
ये सभी बसें भगवा रंग की हैं.
Bhopal News: मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की फिर से शुरुआत हो गई है. भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ का शुभारंभ किया. इस सेवा के तहत प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से लैस बसें चलाई जाएंगी. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश की सरकारी बसें भगवा रंग में नजर आएंगी. इन बसों में GPS, CCTV कैमरे, पैनिक बटन और डिजिटल टिकटिंग जैसी सुविधाएं होंगी.
सरकार का दावा है कि इस सेवा का मकसद प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना और लोगों को सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक बस सेवा उपलब्ध कराना है. सरकार इलेक्ट्रिक बसों को भी बढ़ावा देने की तैयारी में है, ताकि पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम की जा सके.
7 शहरों से 351 बसों को दिखाई गई हरी झंडी
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत के मौके पर प्रदेश के सात शहरों से कुल 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को हरी झंडी दिखाई गई. इनमें इंदौर से 145, भोपाल से 106, जबलपुर से 67, रीवा से 18, देवास से 10, कटनी से 3 और भिंड से 2 बसें शामिल हैं. सरकार ने इस योजना को आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर विस्तार देने का लक्ष्य रखा है. योजना के तहत वर्ष 2031 तक प्रदेश में करीब 15 हजार बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है. पहले साल 1,500 बसें शुरू करने की योजना है. इसके बाद हर साल करीब 2,500 से 3,000 बसें जोड़ने का लक्ष्य है.
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2 रुपए प्रति किलोमीटर होगा किराया
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बस का किराया 2 रुपए प्रति किलोमीटर तय किया गया है. उदाहरण के तौर पर भोपाल से इंदौर की दूरी करीब 190 किलोमीटर है. इस रूट पर यात्रियों को करीब 380 रुपए किराया देना होगा. सरकार का कहना है कि किराया तय करने का मकसद यात्रियों को एक व्यवस्थित और किफायती सार्वजनिक परिवहन विकल्प उपलब्ध कराना है. बसों के रूट और संचालन को यात्रियों की जरूरत के हिसाब से विकसित करने की योजना है.
GPS से ट्रैक होगी बस, CCTV से निगरानी
नई सरकारी बसों में कई आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी. बसों में GPS लगाया जाएगा, जिससे उनकी लोकेशन को ट्रैक किया जा सकेगा. इसके अलावा CCTV कैमरों के जरिए बस के अंदर निगरानी रखी जाएगी. यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों में पैनिक बटन भी लगाया जाएगा. डिजिटल टिकटिंग की सुविधा से टिकट लेने की प्रक्रिया को आसान और आधुनिक बनाने की योजना है. सरकार का कहना है कि इन सुविधाओं से बस सेवा में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
निजी ऑपरेटरों को भी PPP मॉडल से जोड़ेगी सरकार
सरकार मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में निजी बस ऑपरेटरों को भी शामिल कर रही है. इसके लिए PPP यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार के मुताबिक निजी ऑपरेटरों के लिए पारदर्शी कॉन्ट्रैक्टिंग सिस्टम और इंसेंटिव स्कीम लागू की जाएगी. निजी ऑपरेटरों को टिकट से होने वाली कमाई के अलावा विज्ञापन और कार्गो सर्विस से भी अतिरिक्त आय का मौका दिया जाएगा. बसों के संचालन के लिए आधुनिक डिपो और टर्मिनल की सुविधा उपलब्ध कराने की भी योजना है. प्रशासन की ओर से संचालन में जरूरी सहयोग देने की बात कही गई है.
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के संचालन को लेकर मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल के बीच एमओयू का आदान-प्रदान भी हुआ. इस दौरान मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मनीष सिंह और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल के निदेशक प्रोफेसर कैलाश राव एम मौजूद रहे. सरकार का कहना है कि इस साझेदारी से प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की बेहतर योजना और विकास में मदद मिलेगी.
10 हजार ई-बसों की भी योजना
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत PPP मॉडल पर 10 हजार बसें चलाने की योजना है. उनके मुताबिक इस परियोजना की लागत करीब 57 हजार करोड़ रुपए है, जिसमें केंद्र सरकार करीब 20 हजार करोड़ रुपए का योगदान देगी. गडकरी ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इनोवेटिव मॉडल के जरिए योजना की शुरुआत की है. उनके मुताबिक इससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी और करीब 45 से 55 हजार रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि फिलहाल मध्य प्रदेश में 972 बसें चलाई जाएंगी. साथ ही उन्होंने कहा कि मॉडल के सफल रहने पर प्रदेश में करीब 25 हजार बसें चलाने की क्षमता है.
21 साल पहले बंद हो गई थी सरकारी बस सेवा
मध्य प्रदेश में पहले मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम यानी MPSRTC के जरिए सरकारी बसों का संचालन होता था, लेकिन आर्थिक संकट और संचालन से जुड़ी समस्याओं के चलते निगम की बस सेवा बंद हो गई थी. इसके बाद प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में निजी बस ऑपरेटरों की भूमिका बढ़ती गई. निगम से जुड़े कई कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS दिया गया. इसके बाद कुछ समय के लिए निगम से VRS ले चुके कर्मचारियों की सहकारी समितियां बनाकर बस संचालन की कोशिश भी की गई, लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा समय तक प्रभावी नहीं रह सकी. इसके बाद महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक यात्रियों की आवाजाही के लिए निजी बस ऑपरेटरों पर निर्भरता बढ़ती गई.
घाटे और कर्ज से जूझ रहा था परिवहन निगम
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, परिवहन निगम पर करीब 756 करोड़ रुपए का कर्ज हो गया था. निगम को हर महीने करीब 5 करोड़ रुपए का नुकसान होने की बात भी सामने आई थी. आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के भुगतान में भी परेशानी आने लगी थी. बसों के संचालन में कुप्रबंधन, योजना की कमी और बढ़ते खर्च को निगम की खराब आर्थिक स्थिति की वजहों में गिना गया. संचालन बंद होने के बावजूद निगम से जुड़े वित्तीय दायित्व बने रहे. रिपोर्टों में कर्मचारियों के बकाया वेतन की राशि करीब 45 करोड़ रुपए तक पहुंचने का भी उल्लेख मिलता है.
निजी बस कारोबार भी बड़ा क्षेत्र
मध्य प्रदेश में निजी बसों का कारोबार भी काफी बड़ा माना जाता है. उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, प्रदेश में निजी बसों का सालाना कारोबार करीब 3,500 से 5,000 करोड़ रुपए के बीच हो सकता है. एक सामान्य निजी बस की रोजाना कमाई करीब 15 से 25 हजार रुपए तक बताई जाती है. वहीं लंबी दूरी की लग्जरी, एसी और स्लीपर बसों का रोजाना कारोबार करीब 40 से 60 हजार रुपए तक होने का अनुमान है. हालांकि बस की कमाई रूट, यात्रियों की संख्या, सीजन, ईंधन लागत, टोल, स्टाफ और दूसरे खर्चों पर निर्भर करती है.
बस संचालकों की आय सिर्फ यात्री टिकट से नहीं होती. लगेज और पार्सल ढुलाई भी अतिरिक्त कमाई का जरिया है. उपलब्ध अनुमानों में इसे कुल कारोबार का करीब 15 से 20 फीसदी तक बताया गया है. त्योहारों और शादी के सीजन में यात्रियों की संख्या बढ़ने से बस कारोबार में भी बढ़ोतरी हो सकती है.
करीब 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की वापसी के साथ मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को नए तरीके से विकसित करने की कोशिश की जा रही है. सरकार का जोर आधुनिक बसों, डिजिटल टिकटिंग, GPS ट्रैकिंग और यात्री सुरक्षा जैसी सुविधाओं पर है. अब इस योजना का अगला चरण बसों की संख्या बढ़ाने, नए रूट जोड़ने और निजी ऑपरेटरों की भागीदारी के विस्तार से जुड़ा होगा. सरकार का लक्ष्य वर्ष 2031 तक 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार करना है. योजना के लागू होने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अलग-अलग शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवा का विस्तार किस तरह होता है.

शिव चौबे
शिव चौबे को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दशक का अनुभव है. शिव ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से संस्कृत विषय में शिक्षा प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक अखबार से की. इसके बाद वर्ष 2019 में वे ETV भारत से बतौर संवाददाता जुड़े, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट और शिक्षा से जुड़ी उनकी कई महत्वपूर्ण रिपोर्टों ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी. वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जान जोखिम में डालकर जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की और व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर किया. उनकी रिपोर्ट्स के बाद जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़े. वर्ष 2021 में शिव चौबे ने TV9 भारतवर्ष में जिला रिपोर्टर के रूप में नई भूमिका की शुरुआत की. इसके बाद वर्ष 2023 में वे PTI (Press Trust of India) से जुड़े. यहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण खोजी रिपोर्टें कीं, जिनमें सिवनी जिले का चर्चित सर्पदंश घोटाला, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय से जुड़ा गोबर घोटाला तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई घोटाले शामिल है. इसके अलावा उन्होंने CAA के दौरान लगे कर्फ्यू, बरगी क्रूज हादसे और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की जमीनी रिपोर्टिंग कर अपनी अलग पहचान बनाई. निष्पक्ष, जनसरोकारों से जुड़ी और खोजी पत्रकारिता के लिए शिव चौबे को विशेष रूप से जाना जाता है.
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