September 3, 2026

Gandhari Review: तापसी पन्नू की 'गांधारी' में मां का खूंखार अवतार, सस्पेंस-बदले की कहानी बांधकर रखेगी

Time Published: Thursday, September 3, 2026, 16:29 [IST]

फिल्म: गांधारी (Gandhari)
स्टारकास्ट: तापसी पन्नू, इश्वाक सिंह, छाया कदम, चंदन रॉय, जतिन सरना
डायरेक्टर: देवाशीष मखीजा
रन टाइम: 1 घंटे 55 मिनट
ओटीटी प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स (Netflix)
रेटिंग: 4 (****)

Gandhari Review: अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं, जिनमें रहस्य, बदला, इमोशन और खतरनाक ट्विस्ट एक साथ देखने को मिलें तो ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स की 'गांधारी' आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है। तापसी पन्नू स्टारर ये फिल्म सिर्फ एक बच्ची के किडनैप होने की कहानी नहीं है बल्कि एक ऐसी मां के संघर्ष को दिखाती है, जो अपनी बेटी को वापस पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

Gandhari Review

फिल्म की शुरुआत से ही कहानी आपको अपने साथ जोड़ लेती है। जैसे-जैसे बानी (तापसी पन्नू) अपनी बेटी की तलाश में आगे बढ़ती है, कहानी में नए राज खुलते जाते हैं और उसका सामना एक ऐसे क्रिमिनल नेटवर्क से होता है, जिसके सामने टिकना आसान नहीं है।

क्या है 'गांधारी' की कहानी?

फिल्म की कहानी जॉयपुरा की है, जहां बानी की बेटी मिष्ठी अचानक रेलवे स्टेशन से किडनैप हो जाती है। अपनी बच्ची को आंखों के सामने गायब होते देखने के बाद बानी की जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है लेकिन हालात उस वक्त और मुश्किल हो जाते हैं, जब एक हादसे में उसकी आंखों की रोशनी चली जाती है। इसके बावजूद बानी बेटी की तलाश छोड़ने को तैयार नहीं होती। उसे पता लगाना है कि मिष्ठी को कौन लेकर गया और वह उसे वापस कैसे ला सकती है।

जांच के दौरान बानी को ऐसे लोगों और अपराधियों का सामना करना पड़ता है, जो बच्चियों की तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं। चौमुखी पूजा की रात कई बच्चियों को देश से बाहर भेजने की तैयारी चल रही है और बानी के पास उन्हें बचाने के लिए बेहद कम समय है।

यहीं से फिल्म का असली थ्रिल शुरू होता है। एक तरफ अपनी बेटी को बचाने की मां की बेचैनी है, तो दूसरी ओर उसके सामने खड़ा संगठित अपराध का खतरनाक जाल। बानी इस पूरे नेटवर्क तक कैसे पहुंचती है और क्या अपनी बेटी को बचा पाती है, इसका जवाब फिल्म देखने पर ही मिलेगा।

तापसी पन्नू ने फिर साबित की अपनी काबिलियत

-'गांधारी' की सबसे बड़ी ताकत तापसी पन्नू हैं। उन्होंने बानी के किरदार में एक मां की बेबसी, दर्द, गुस्सा और बदले की आग को बेहद प्रभावी तरीके से पर्दे पर उतारा है। शुरुआत में बानी एक ऐसी मां दिखाई देती है, जो अपनी बेटी को खोने के बाद टूट चुकी है लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वही किरदार अपने भीतर की ताकत को पहचानता है। बानी का इमोशनल से खूंखार अंदाज में बदलना फिल्म का अहम हिस्सा है।

-तापसी पन्नू के एक्सप्रेशन्स और एक्शन सीक्वेंस खास तौर पर ध्यान खींचते हैं। कई जगह उनका गुस्सा और दर्द आपको असहज कर देता है। एक मां अपने बच्चे के लिए किस हद तक जा सकती है, फिल्म इसी भावना को सबसे ज्यादा मजबूती से सामने रखती है।

इश्वाक सिंह और बाकी कलाकारों का कैसा है काम?

इश्वाक सिंह ने बानी के पति की भूमिका निभाई है और उन्होंने अपने किरदार को अच्छी तरह संभाला है। वहीं फिल्म में नजर आने वाले विलेन कहानी के माहौल को और ज्यादा डरावना बनाते हैं। छाया कदम, जतिन सरना और 'पंचायत' फेम चंदन रॉय समेत बाकी कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। किसी कलाकार की मौजूदगी कहानी पर हावी नहीं होती और सभी किरदार फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।

देवाशीष मखीजा का डायरेक्शन कैसा है?

-फिल्म का निर्देशन देवाशीष मखीजा ने किया है। उन्होंने कहानी को जरूरत से ज्यादा घुमाने के बजाय सीधे उसके मूल मुद्दे पर फोकस रखा है। फिल्म की रफ्तार इसकी एक बड़ी खासियत है।

-किडनैपिंग के बाद बच्चियों के साथ होने वाली घटनाओं को जिस तरह दिखाया गया है, वह कई जगह काफी परेशान करने वाला अनुभव बन जाता है। फिल्म अपराध की भयावहता को ग्लैमराइज करने के बजाय उसके दर्दनाक पहलू को सामने लाने की कोशिश करती है।

-कहानी और स्क्रीनप्ले कनिका ढिल्लों ने लिखा है। वह फिल्म की प्रोड्यूसर भी हैं। स्क्रीनप्ले में लगातार आने वाले ट्विस्ट और बदलते हालात कहानी को आगे बढ़ाते रहते हैं। डायलॉग्स भी कहानी के मूड के मुताबिक प्रभावी हैं।

'गांधारी' क्यों देखनी चाहिए?

-अगर आपको तेज रफ्तार क्राइम थ्रिलर, किडनैपिंग मिस्ट्री और रिवेंज ड्रामा पसंद हैं, तो 'गांधारी' आपको पसंद आ सकती है। फिल्म में एक्शन के साथ इमोशनल एंगल भी मजबूत है। सबसे खास बात तापसी पन्नू का किरदार है। उन्हें इस तरह के गुस्से और आक्रामक अंदाज में देखना दिलचस्प है। वह एक तरफ बानी की मजबूरी और दर्द महसूस कराती हैं, तो दूसरी तरफ उसका बदला आपको बेचैन करता है।

-फिल्म कई मौकों पर आपको लगातार ये सोचने पर मजबूर करती है कि अब आगे क्या होगा। कहानी में आने वाले ट्विस्ट सस्पेंस बनाए रखते हैं और क्लाइमेक्स तक उत्सुकता बरकरार रहती है। फिल्म के अंत में दिखाए गए NCRB के आंकड़े कहानी को सिर्फ एक काल्पनिक थ्रिलर नहीं रहने देतेबल्कि इसे असल दुनिया की एक गंभीर समस्या से जोड़ देते हैं। यही हिस्सा फिल्म के असर को और गहरा करता है।

-कुल मिलाकर 'गांधारी' एक ऐसी मां की कहानी है, जो अपनी बेटी को बचाने के लिए अपने डर, कमजोरी और सीमाओं को पीछे छोड़ देती है। अगर आपको सस्पेंस, इमोशन, क्राइम और बदले की कहानियां पसंद हैं, तो इस फिल्म को अपनी वॉचलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। 'गांधारी' नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम की जा सकती है।