Updated: Monday, October 5, 2026, 16:51 [IST]
Form 6 Explained: देश में नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन से जुड़े फॉर्म 6 को लेकर विवाद गहरा गया है। सोमवार (5 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि उसने फॉर्म 6 में किए गए किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। CJI सूर्यकांत ने चुनाव आयोग से रिकॉर्ड पेश करने को कहा, ताकि पता चल सके कि बदलाव का फैसला किसने लिया। आइए जानते हैं कि पूरा पेंच क्या है...
पहले समझें- फॉर्म 6 क्या है?
फॉर्म 6 नए वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने का आधिकारिक आवेदन है। 18 साल या उससे अधिक उम्र का पात्र भारतीय नागरिक, जिसने पहले मतदाता के तौर पर पंजीकरण नहीं कराया है, इसी फॉर्म के जरिए वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाता है। इसमें नाम, जन्मतिथि, जेंडर, पता, पहचान और उम्र से जुड़े दस्तावेज तथा भारतीय नागरिकता से संबंधित घोषणा देनी होती है।
ECI ने क्या बदला?
SIR यानी Special Intensive Revision के दौरान फॉर्म 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई। इसमें नए मतदाताओं से माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी के नाम, पुराने मतदान केंद्र और पिछली वोटर लिस्ट के सीरियल नंबर जैसी जानकारी मांगी गई। विवाद इसलिए हुआ क्योंकि आलोचकों के मुताबिक ऑनलाइन पोर्टल पर ये जानकारी अनिवार्य दिखाई दे रही थी। इससे पहली बार वोट देने वाले युवाओं के लिए पुराने पारिवारिक वोटर रिकॉर्ड जुटाना मुश्किल हो सकता था।
दो चुनाव आयुक्तों ने क्यों जताई आपत्ति?
मामले में आरोप है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म और कुछ अन्य बदलावों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के सामने आपत्ति जताई थी। दावा किया गया कि कुछ फैसले उनकी सहमति के बिना लिए गए। यही सवाल अब सुप्रीम कोर्ट के सामने भी है- क्या फैसला सिर्फ CEC ने लिया या पूरे आयोग ने इसे मंजूरी दी?
SC ने आज क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'हमने फॉर्म 6 में बदलाव को मंजूरी नहीं दी है।' CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत रिकॉर्ड देखकर यह जानना चाहती है कि आखिर फॉर्म 6 में बदलाव किसने किया। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर आयोग में किसी मुद्दे पर सर्वसम्मति नहीं बनती, तो निर्णय बहुमत के आधार पर होना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार के लिए इसका क्या मतलब?
सबसे अहम बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है। यानी वे अपने पद पर बने रहेंगे। लेकिन अदालत अब चुनाव आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया और फॉर्म 6 में बदलाव के रिकॉर्ड की जांच करना चाहती है। यदि रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि किसी महत्वपूर्ण फैसले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो उस फैसले की कानूनी वैधता पर सवाल उठ सकता है।