इंडिया में अब पहले के मुकाबले हाईवे और एक्सप्रेसवे तेजी से बन रहे हैं और कुछ राज्यों में काम पूरा भी हो चुका है और लोग अपनी गाड़ी उसपर चला भी रहे हैं. हाईवे पर चलने के लिए सरकार टोल टैक्स भी वसूलती है. हालांकि, सरकार ने जनता की सुविधा के लिए कुछ सालों से फास्टैग एनुअल पास भी शुरू किया है. यह उन लोगों के लिए एक बहुत ही किफायती और शानदार विकल्प साबित हो रहा है जो अक्सर नेशनल हाईवेज और एक्सप्रेसवे पर सफर करते हैं. मात्र 3,075 रुपये में यह पास यूजर्स को पूरे 1 साल के लिए बार-बार टोल टैक्स देने के झंझट से मुक्ति दिलाता है. लेकिन इस पास को खरीदते समय कई तरह की शर्तें और सीमाएं भी लागू होती हैं.
आपको बता दें कि, बहुत से लोगों को यह भी लगता है कि अगर पास की अवधि पूरी होने के बाद उनकी निर्धारित ट्रिप्स बच जाती हैं तो क्या बची हुई ट्रिप्स के बदले कोई डिस्काउंट या पैसा वापस मिलेगा. तो चलिए जानते हैं फास्टैग एनुअल पास से जुड़े सभी नियम और बची हुई ट्रिप्स पर एनएचएआई की क्या पॉलिसी है.
बची हुई ट्रिप्स का मिलेगा रिफंड?
आपको बता दें कि, अगर आपके फास्टैग एनुअल पास में समय सीमा खत्म होने के बाद ट्रिप्स बच जाती हैं तो उस पर कोई भी डिस्काउंट या रिफंड नहीं मिलेगा. एनएचएआई के नियमों के अनुसार, इस पास में दिया जाने वाला डिस्काउंट आपको खरीदते समय ही एकमुश्त मिल जाता है.
इसलिए पास की वैलिडिटी खत्म होने के बाद बची हुई ट्रिप्स पूरी तरह से लैप्स हो जाती हैं. आप बची हुई ट्रिप्स को अगले साल के पास में कैरी-फॉरवर्ड भी नहीं करा सकते और न ही उनके बदले पैसे वापस पाने का कोई प्रावधान है. जानकारी दें दे कि, एक साल में आपको 200 ट्रिप मिलती हैं.

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क्या है फास्टैग एनुअल पास का नियम?
बता दें कि, फास्टैग एनुअल पास की वैलिडिटी को लेकर दो मुख्य शर्तें तय की गई हैं. यह पास जारी होने की तारीख से 12 महीने या फिर अधिकतम 200 ट्रिप्स जो भी पहले पूरा हो जाए तक ही मान्य रहता है.
उदाहरण के तौर पर समझे तो अगर आपने 6 महीने में ही 200 ट्रिप्स पूरी कर लीं तो आपका पास वहीं खत्म हो जाएगा. वहीं, अगर 1 साल में आपने सिर्फ 120 ट्रिप्स ही इस्तेमाल कीं तो 12 महीने पूरे होते ही पास अपने आप एक्सपायर हो जाएगा और बची हुई 80 ट्रिप्स बेकार हो जाएंगी.

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ट्रिप्स खत्म होने के बाद क्या होगा?
जानकारी दें दे कि, जैसे ही आपके एनुअल पास की 1 साल की अवधि समाप्त होती है या फिर 200 ट्रिप्स की सीमा खत्म होती है. आपका FASTag अपने आप एक नॉर्मल फास्टैग में बदल जाता है.
जबकि इसके बाद जब भी आप किसी टोल प्लाजा से गुजरेंगे तो आपके लिंक बैंक अकाउंट या फास्टैग वॉलेट से सामान्य टोल दर के हिसाब से पैसे कटेंगे. अगर आप पास के फायदों को जारी रखना चाहते हैं तो आपको एनुअल पास को फिर से 3,075 रुपये का भुगतान करके री-एक्टिवेट कराना होगा.
क्या फायदेमंद है यह एनुअल पास?
अब बात करते हैं कि क्या यह स्कीम फायदेमंद है या नहीं तो आपको बता दें कि, फास्टैग एनुअल पास का मुख्य उद्देश्य बार-बार नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले चालकों को 70% से 80% तक की भारी बचत देना है. क्योंकि, जो लोग महीने में कम से कम 10 से 15 बार नेशनल हाईवे या एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा से गुजरते हैं उनके लिए यह पास बेहद फायदेमंद है.
लेकिन अगर आप साल में सिर्फ 2 या 3 बार ही लंबी दूरी की यात्रा करते हैं तो एनुअल पास खरीदना आपके लिए घाटे का सौदा हो सकता है. क्योंकि बची हुई ट्रिप्स का आपको कोई रिफंड नहीं मिलेगा.
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