August 21, 2026

Explainer: क्या दिल्ली में कोई भी, कहीं भी धरने पर बैठ सकता है? पहले PM हाउस, अब DCP ऑफिस के बाहर राहुल गांधी का धरना; जानिए नियम

क्या दिल्ली में कोई किसी भी सार्वजनिक जगह पर रैली, मार्च या धरने पर बैठक सकता है. राहुल गांधी के एक बार फिर धरने पर बैठने से ये सवाल उठे हैं. राहुल की इस बार धरने पर बैठने जगह है पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने का DCP ऑफिस. वह इससे पहले पीएम हाउस के पास धरने पर बैठे थे.

दिल्ली पुलिस प्रवक्ता के अनुसार राजधानी में धरना करने से पहले दिल्ली पुलिस से लिखित इजाजत लेना अनिवार्य है. बिना अनुमति का कोई भी प्रदर्शन गैर-कानूनी माना जाता है.

आवेदन कहां और कैसे देना होता है

- संबंधित इलाके के DCP या नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट पुलिस दफ्तर में आवेदन देना पड़ता है.
- आम तौर पर यह आवेदन प्रदर्शन की तय तारीख से करीब 7 से 10 दिन पहले देना होता है.
- फॉर्म दिल्ली पुलिस की वेबसाइट या स्थानीय थाने से मिल जाता है.
- आयोजकों को अपने वालंटियर्स की पूरी सूची भी पुलिस को सौंपनी होती है, ताकि भीड़ प्रबंधन आसान रहे.

आज क्या हुआ, राहुल गांधी कहां धरने पर बैठे?

जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को राहुल गांधी पहले मंदिर मार्ग थाने पहुंचे. यहां उन्होंने बीते 20 जुलाई की छात्र-रैली में कथित तौर पर पैलेट गन से घायल हुए सहिल लोचव केस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की. बता दें इस दौरान साहिल लोचव उनके साथ थे. उनकी शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज करने से इनकार कर दिया. फिर इसके बाद वे DCP सेंट्रल से मिलने पहुंचे. उनसे मुलाकात के बाद वह उनके कमरे से बाहर निकले और फिर अपने समर्थकों के साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर धरने पर बैठ गए.  बता दें इससे पहले वह 21-22 जुलाई को वह बहन प्रियंका गांधी और कई विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के करीब जाकर धरने पर बैठ गए थे.

पुलिस ने दिया ये जवाब, उठे सवाल दिल्ली में धरना देने का कानूनी तरीका क्या है?

राहुल गांधी की मांग है पैलेट गन इस्तेमाल मामले में FIR दर्ज की जाए. वहीं, दिल्ली पुलिस का इस मामले में कहना है कि राहुल गांधी की शिकायत ले ली गई है. उनकी शिकायत क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है. जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. अब सवाल उठ रहे हैं कि दिल्ली में धरना देने का कानूनी तरीका क्या है?

LIVE: Media Bite | Parliament Street Police Station, New Delhi https://t.co/Fvf6NxHxqy

— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 21, 2026

हर जगह इजाजत नहीं मिलती

नियमों के अनुसार दिल्ली में जंतर-मंतर को परंपरागत रूप से प्रदर्शन करने की जगह माना जाता है. लेकिन यहां भी बिना अनुमति धरना नहीं दिया जा सकता है. दरअसल, पीएम हाउस समेत कुछ इलाकों में प्रदर्शन करने की इजाजत लगभग कभी नहीं मिलती क्योंकि ये जगहें हाई-सिक्योरिटी जोन में आती हैं और इससे सुरक्षा व्यवस्था  बिगड़ सकती है.

क्या PM हाउस या पुलिस दफ्तर के बाहर बैठना कानूनन सही है

PM हाउस या पुलिस दफ्तर के बाहर बैठना कानूनन सही नहीं है. कानून के जानकारों की मानें तो प्रधानमंत्री आवास जैसी जगहें VVIP सुरक्षा घेरे में आती हैं और वहां प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जाती है. इसके अलावा पुलिस थाने के बाहर धरना देना तकनीकी तौर पर तो गलत नहीं है लेकिन किसी शिकायत या शिकायत न सुने जाने के विरोध में ऐसा करना सही नहीं है. इससे यातायात व्यवस्था बाधित होने, सरकारी कार्यालय के काम में बाधा उत्पन्न होने जैसी परेशानी हो सकती हैं. ऐसे में पुलिस थानों या पुलिस अधिकारियों के ऑफिसों के बाहर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं है.

आज साहिल लोचब के साथ, उनके साथ हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ FIR दर्ज कराने संसद मार्ग के DCP कार्यालय पहुँचा।

20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पैलेट गन से हमला किया। छर्रों से बुरी तरह घायल साहिल की एक आँख की रौशनी खतरे में है।

शांतिपूर्ण… pic.twitter.com/on2uKkNeUM

— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 21, 2026


FAQ

Q. क्या बिना इजाजत धरना देना अपराध है?

A. हां. अगर पुलिस किसी इलाके में निषेधाज्ञा या धारा 163 लगाती है और आप वहां इकट्ठा हो जाते हैं कि तो ये गैर-कानूनी तरीके से सभा करने के सामान होता है. इसके अलावा बिना पुलिस अनुमति के सार्वजनिक स्थान पर एकत्रित होना नियमों के खिलाफ है.

Q. धारा 163 क्या है और इसका धरने-प्रदर्शन से क्या लेना-देना है?

A. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 में किसी इलाके में भीड़ जुटने, प्रदर्शन करने या कुछ खास गतिविधियों पर अस्थायी रोक होती है, कभी कभी संवेदनशील इलकों या मौकों पर भी सुरक्षा कारणों से इसे लगाया जाता है.

Q. क्या सांसद होने पर धरना करने के नियमों से आपको छूट मिल जाती है?

A. नहीं. सांसद या विधायक होना पर धरने के लिए अलग से कोई कानूनी छूट नहीं होती है. हां, ये बात जरूर है कि राजनीतिक कद की वजह से पुलिस अक्सर सीधे बल प्रयोग करने की बजाय पहले बातचीत की कोशिश करती है.

Q. अगर पुलिस अनुमति ही न दे तो क्या रास्ता बचता है?

A. आयोजक अदालत का रुख कर सकते हैं. दिल्ली हाईकोर्ट पहले भी कह चुका है कि प्रदर्शन की अनुमति देना या न देना पुलिस का अधिकार क्षेत्र है और शहर के बीचोंबीच बड़े प्रदर्शनों को हतोत्साहित किया जाता रहा है.

Q. तो राहुल गांधी पर क्या कार्रवाई हो सकती है

A. नियमों के हिसाब से देखें तो अगर धरना बिना पूर्व अनुमति के है और पुलिस उसे "अनधिकृत जमावड़ा" मानती है, तो सैद्धांतिक तौर पर हिरासत में लेना, हटाना या गैर-कानूनी सभा से जुड़ी धाराओं में कार्रवाई करना पुलिस के दायरे में आता है.

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