राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के संगठनात्मक विस्तार से जुड़े नए आंकड़े सामने आए हैं. मार्च 2025 से मार्च 2026 के बीच देशभर में RSS की दैनिक शाखाओं की संख्या 83,129 से बढ़कर 88,949 हो गई. यानी एक साल में 5,820 शाखाएं बढ़ीं. जिस जगहों पर संघ की प्रत्यक्ष मौजूदगी है, उनकी संख्या भी 51,740 से बढ़कर 55,683 हो गई. यानी 3,943 नई जगहें जुड़ीं. लेकिन असली तस्वीर सिर्फ पिछले एक साल की नहीं है. 2013 के आंकड़ों से तुलना करें तो RSS की दैनिक शाखाओं की संख्या करीब 43 हजार से बढ़कर लगभग 89 हजार हो चुकी है. यानी 13 साल में शाखाओं की संख्या 107% बढ़ी है. संघ की पहुंच वाली जगहों की संख्या भी 28,788 से बढ़कर 55,683 हो गई है, यानी करीब 93% का विस्तार.
जॉइन आरएसएस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनवरी से जुलाई 2025 के बीच 55,423 लोगों ने पंजीकरण कराया, जबकि 2026 में इसी अवधि के दौरान 1,23,287 लोगों ने RSS से जुड़ने में रुचि दिखाई. इसी प्रकार, जुलाई 2025 में 9,718 लोगों ने पंजीकरण कराया, जबकि जुलाई 2026 में यह संख्या 24,086 रही. रुचि दिखाने वालों में से 65% से अधिक 30 वर्ष से कम आयु के हैं, जबकि लगभग 85% 40 वर्ष से कम आयु के हैं.
RSS में शाखा ही सब कुछ नहीं
RSS की रोज होने वाली गतिविधि को शाखा कहा जाता है. इसके अलावा ऐसे लोगों के लिए साप्ताहिक मिलन और मासिक मंडली भी होती है, जो रोज शाखा में शामिल नहीं हो पाते. इसलिए संगठन के फैलाव को समझने के लिए इन तीनों आंकड़ों को साथ देखना ज्यादा उपयोगी है. मार्च 2025 में देश में 83,129 दैनिक शाखाएं, 32,147 साप्ताहिक मिलन और 12,091 मासिक मंडलियां थीं. इन तीनों को जोड़ें तो संख्या 1,27,367 होती है. मार्च 2026 में शाखाएं 88,949, मिलन 32,606 और मंडलियां 13,211 हो गईं. कुल आंकड़ा 1,34,766 तक पहुंचता है. यानी एक साल में इन तीन तरह की गतिविधियों में कुल 7,399 की वृद्धि हुई. हालांकि इन तीनों आंकड़ों को सीधे-सीधे लोगों की संख्या नहीं माना जा सकता. ये संगठन की गतिविधियों या इकाइयों का आंकड़ा है, सदस्यों की संख्या नहीं.

2013 से 2026 तक तस्वीर कितनी बदली?
2013 में RSS की रिपोर्ट के मुताबिक 28,788 जगहों पर 42,981 शाखाएं चल रही थीं. 9,597 साप्ताहिक बैठकें और 7,178 संघ मंडलियां थीं. उस समय देशभर में संघ की मौजूदगी मुख्य रूप से गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य क्षेत्र में ज्यादा थी.
2020 में कोरोना महामारी के दौरान शाखाओं की संख्या 62,491 और शाखा वाले स्थान 38,913 थे. 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 68,651 शाखाओं और 42,613 स्थानों तक पहुंच गया. यानी महामारी के बाद संघ का संगठनात्मक नेटवर्क तेजी से वापस बढ़ा.
2025 तक शाखाएं 83,129 और स्थान 51,570 हो गए. सिर्फ एक साल में ही 10 हजार से ज्यादा शाखाओं की वृद्धि दर्ज की गई थी. और 2026 में शाखाओं ने 88,949 का आंकड़ा छू लिया. यानी 2013 के मुकाबले शाखाओं की संख्या लगभग 2.07 गुना हो गई है.
यहां सबसे दिलचस्प आंकड़ा साप्ताहिक मिलन का है. 2013 से 2026 के बीच इसमें करीब 240% का इजाफा हुआ है. इसका मतलब है कि संघ का विस्तार सिर्फ पारंपरिक रोजाना शाखाओं के जरिए नहीं हुआ, बल्कि ऐसे फॉर्मेट भी बढ़े जिनमें रोजाना समय देना जरूरी नहीं है.
ग्रामीण इलाकों पर अब खास फोकस
RSS के 2025 के आंकड़ों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव दिखता है. संघ ने देश को 58,981 ग्रामीण मंडलों में बांटने की अपनी संगठनात्मक व्यवस्था बताई थी. इनमें 30,717 मंडलों में दैनिक शाखाएं और 9,200 में साप्ताहिक मिलन चल रहे थे. कुल 39,917 ग्रामीण मंडलों तक यह गतिविधि पहुंच चुकी थी. RSS के मुताबिक यह पिछले साल की तुलना में 3,050 ज्यादा था. इससे संकेत मिलता है कि अगला विस्तार सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. संघ छोटे शहरों और गांवों को भी संगठनात्मक विस्तार का महत्वपूर्ण क्षेत्र मान रहा है.

शताब्दी वर्ष में सिर्फ शाखा नहीं, घर-घर संपर्क
RSS का शताब्दी वर्ष अक्टूबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक चल रहा है. इस दौरान संगठन ने विस्तार के साथ सामाजिक संपर्क पर भी जोर दिया है. मार्च 2026 में संघ ने बताया कि कुछ प्रांतों में ही स्वयंसेवक 10 करोड़ से ज्यादा घरों और करीब 3.9 लाख गांवों तक पहुंच चुके हैं. ये आंकड़े पूरे देश के अंतिम आंकड़े नहीं हैं, क्योंकि अभियान दूसरे क्षेत्रों में भी जारी था.
संघ ने यह भी बताया कि देशभर में अब तक 37,048 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें करीब 3.5 करोड़ लोगों की भागीदारी हुई. इन कार्यक्रमों में सामाजिक समरसता, पर्यावरण, परिवार, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों से जुड़े पंच परिवर्तन’ पर जोर दिया गया.
युवाओं पर भी बड़ा दांव
RSS के मुताबिक 2025 में देशभर में 4,415 प्रारंभिक वर्ग आयोजित हुए, जिनमें 2,22,962 लोग शामिल हुए. इनमें 1.63 लाख लोग 14 से 25 साल की उम्र के थे. यानी इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल लोगों का करीब 73% हिस्सा इसी युवा आयु वर्ग का था.
संघ ने यह भी बताया कि 2012 से उसकी वेबसाइट के जरिए 12,72,453 से ज्यादा लोगों ने जुड़ने में रुचि दिखाई, जिनमें 46 हजार से ज्यादा महिलाएं थीं. यह आंकड़ा सदस्यता नहीं बल्कि वेबसाइट के जरिए दिखाई गई रुचि का आंकड़ा है. 2025 में संघ ने विस्तार के लिए दो साल देने वाले 2,453 शताब्दी विस्तारकों की भी जानकारी दी थी. यह भी बताता है कि संगठन शताब्दी वर्ष को सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि विस्तार के अभियान के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.
तो क्या RSS पहले से दोगुना बड़ा हो गया?
शाखाओं और भौगोलिक पहुंच के आंकड़ों के आधार पर जवाब हां है. 2013 से 2026 के बीच दैनिक शाखाएं करीब 43 हजार से बढ़कर 89 हजार हो गईं और शाखा वाले स्थान करीब 29 हजार से बढ़कर 56 हजार हो गए. लेकिन इसे सीधे RSS के सदस्य दोगुने हो गए कहना सही नहीं होगा. संघ खुद अलग-अलग गतिविधियों, शाखाओं और स्वयंसेवकों के आंकड़े देता है. 2025 में RSS के सह सरकार्यवाह मुकुंद सीआर ने देश में एक करोड़ से ज्यादा स्वयंसेवकों का दावा किया था. यह शाखाओं की संख्या से अलग आंकड़ा है.
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शुभेंदु प्रताप भूमंडल
पत्रकारिता में बीते 5 साल से सक्रिय हैं. नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज राइटिंग का अनुभव. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन, फिर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और वीडियो प्रोडक्शन की पढ़ाई. दैनिक भास्कर डिजिटल से करियर की शुरुआत. बतौर न्यूज ब्रीफ एडिटर भास्कर डिजिटल में 800 से ज्यादा बाइलाइन स्टोरी. वीडियो स्क्रिप्टिंग का भी अनुभव. अगस्त 2025 से टीवी9 डिजिटल के साथ नई पारी का आगाज.
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