लीगल न्यूज डेस्क, 1 अगस्त 2026: भारत बदल रहा है और पिछले कुछ दिनों में भारत का माहौल भी बदल गया है। कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा दिल्ली के जंतर मंतर में जो प्रदर्शन किया गया उसमें युवाओं ने बेलगाम गालियों का प्रयोग किया। इसके बाद जैसे सोशल मीडिया पर गालियों की बाढ़ आ गई है। लोग अपनी पोस्ट और कमेंट में भी गालियों का बेधड़क उपयोग कर रहे हैं लेकिन ऐसे लोगों को बताना जरूरी है कि भले ही भारत का माहौल बदल गया है लेकिन भारत का कानून नहीं बदला। भारतीय न्याय संहिता के तहत इस तरह गाली बाजी करने पर 3 साल जेल का प्रावधान है। विस्तार से बताता हूं कि, कितनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है और कितनी सजा होगी:-
सोशल मीडिया पर पोस्ट या कॉमेंट अपने आप में एविडेंस होते हैं
यहां कानून और दंड प्रावधान बताने से पहले यह बताना जरूरी है कि, सोशल मीडिया पर की गई कोई भी पोस्ट या कमेंट, अपने आप में एविडेंस होते हैं। इसके लिए किसी अतिरिक्त गवाह की जरूरत नहीं होती। यदि कोई कहता है कि उसका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया था, तो उसको साइबर पुलिस के माध्यम से यह बात साबित भी करनी पड़ती है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा करना आपकी अपनी जिम्मेदारी है। इसके लिए किसी भी प्रकार की दलील स्वीकार नहीं होती।
1. शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान (धारा 352)
यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर किसी को "किसी भी तरीके से" (जिसमें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम शामिल हैं) जानबूझकर अपमानित करता है और उसे पता है कि इससे सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है या कोई अन्य अपराध हो सकता है, तो वह इस धारा के तहत दोषी होगा।
सजा: इसके लिए दो वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
2. मानहानि (धारा 356)
यदि सोशल मीडिया पर दी गई गाली या अपमानजनक टिप्पणी किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के इरादे से की गई है, तो यह मानहानि का अपराध है। संहिता की धारा 356(1) में "इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों" को विशेष रूप से संबोधित करने के लिए "किसी भी तरीके से" शब्द जोड़े गए हैं।
सजा: धारा 356(2) के अनुसार, अपराधी को दो वर्ष तक का साधारण कारावास, या जुर्माना, या दोनों, अथवा सामुदायिक सेवा (Community Service) की सजा दी जा सकती है।
3. आपराधिक डराना-धमकाना (धारा 351)
यदि गाली-गलौज के साथ किसी को शरीर, प्रतिष्ठा या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की धमकी दी जाती है, तो यह 'आपराधिक डराना-धमकाना' (Criminal Intimidation) कहलाता है। सोशल मीडिया पर लोगों को इस प्रकार की काफी धमकी दी जाती है। यहां तक की लड़कियों को बलात्कार तक की धमकी दी जाती है। इस धारा में "किसी भी माध्यम से" शब्द जोड़े गए हैं ताकि इलेक्ट्रॉनिक धमकियों को भी कवर किया जा सके।
सजा: सामान्य आपराधिक धमकी के लिए दो वर्ष तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
4. महिला की लज्जा का अपमान (धारा 79)
यदि सोशल मीडिया पर किसी महिला के विरुद्ध ऐसी अपमानजनक भाषा या शब्दों का प्रयोग किया जाता है जिसका उद्देश्य उसकी गरिमा (Modesty) को ठेस पहुँचाना है, तो धारा 79 लागू होती है।
सजा: इसके लिए तीन वर्ष तक का साधारण कारावास और जुर्माना निर्धारित किया गया है।
5. सार्वजनिक उपद्रव पैदा करने वाली टिप्पणी (धारा 353)
यदि सोशल मीडिया पर कोई ऐसी अपमानजनक या झूठी जानकारी साझा की जाती है जिससे विभिन्न समूहों (धर्म, जाति, भाषा आदि के आधार पर) के बीच शत्रुता, घृणा या वैमनस्य फैलता है, तो धारा 353(2) के तहत कार्रवाई होगी।
सजा: इसके लिए तीन वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
निष्कर्ष: BNS 2023 ने स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर किया गया अपमानजनक व्यवहार कानूनन दंडनीय है। पीड़ित व्यक्ति इन धाराओं के तहत पुलिस या साइबर सेल में शिकायत दर्ज करा सकता है, जिसमें अपराधी को 2 से 3 साल तक की जेल या भारी जुर्माना हो सकता है। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी (विधि पत्रकार एवं सलाहकार)।
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