August 17, 2026

Facebook से Pakistan तक! मेरठ में पकड़े गए 'आतंकी' की कहानी ने ATS को भी चौंकाया

UP ATS JeM module: मेरठ में यूपी ATS ने 24 वर्षीय मोहम्मद जफर को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक उसके कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संपर्क और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच हो रही है। टेरर फंडिंग और पाकिस्तान कनेक्शन भी जांच के दायरे में है।

उत्तर प्रदेश में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के बीच यूपी एटीएस ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें सोशल मीडिया, कट्टरपंथी प्रचार और कथित टेरर फंडिंग के तार जुड़ते नजर आ रहे हैं। एटीएस ने मेरठ की एक मस्जिद से 24 वर्षीय मोहम्मद जफर को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक, जफर मूल रूप से बिहार के पूर्णिया जिले का रहने वाला है और उसके कथित संपर्क पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े थे।

एटीएस का दावा है कि जफर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने और उन्हें आतंकवाद के लिए उकसाने की कोशिश कर रहा था। जांच में कथित तौर पर उसके पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क और आर्थिक लेनदेन के पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

सोशल मीडिया पर भड़काऊ कंटेंट फैलाने का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, जफर सोशल मीडिया को कथित तौर पर युवाओं तक कट्टरपंथी विचार पहुंचाने के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल करता था। वह फेसबुक पर चेहरा ढककर वीडियो बनाता और उनमें 'जिहाद' तथा 'खिलाफत' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश करता था।

एटीएस का यह भी दावा है कि वह जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर से जुड़े भाषणों और जिहादी वीडियो को शेयर करता था। जांच एजेंसी के मुताबिक, जफर मसूद अजहर को अपना आदर्श मानता था।

हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल मामला जांच के चरण में है।

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मोबाइल जांच में पाकिस्तानी ग्रुप्स का दावा

एटीएस के मुताबिक, जफर के मोबाइल फोन की जांच के दौरान कई ऐसे व्हाट्सऐप ग्रुप सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर पाकिस्तान से जुड़े लोगों के साथ जिहाद को लेकर बातचीत होती थी।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन डिजिटल संपर्कों का नेटवर्क कितना बड़ा था और जफर के अलावा इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

यही वजह है कि मामले की जांच केवल गिरफ्तार आरोपी तक सीमित नहीं रखी जा रही है। एटीएस उसके कथित डिजिटल संपर्कों, सोशल मीडिया गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है।

मदरसे के नाम पर चंदा और Crypto के जरिए फंडिंग का आरोप

जांच में सामने आए एक अन्य गंभीर आरोप के मुताबिक, जफर ने जिस मदरसे में पढ़ाई की थी, उसके नाम पर लोगों से चंदा जुटाया। एटीएस का दावा है कि इस रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर पाकिस्तान में मौजूद हैंडलर्स तक पैसा पहुंचाने के लिए किया गया।

एजेंसी के मुताबिक, रकम को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भेजा गया और यह काम कथित पाकिस्तानी हैंडलर्स के निर्देश पर किया गया।

टेरर फंडिंग से जुड़े इस पहलू की जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एजेंसी को अब यह पता लगाना होगा कि पैसा कहां से आया, किस नेटवर्क के जरिए भेजा गया और कथित तौर पर इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाना था।

UAPA समेत इन धाराओं में मुकदमा

यूपी एटीएस ने मोहम्मद जफर के खिलाफ UAPA की धारा 18/38 और BNS-2023 की धारा 152 तथा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। पूछताछ के दौरान आरोपी की ओर से कथित तौर पर कई खुलासे किए जाने की बात एजेंसी ने कही है।

एटीएस के अनुसार, पूछताछ में जफर ने बताया कि पढ़ाई के दौरान उसने जिहाद और मुजाहिदों की शहादत से जुड़ी सामग्री पढ़ी थी। एजेंसी अब यह जांच रही है कि कथित कट्टरपंथी प्रभाव किस तरह उसके व्यवहार और गतिविधियों में बदला। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

अब पूरे नेटवर्क की तलाश में ATS

मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला फोकस उसके कथित संपर्कों और नेटवर्क पर है। एटीएस सोशल मीडिया अकाउंट्स, मोबाइल डेटा, व्हाट्सऐप ग्रुप्स और कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। अगर जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोप जांच एजेंसी के दावों पर आधारित हैं और अदालत में इनकी न्यायिक जांच बाकी है।

मेरठ में हुई यह गिरफ्तारी इसलिए अहम है क्योंकि जांच में कथित तौर पर कट्टरपंथी ऑनलाइन प्रचार से लेकर सीमा पार संपर्क और फंडिंग तक की कई कड़ियां सामने आने का दावा किया गया है। अब ATS की जांच से यह स्पष्ट होगा कि यह नेटवर्क कितना बड़ा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।

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