता दें कि हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दिल्ली में बढ़ते स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की थी। दिल्ली में इस साल H1N1 के 1777 तक मामले सामने आ चुके हैं। पिछले साल की तुलना में कम से कम 7 गुना अधिक है।

एंटीजेनिक ड्रिफ्ट क्या है और क्यों है खतरनाक?

डॉ. रणदीप गुलेरिया ने इस प्रकोप के पीछे के प्रमुख कारणों को विस्तार से समझाया है। उनके मुताबिक, स्वाइन फ्लू वायरस की बाहरी संरचना समय के साथ धीरे-धीरे बदलती है। इसे ठीक वैसे समझा जा सकता है जैसे कोई अपराधी पहचान छिपाने के लिए भेष बदलता रहता है। संरचना बदलने के कारण नया स्ट्रेन पिछले स्ट्रेन की तुलना में अधिक तेजी से फैलता है। जिन लोगों ने पहले वैक्सीन लगवाई है या जो पहले इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं उनके शरीर का इम्यून सिस्टम पुराने वायरस को पहचानता है। जब वायरस अपनी शक्ल बदल लेता है तो शरीर का सुरक्षा तंत्र इसे तुरंत पहचान नहीं पाता है जिससे टीका लगवा चुके लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

मौसम ने बढ़ाई वायरस की उम्र

वायरस के म्यूटेशन के साथ-साथ मॉनसून का मौसम भी इसके प्रसार में बड़ी भूमिका निभा रहा है। बारिश और हवा में नमी के कारण H1N1 वायरस वातावरण में लंबे समय तक जीवित रहता है, जिससे यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल रहा है। डॉ. गुलेरिया ने बताया कि इस बार अस्पतालों में सांस लेने में तकलीफ और निमोनिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। अधिकांश मरीज तो घर पर या सामान्य वार्ड में ठीक हो रहे हैं, लेकिन बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले रहा है और उन्हें आईसीयू (ICU) में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है।

कब जाएं डॉक्टर के पास?

सामान्य तौर पर H1N1 में बुखार, खांसी, शरीर में दर्द, गले में खराश और नाक बहने जैसे हल्के लक्षण होते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी लक्षण होते हैं, जिसे दिखने पर मरीज को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जैसे कि सीने में दर्द या भारीपन महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ या सांस फूलना, खांसी का अत्यधिक बढ़ जाना और बलगम आना और 4 से 5 दिनों के बाद भी तेज बुखार का न उतरना।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए क्या संकेत

अगर बच्चों और बुजुर्गों में अत्यधिक सुस्ती, मानसिक सतर्कता में कमी, बच्चे द्वारा दूध या खाना नहीं खाना और बहुत तेजी से सांस लेने जैसे लक्षण दिखते हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। ये लक्षण बताते हैं कि संक्रमण गले और नाक से नीचे फेफड़ों तक पहुंच गया है और निमोनिया का रूप ले चुका है।

घर पर कैसे रोकें प्रसार?

डॉक्टरों ने पाया है कि जब घर का एक सदस्य बीमार होता है तो पूरा परिवार फ्लू की चपेट में आ जाता है। H1N1 का यह नया स्ट्रेन लक्षण दिखने से एक दिन पहले ही दूसरों में फैलना शुरू हो जाता है। यह देखा गया है कि स्कूल जाने वाले बच्चे इसे स्कूल से घर लाते हैं, जिसके बाद घर के अन्य सदस्य संक्रमित हो जाते हैं।

बचाव के आसान उपाय

बीमार बच्चों को स्कूल न भेजें। इससे स्कूल के अन्य बच्चों और उनके परिवारों को सुरक्षित रखा जा सकता है। मेट्रो, बस या भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर जाते समय मास्क पहनें। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें। नियमित रूप से सैनिटाइजर या साबुन का उपयोग करें। यदि आपको बुखार या खांसी है, तो घर के बुजुर्गों और छोटे बच्चों से दूरी बनाए रखें।

वैक्सीनेशन का कितना महत्व

भारत में वयस्कों में फ्लू टीकाकरण की दर 2 प्रतिशत से भी कम है। डॉ. गुलेरिया ने 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और पुरानी बीमारियों जैसे डायबिटीज या हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीजों को फ्लू और न्युमोकोकल वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि वैक्सीन लगाने से संक्रमण की संभावना शून्य भले न हो, लेकिन बीमारी की गंभीरता और अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।