जुलाई में घरेलू विमान यात्रा करने वाले यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या उड़ान नहीं, बल्कि उनका सामान रहा। सामान गुम होने, देर से मिलने या उसके गलत तरीके से रखे जाने की शिकायतें कुल शिकायतों में सबसे ज्यादा रहीं। विमानन क्षेत्र में यात्रियों की संख्या लगातार बड़ी है और जुलाई में करीब 120 लाख लोगों ने घरेलू उड़ानों से सफर किया। इतनी बड़ी संख्या के बीच बैगेज व्यवस्था पर दबाव बढ़ना यात्रियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
जुलाई में यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत क्या रही?
नागर विमानन महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार जुलाई में घरेलू विमानन कंपनियों को कुल 2,196 शिकायतें मिलीं। इनमें करीब 31.3 फीसदी यानी लगभग 687 शिकायतें सामान से जुड़ी थीं। यात्रियों ने सामान गुम होने, देर से मिलने और उसके रखरखाव से जुड़ी समस्याओं की शिकायत की। इसके बाद उड़ान से संबंधित समस्याओं की 20.6 फीसदी और रिफंड से जुड़ी 18.4 फीसदी शिकायतें रहीं। हालांकि यात्रियों की कुल संख्या को देखते हुए शिकायतों का आंकड़ा कम रहा। जुलाई में प्रति 10 हजार यात्रियों पर 1.83 शिकायतें दर्ज हुईं।
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क्या उड़ानों में देरी भी यात्रियों की बड़ी परेशानी रही?
जुलाई में निर्धारित घरेलू उड़ानों में से 1.26 फीसदी उड़ानें दो घंटे से ज्यादा की देरी से चलीं। इनमें स्पाइसजेट की करीब 28 फीसदी उड़ानें देरी से रवाना हुईं। हालांकि शिकायतों के आंकड़े में सामान से जुड़ी समस्याएं सबसे ऊपर रहीं। इससे पता चलता है कि यात्री के लिए समय पर उड़ान मिलना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसका सामान सही समय पर और सही हालत में मिलना भी है। बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही के बीच एयरलाइंस और एयरपोर्ट की बैगेज व्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है।
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क्या बढ़ता हवाई यातायात बैगेज व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहा है?
- जुलाई में करीब 120 लाख यात्रियों ने घरेलू उड़ानों से सफर किया। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के साथ सामान की मात्रा भी काफी बढ़ जाती है। भारी भीड़ के समय एयरपोर्ट और एयरलाइंस का पूरा सिस्टम दबाव में आ सकता है। ऐसे में केवल विमान समय पर उड़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यात्रियों के सामान को भी उसी गति से संभालना जरूरी है।
- बैगेज व्यवस्था में कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या, बेहतर ट्रैकिंग तकनीक और आधुनिक सॉर्टिंग सिस्टम की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। जुलाई के शिकायत आंकड़े यही संकेत देते हैं कि हवाई यात्रा का अनुभव केवल सीट और उड़ान से तय नहीं होता। यात्री को उसका सामान सुरक्षित और समय पर मिलना भी उतना ही जरूरी है। सवाल यही है कि जैसे-जैसे घरेलू हवाई यातायात बढ़ेगा, क्या एयरलाइंस और एयरपोर्ट की बैगेज व्यवस्था भी उसी रफ्तार से आधुनिक हो पाएगी?
सामान गुम होने या देर से मिलने की वजह क्या है?
सामान से जुड़ी समस्या के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ एयरपोर्ट पर बैगेज संभालने का काम भी बढ़ा है। कई जगह कर्मचारियों की कमी के कारण सामान समय पर विमान तक नहीं पहुंच पाता। दो कनेक्टिंग उड़ानों के बीच कम समय होने पर भी बैगेज को एक विमान से दूसरे विमान तक पहुंचाने में दिक्कत आती है। इसके अलावा पुराने बैगेज ट्रैकिंग सिस्टम, पुरानी बेल्ट और स्वचालित सामान छंटाई व्यवस्था में तकनीकी समस्या भी परेशानी बढ़ा सकती है। कई बार सामान के टैग पर लगा बारकोड खराब या गीला होने से स्कैनर उसे पढ़ नहीं पाता। ऐसे में सामान गलत जगह पहुंच सकता है या उसे ढूंढने में देरी हो सकती है।