Updated On: Aug 03, 2026 | 09:35 PM IST
विज्ञापन
सार
Artificial Flavor Whisky: FSSAI ने ओल्ड मोंक, रॉयल चैलेंज और एंटीक्विटी ब्लू समेत कुछ शराब ब्रांड्स में कृत्रिम फ्लेवर पाए जाने पर उनकी बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
FSSAI Action on Artificial Flavor Whisky: देश के खाद्य सुरक्षा नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कुछ लोकप्रिय व्हिस्की और रम ब्रांड्स के चुनिंदा वेरिएंट्स की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह कार्रवाई जांच में उत्पादों में कृत्रिम फ्लेवर के इस्तेमाल की पुष्टि होने के बाद की गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला डियाजियो इंडिया की यूनाइटेड स्पिरिट्स, इनब्रू बेवरेजेज और मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर द्वारा निर्मित कुछ उत्पादों पर लागू किया गया है।
जांच में क्या सामने आया?
एफएसएसएआई की प्रयोगशाला जांच में पाया गया कि कुछ शराब उत्पादों में प्राकृतिक एजिंग (परिपक्वता) से विकसित होने वाले स्वाद की जगह कृत्रिम फ्लेवर मिलाए गए थे। जांच के अनुसार, कुछ उत्पादों में रम का स्वाद बढ़ाने के लिए ‘रम फ्लेवर’ और व्हिस्की के स्वाद के लिए ‘व्हिस्की फ्लेवर’ का इस्तेमाल किया गया। नियामक ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शराब निर्माण प्रक्रियाओं में इस प्रकार का कृत्रिम फ्लेवर जोड़ना स्वीकार्य नहीं है और यह निर्धारित गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन है।
किन ब्रांड्स के वेरिएंट्स पर लगी रोक?
रिपोर्ट के मुताबिक, कार्रवाई का दायरा फिलहाल कुछ विशेष निर्माण इकाइयों के उत्पादों तक सीमित है।
सम्बंधित ख़बरें
- मध्य प्रदेश में यूनाइटेड स्पिरिट्स द्वारा निर्मित एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की के कुछ वेरिएंट्स।
- मध्य प्रदेश में इनब्रू बेवरेजेज द्वारा निर्मित बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम।
- महाराष्ट्र में मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर द्वारा निर्मित ओल्ड मोंक रम के तीन वेरिएंट्स।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रतिबंध केवल संबंधित निर्माण इकाइयों के उत्पादों पर लागू होगा या अन्य यूनिट्स में बने समान ब्रांड्स के उत्पाद भी इसके दायरे में आएंगे।
FSSAI ने क्यों उठाया यह कदम?
भारतीय खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, अल्कोहलिक पेय पदार्थों में केवल अनुमत प्राकृतिक फ्लेवरिंग एजेंट्स का ही उपयोग किया जा सकता है। जांच में संबंधित उत्पादों में कृत्रिम या प्रकृति-समान (Nature Identical) फ्लेवरिंग एजेंट्स के उपयोग के संकेत मिलने पर एफएसएसएआई ने उन्हें ‘सब-स्टैंडर्ड’ (मानक से कम गुणवत्ता वाला) घोषित किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाली शराब का स्वाद उसके कच्चे माल और लंबे समय तक किए गए एजिंग प्रोसेस से विकसित होता है। कृत्रिम फ्लेवर का इस्तेमाल इस प्रक्रिया का विकल्प नहीं माना जाता।
यह भी पढ़ें- वेल्थ क्रिएशन के लिए SIP ही सबसे बेस्ट, नवभारत से बातचीत में बोले LIC म्यूचुअल फंड के MD रवि कुमार झा
नियामक की सख्ती जारी
एफएसएसएआई हाल के महीनों में खाद्य एवं पेय उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सख्ती बरत रहा है। इससे पहले नियामक ने अधिक कैफीन वाले पेय पदार्थों की मार्केटिंग को लेकर भी कई कंपनियों को निर्देश जारी किए थे। अब शराब उद्योग में गुणवत्ता मानकों के पालन को लेकर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। एफएसएसएआई का कहना है कि उपभोक्ताओं को मानकों के अनुरूप और सही गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने वाले उत्पादों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
