July 23, 2026

Explainer: जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन में क्यों कूदी कांग्रेस? क्या होगा इसका असर

21 जुलाई की दोपहर 3.30 बजे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे सहित कुछ कांग्रेसी नेताओं के साथ पैदल ही प्रधानमंत्री आवास की ओर चल दिए. कांग्रेस के इस मार्च की न तो पुलिस को कोई खबर थी और न ही फिर मीडिया को. हालांकि, 3.20 घंटे बाद ही पुलिस ने बलपूर्वक राहुल-प्रियंका को उठाकर धरना खत्म करवा दिया. राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का ये प्रदर्शन ठीक संसद मार्च के दिन बाद हुआ. संसद मार्च वाली सुबह कांग्रेस ने नो कमेंट्स का बयान दिया था. 

ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल हैं, आखिर राहुल गांधी अन्य विपक्षी नेताओं की तरह जंतर-मंतर न जाकर प्रधानमंत्री आवास क्यों गए. क्या राहुल गांधी सीजेपी का प्रदर्शन हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं. आइये जानते हैं…. 

20 जुलाई से पहले क्या हुआ

कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून से जंतर-मंतर पर अपना प्रदर्शन शुरू किया था. इस आंदोलन में आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए, लेकिन कांग्रेस ने इससे दूरी बनाए रखी. राजनीतिक जानकारों का मानना था कि कांग्रेस को आशंका थी कि कॉकरोच पार्टी पेपर लीक जैसे अहम मुद्दे पर उसकी राजनीतिक बढ़त को चुनौती दे सकती है.

17 जुलाई को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में NEET पेपर लीक के मुद्दे पर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में हिस्सा लिया. यह कार्यक्रम पहले परेड ग्राउंड में प्रस्तावित था, लेकिन जिला प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण इसे एक स्कूल परिसर में आयोजित किया गया. कार्यक्रम स्थल बदले जाने से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई. राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित करते हुए आधे घंटे से अधिक समय तक पेपर लीक के मुद्दे पर अपनी बात रखी. हालांकि, इस कार्यक्रम को मीडिया में अपेक्षित चर्चा नहीं मिल सकी.

इस बीच, संसद के मानसून सत्र से पहले कांग्रेस संसदीय दल की बैठक के बाद कॉकरोच पार्टी के प्रति कांग्रेस का रुख कुछ नरम होता दिखाई दिया. 17 जुलाई को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे और सोनम वांगचुक से मुलाकात की.

20 जुलाई के बाद क्या हुआ

प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन करने के अलावा, संसद भवन से बाहर निकलते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मीडिया से कहा, "ये हमारे बच्चे हैं. सरकार चर्चा करने के बजाय अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों पर आंसू गैस छोड़ रही है और लाठीचार्ज कर रही है. यह बेहद निंदनीय है."

इसके बाद राहुल गांधी ने रात में सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं. स्थिति यह है कि वह शिक्षा व्यवस्था में लगातार सवालों के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा तक नहीं ले पा रहे हैं. जब छात्रों ने शिक्षा से जुड़े अपने जायज सवाल उठाए, तो उन्हें जवाब में लाठीचार्ज और हिरासत मिली. पेपर लीक के आरोपी खुले घूम रहे हैं, जबकि अपने अधिकारों की मांग करने वाले छात्रों को घसीटा और पीटा जा रहा है."

21 जुलाई की सुबह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मिले. हालांकि, उन्होंने उस दिन जंतर-मंतर जाने के बजाय अपनी अलग रणनीति पर काम किया.

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कांग्रेस छात्रों की बेचैनी का श्रेय खुद लेना चाहती है- पॉलिटिकल एक्सपर्ट

पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि छात्रों की बेचैनी की आवाज उठाने का श्रेय राहुल गांधी खुद को या कांग्रेस पार्टी को ही देना चाहते हैं. कांग्रेस इसे बिल्कुल भी शेयर नहीं करना चाहती है. अगर राहुल पहले ही सोनम वांगचुक को जूस पिलाने चले जाते तो ऐसा लगता कि कांग्रेस वांगचुक के आंदोलन के पीछे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि राहुल सिर्फ सरकार की ओर से गलती होने का इंतजार कर रहे थे. छात्रों पर जैसे ही लाठियां चलीं, राहुल एक्टिव हो गए. राहुल इस प्रदर्शन में सीजेपी के पक्ष में नहीं है. वे छात्रों के पक्ष में हैं. इससे ये बात साफ हो जाती है कि राहुल पूरा गणित लगाने के बाद ही पैसला लेते हैं. वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि राहुल ने CJP के प्रोटेस्ट की मांगों को और ऊपर कर दिया है. वे न केवल शिक्षा मंत्री, बल्कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का भी इस्तीफा मांग रहे हैं.

सीजेपी का भविष्य क्या है?

पॉलिटिकल एक्सपर्ट का कहना है कि राहुल गांधी पहले से ही पेपर लीक के मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं. उनके अनुसार, CJP के आंदोलन के बाद इस मुद्दे का केंद्र कुछ समय के लिए बदला था, हालांकि, 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं. उनका कहना है कि अगर राहुल इस मुद्दे पर लगातार एक्टिव रहते हैं, तो उनका कद अधिक बढ़ सकता है.

वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि CJP कोई स्थापित राजनीतिक दल नहीं है. उनके अनुसार, आंदोलन के बाद इसके नेताओं की आगे की दिशा उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर निर्भर करेगी. फिलहाल, CJP के राजनीतिक भविष्य को लेकर आश्वस्त नहीं हैं.

पॉलिटिकल एक्सपर्ट का मानना है कि CJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी पहचान को लेकर बनी हुई अस्पष्टता है. लोगों के बीच इसे लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं. कुछ लोग इसे आम आदमी पार्टी जैसी राजनीतिक पहल मानते हैं. कुछ इसे सिविल सोसाइटी का आंदोलन समझते हैं. उनका कहना है कि यदि CJP खुद को एक राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहता है. उसे अपनी नेतृत्व संरचना और संगठनात्मक पहचान को अधिक स्पष्ट करना होगा. 

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विपक्ष के इन नेताओं ने किया सीजेपी का समर्थन

राहुल के अलावा, दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन को समर्थन देने शरद पवार, अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे सहित कई प्रमुख विपक्षी नेता पहुंचे. आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह, आतिशी और टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा सहित अन्य शामिल हैं.