Guru Purnima Shlok: गुरु पूर्णिमा पर गुरु और अध्यापकों के प्रति सम्मान जताने के लिए संस्कृत के ये 25 श्लोक सुनाएं। यहां पढ़ें गुरु पूर्णिमा स्पेशल श्लोक, जो आपका काम आसान करने में मदद करेंगे।
Guru Purnima Shlok Ideas: गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हम अक्सर उन लोगों को धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने हमारी जिंदगी में अहम किरदार निभाते हुए सही-गलत का रास्ता दिखाते हुए दिशा तक पहुंचाने में मदद करते हैं। यह पर्व केवल आशीर्वाद लेने का नहीं है, बल्कि गुरु तत्व को समझने का अवसर माना जाता है। अगर आप भी अपने अध्यापकों को खास ढंग से विश करने की सोच रहे हैं तो क्लासरूम में श्लोक सुनाकर कुछ अलग कर सकते हैं। इस आर्टिकल में देखें, ऐसे 25 श्लोकों की लिस्ट जो काम आसान करेंगे।
गुरु पूर्णिमा के लिए श्लोक
1 ) गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर
गुरु साक्षात परं ब्रह्मा तस्मै श्रीगुरवे नमा
2) अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानानशलाकया
चत्रुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमा
3) अखंड मंडलाकारम व्याप्तं तेन चराचरम
तत्पदम दर्शितम तस्मै श्रीगुरवे नमा
4) चैतन्य शाश्वत शान्तो व्योमातीतो निरजंन
बिन्दु नादकलातीत तस्मै श्रीगुरवे नमा
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5) स्थावरंम जडग्मनम व्याप्तम येन कृस्त्रम चराचरम
तत्पदम दर्शितम येन तस्मै श्रीगुरवे नमा
6) अनेक जन्मसंप्राप्त कर्मेन्धनविदाहिने
आत्मज्ञा ग्निदानेन तस्मै श्रीगुरवे नमा
7) न गुरोरधिकम तत्वम न गुरोरधिकम तप
तत्व ज्ञानात्परम नास्ति तस्मै श्रीगुरवे नमा
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8) नित्यम ब्रह्मा निराकारम निगर्णुम बोधयेत् परम
सर्वम ब्रह्मा निराभाषम दीपो दीपान्तरम याथ
9) मूकं करोति वााचलम, पडंगुम लड्घयते गिरिम
यत्कृपा तमहम वन्दे पारमान नन्दमाधवम

10) यस्माद्धर्मं विजानाति यस्मात्पश्यति तत्परम
तस्य गुरुपदेशेन न गुरोरधिकम भवेत
11) मन्नाथ श्रीजगन्नाथो मदगुरु श्रीजगद्गुरु
ममात्मा सर्वभूतात्मा तस्मै श्रीगुरवे नमा
12) ध्यानमूलम गुरोमूर्ति, पूजामूलम गुरो पदम
मन्त्रमूलम गुरोर्वाक्यम मोक्ष मूलम गुरुो कृपा
13) संसार दावान ललीढलोकत्राणाय कारुण्य घना घनत्वम
प्राप्तस्य कल्याण गुणार्णवस्य, वन्दें गुरो श्रीचरणारविन्दम
14) आचार्य मां विजानी यात्रावमयन्येत कर्हिचित
न मर्त्य बुद्धुयासूयेत सर्वदेवमयो गुरु
15) कामादि सर्वव्रज गारूडभ्याम, विवेक वैराग्य निधि प्रदाभ्याम
बोध प्रदाभ्याम द्रुतमोक्ष दाभ्याम नोम मन श्रीगुरु पादुकाभ्याम
16) स्वार्चोपराणाम खिलेष्टदाभ्याम स्वाहसहायक्ष धुरन्धराभ्याम
स्वान्ताच्छ भावप्रद पूजनाभ्याम नमो नम श्री गुरु धुरन्धराभ्याम
17) शमादिषट्क प्रदवैभाभ्याम, समाधि दानव्रत दीक्षिताभ्याम
रमाधवाड घ्रिस्थिरभक्तिदाभ्याम नमो नमा
18) पापन्धकारार्क परम्पराभ्यां तापत्रया हीन्द्रखगेश्वराभ्याम
जाड्याब्धि संशोषण वाडवाभ्याम नमो नम श्रीगुरु पादुकाभ्य
19) नृपालिमौलि व्रज रत्नकांति रिद्दिराज त्झषकन्यकाभ्याम
नृपत्वदाभ्याम नतलोककपडक्ते नमो नमा
20) नालीकनी काशपदाह्रताभ्याम, नानाविमोह दिनिवारिकाभ्याम
नमज्जना भीष्टततिप्रदाभ्याम नमो-नमा
21) नता तयो श्रीपतिताम समीयु, कदाचिदप्याशु दरिद्रवर्याम
मूकाश्च वाचस्पतिताम ताभ्याम नमो-नमा
22) कवित्व वाराशिनिशाकरभ्याम दौर्भाग्य दावाम्बुदमालिकाभ्याम
दूरी कृतिनाम म्रविपत्तिताभ्याम नमो-नमा
23) अनंत संसार सुमद्रतार नौकायिताभ्याम गुरुभक्ति दाभ्याम
वैराग्य साम्राज्य दपूजनाभ्याम नमो-नमा
24) विश्वम पश्यति कार्यकारण तया स्ववामि सम्बन्धतम
शिष्याचार्यतया तथैव पिृतपुत्राद्यात्मा भेदता
स्वप्रे जाग्रति व ए ऐष पुरुषो माया परिभ्रामित
तस्मै श्री गुरुमुर्तेय नम इदम श्रीदक्षिणामूर्ये
25) बाल्यादिष्वापि जाग्रदादिषु तथा सर्वा स्ववस्थास्वापि
व्यावृत्ता स्वनुवर्तमानमहमित्यन्त स्फुरन्तम सदा
स्वात्मानम प्रकटी करोति भजताम यो मुद्रया भद्रया
तस्मै श्रीगुरुमूर्तये नम इदम श्रीदक्षिणामूर्तये
तो देखा आपने गुरु पूर्णिमा पर इन श्लोकों से आप अपने मन का भाव अध्यापक के सामने प्रकट कर सकते हैं।
नोट- इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, और इंटरनेट से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।