Fri, 21 Aug 2026 06:04 AM IST
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Fri, 21 Aug 2026 06:04 AM IST
सार
टेक दिग्गज खुद अपने बच्चों का सोशल मीडिया और स्क्रीन इस्तेमाल सीमित रखते हैं, जबकि दुनियाभर में बच्चों पर इसके मानसिक स्वास्थ्य, नींद, ध्यान और साइबर बुलिंग जैसे असर सामने आ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार समस्याग्रस्त सोशल मीडिया इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसी चिंता के चलते कई देश बच्चों के लिए उम्र सीमा तय कर रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
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सोशल मीडिया का खतरा - फोटो : Amar Ujala
विस्तार
सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक ने हमारी जिंदगी को आसान और तेज बनाया है। लेकिन इस तकनीक की दुनिया के बड़े नाम अपने बच्चों के मामले में इसके इस्तेमाल को सीमित रखने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिन लोगों ने डिजिटल दुनिया को इतना बड़ा बनाया, वे अपने बच्चों को इससे क्यों दूर रखना चाहते हैं? क्या सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार को प्रभावित कर रहा है? विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े क्या कहते हैं? दुनिया के कई देश बच्चों के लिए सोशल मीडिया की उम्र सीमा तय करने की ओर क्यों बढ़ रहे हैं? इन प्लेटफॉर्मस पर कब-कब ऐसे मामले देखने को मिले हैं? भारत इस दिशा में क्या कर रहा है?
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टेक दिग्गज अपने बच्चों को स्क्रीन से क्यों रखते हैं दूर?
मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने कहा था कि वह नहीं चाहते कि उनके बच्चे लंबे समय तक टीवी या कंप्यूटर के सामने बैठे रहें। उनके अनुसार लोगों के साथ बातचीत करना अच्छी बात है, लेकिन लगातार एक वीडियो से दूसरे वीडियो पर जाना उतना सकारात्मक नहीं है।
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फेसबुक के शुरुआती निवेशक पीटर थील ने 2024 में बताया था कि उनके साढ़े तीन और पांच साल के बच्चों का स्क्रीन समय सप्ताह में केवल डेढ़ घंटे यानी 90 मिनट था।
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माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने अपने बच्चों को 14 साल की उम्र तक मोबाइल फोन नहीं दिया। गूगल के प्रमुख सुंदर पिचाई ने बताया था कि उनका 11 साल का बेटा भी फोन इस्तेमाल नहीं करता था। एप्पल के प्रमुख टिम कुक ने कहा था कि वह अपने भतीजे को सोशल नेटवर्क से दूर रखते हैं।
स्नैप के प्रमुख इवान स्पीगल ने भी अपने बच्चों के स्क्रीन इस्तेमाल को सीमित रखने की बात कही थी। 2018 में उन्होंने अपने सात साल के बच्चे के लिए सप्ताह में केवल 90 मिनट स्क्रीन समय की बात कही थी। बाद में उन्होंने बताया कि उनके दो साल के बच्चे का स्क्रीन समय लगभग शून्य था और छह-सात साल के बच्चे कभी-कभार फिल्म देखते थे, लेकिन फोन इस्तेमाल नहीं करते थे।
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