September 11, 2026

Explainer: क्रिकेटर्स को फिटनेस हासिल करने के लिए पार करने होते हैं कौन-कौन से टेस्ट? सभी के बारे में विस्तार से जानिए

Cricket Fitness Test : क्रिकेट का खेल सबसे मेहनत बाले गेम में से एक हैं. इसमें एक समय पर मैदान पर कुल 11 खिलाड़ी फील्डिंग कर रहे होते हैं. इन सभी खिलाड़ियों के इधर से उधर हमेशा भागते रहना होता है. क्रिकेट के मैदान में एक साथ 2 बल्लेबाजी भी बल्लेबाजी करते हैं, वो बॉल पर बल्ले के साथ शॉट लगाते हैं. ऐसे में बॉल जिधर जाती है, उधर ही फील्डर को भागना होता है. ये खेल खिलाड़ियों को थकाने वाला होता है. 

क्रिकेट के खेल में कभी-कभी खिलाड़ी चोटिल भी हो जाते हैं. उनके चोट लगने की अलग-अलग वजहें होती हैं. कभी प्लेयर्स बॉल लगने की वजह से चोटिल हो जाते थे, तो वहीं कभी खिलाड़ी फील्डिंग करते समय बॉल को रोकने के दौरान डाइव लगाने के चलते अपने आप को चोटिल करवा बैठते हैं. कई खिलाड़ी बॉलिंग करते समय चोटिल हो जाते हैं. बल्लेबाजी करते समय भी कई खिलाड़ी चोटिल हो जाते हैं. 

Fitness Test 🏏#BCB | #Cricketpic.twitter.com/nM4SYHtZTm

— Bangladesh Cricket (@BCBtigers) August 3, 2023

एक खिलाड़ी की चोट को टीम को कर देती है कमजोर

क्रिकेट के खेल में खिलाड़ियों का चोटिल होना अक्सर लगा रहता है. लेकिन जब खिलाड़ी चोटिल होकर टीम से बाहर हो जाते हैं, तो टीम काफी कमजोर हो जाती है क्योंकि वो खिलाड़ी टीम की रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं. इन खिलाड़ियों के बाहर जाने से टीम पर बड़ा असर पड़ता है, जो उनके हार और जीत की वजह बन जाता है. जैसे कि भारतीय क्रिकेट टीम के खतरनाक ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या के चोटिल होकर बाहर होना का बड़ा असर टीम पर पड़ता है. 

हार्दिक पांड्या तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर है. वो तेज गति से बॉल करते हैं और टीम में प्रमुख तेज गेंदबाज की भूमिका निभाते हैं. वहीं बल्लेबाजी में हार्दिक पांड्या टीम के प्रमुख फिनिशर हैं, वो लंबे-लंबे चौके-छक्के लगाने के लिए जाने जाते हैं. हार्दिक पांड्या जब नहीं होते तो टीम की ताकत कम हो जाती है क्योंकि हार्दिक का इंडियन क्रिकेट में कोई विकल्प मौजूद नहीं है. ऐसा ही कुछ तब होता है, जब जसप्रीत बुमराह टीम से बाहर होते हैं. बुमराह का भी विकल्प टीम के पास नहीं होता है. वो एक वर्ल्ड क्लास और यूनिक तेज गेंदबाज हैं.

फिटनेस पाने के लिए प्लेयर करवाते हैं सर्जरी

दुनिया भर की सभी क्रिकेट टीमों के खिलाड़ी जब चोटिल हो जाते हैं तो उन्हें कभी-कभी सर्जरी करना पड़ती है. इसके बाद उन्होंने रिकवरी में काफी लंबा समय लग जाता है. वहीं कभी-कभी आराम और ख्याल रखने के साथ-साथ दवाइयां खाने और एक्सरसाइज करने से भी खिलाड़ी पूरी तरह फिट हो जाते हैं.

जब ये खिलाड़ी अपनी रिकवरी कर लेते हैं तो उनको अपनी-अपनी नेशनल टीम में वापस आने से पहले कई सारे टेस्ट पार करने होते हैं, जिनको पार करने के बाद उन्होंने टीम में वापस जगह मिलती है. तो आज हम आपको उन्हीं कुछ खास टेस्ट के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें पार करने के बाद इन खिलाड़ियों को टीम में फिर से वापसी करने का मौका मिलता है. 

मैच फिट होने के लिए खिलाड़ी पार करते हैं कौन-कौन से टेस्ट?

क्रिकेट में एक खिलाड़ी को फिटनेट हासिल करने के लिए कई सारे टेस्ट से गुजरना पड़ता है. ये सभी अलग-अलग टेस्ट खिलाड़ियों की क्षमताओं को चौक करते हैं और उसे वो मैच में खेलने के लिए फिट है या नहीं ये तय करते हैं. खिलाड़ी जब पूरी तरह मैच फिट होता है, तभी उसे खेलने के लिए इजाजत दी जाती है. 

1 - यो-यो टेस्ट

क्रिकेट में सबसे ज्यादा चर्चा होने वाला फिटनेस टेस्ट यो-यो टेस्ट होता है. भारतीय क्रिकेट में भी यो-यो टेस्ट से खिलाड़ियों को गुजरना पड़ता है. इसमें खिलाड़ी को दो निर्धारित लाइनों के बीच आगे-पीछे दौड़ना होता है. बीप की आवाज के साथ गति धीरे-धीरे बढ़ती जाती है. हर शटल के बीच थोड़े समय का रिकवरी पीरियड मिलता है. इससे मुख्य रूप से पता चलता है कि खिलाड़ी बार-बार तेज दौड़ने के बाद कितनी जल्दी रिकवर करता है. उसकी एरोबिक क्षमता कैसी है. लंबे समय तक हाई-इंटेंसिटी गतिविधि कर सकता है या नहीं. इस टेस्ट के लिए अलग-अलग क्रिकेट बोर्ड अलग-अलग नियम अपने मुताबिक तय करता है.

BCCI conducting pre-season fitness Test for Indian players likes of Shreyas, Pant, Ruturaj, Sanju, Rinku, Jadeja, Jaiswal and many at CoE 🇮🇳

- An important cricket season starting on September. pic.twitter.com/OSAJSR5WjX

— Johns. (@CricCrazyJohns) August 29, 2026

2 - ब्रोंको टेस्ट 

ब्रोंको टेस्ट एक हाई इनटेंसिटी वाला फिटनेस टेस्ट है, जिसे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के द्वारा भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की सहनशक्ति (endurance) और स्टैमिना जांचने के लिए लागू किया गया था. इसमें खिलाड़ी को बिना रुके 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर की शटल दौड़ लगनी होती है. इन तीनों दूरियों को मिलाकर एक सेट बनता है. ऐसे कुल 5 सेट बिना किसी ब्रेक के लगातार दौड़ने होते हैं, जो खिलाड़ी नहीं कर पाया और उसके नंबर कम आते हैं, वो इस टेस्ट में फेल हो जाता है. इस टेस्ट में सुरेश रैना और युवराज सिंह जैसे तमाम क्रिकेटर्स फेल हुए हैं. खिलाड़ियों को कुल 1,200 मीटर की दूरी तय करनी होती है. शुरुआत में इसे 6 मिनट में पूरा करना होता था, जिसे अब और सख्त करते हुए 5 मिनट 15 सेकंड से 5 मिनट 20 सेकंड कर दिया गया है.

इन टेस्ट के जरिए भी तय होती है प्लेयर्स फिटनेस

इन दोनों प्रमुख टेस्ट के अलावा कई और कई टेस्ट से भी खिलाड़ियों को गुजरना होता है, जिसने चयनकर्ताओं और बोर्ड को उनकी फिटनेस की सही जानकारी मिल पाती है. इसमें बीप टेस्ट (20 मीटर की दूरी में लगातार आगे-पीछे दौड़ना), 2 किमी रन टेस्ट (खिलाड़ियों का निर्धारित दूरी कम से कम समय में पूरी करना), स्प्रिंट टेस्ट ( 10m, 20m या 30m तक तेज भागना) आदि प्रकार के टेस्ट शामिल हैं. इससे तय होता है कि खिलाड़ी कितनी तेजी से गति पकड़ता है और कितनी तेज दौड़ सकता है, जिसके आधार पर उसकी फिटनेस का आंकलन हो जाता है. इसके बाद ही उन्हें फिट घोषित किया जाता है.

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