August 4, 2026

अब 'Energy Drink' नहीं कहलाएगा Sting! FSSAI के सख्त रुख के बाद पेप्सिको ने बदली अपनी चाल

पेप्सिको इंडिया ने ‘स्टिंग’ (Sting) के नए कैन और बोतलों से ‘एनर्जी’ शब्द हटा दिया है. फूड सेफ्टी रेगुलेटर की 90 दिन की डेडलाइन से पहले यह कदम उठाया गया है, क्योंकि रेगुलेटर ने ‘एनर्जी ड्रिंक्स’ को एक अलग कैटेगरी के तौर पर मानना ​​बंद कर दिया है, जबकि दूसरी कंपनियां नियमों को मानने के लिए और समय मांग रही हैं. पेप्सिको के एक प्रवक्ता ने ईमेल के जवाब में ईटी की रिपार्ट में कहा कि कंपनी सभी लागू नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित कर रही है. इस मामले की जानकारी रखने वाले इंडस्ट्री अधिकारियों ने बताया कि रेड बुल, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, मॉन्स्टर और हेल जैसी इस कैटेगरी की दूसरी कंपनियों ने सरकार को अलग-अलग पत्र लिखकर 1 जुलाई से शुरू होने वाली अनिवार्य डेडलाइन को आगे बढ़ाने की मांग की है.

कंपनी ने बदली अपनी चाल

एक अधिकारी ने कहा कि अभी स्टिंग के सभी नए कैन और बोतलें बिना ‘एनर्जी’ शब्द के बनाए जा रहे हैं और इनका स्टॉक जल्द ही दुकानों में आ जाएगा. साथ ही, स्टिंग के सभी विज्ञापनों (जिनमें फॉर्मूला वन स्पॉन्सरशिप डील से जुड़े विज्ञापन भी शामिल हैं) को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है. पेप्सिको ने पिछले साल फॉर्मूला वन के साथ पांच साल की ग्लोबल स्पॉन्सरशिप डील की थी, जिसके तहत स्टिंग को इस खेल के ऑफिशियल एनर्जी ड्रिंक के तौर पर प्रमोट किया गया था.

इसमें टीवी पर दिखने वाले ट्रैकसाइड विज्ञापन, फैन जोन एक्टिवेशन और मार्केटिंग जैसे अधिकार शामिल थे. ब्रांड के नए कैन और बोतलें बिना ‘एनर्जी’ शब्द वाले लेबल के साथ दुकानों में आएंगे. फॉर्मूला वन के विज्ञापनों को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है. कंपनी ने डील की घोषणा करते समय कहा था कि भारत समेत जिन प्रमुख मार्केट में स्टिंग लॉन्च किया गया है, वहां अब यह हिस्सेदारी के मामले में नंबर 1 या नंबर 2 पर है. स्टिंग एनर्जी, F1 इंजन की दहाड़ के साथ जुड़ने के लिए साउंड का इस्तेमाल कर रही है. तब से स्टिंग के कैन पर “फॉर्मूला वन का ऑफिशियल एनर्जी ड्रिंक” लेबल लगा हुआ है.

13 हजार करोड़ का है मार्केट

एनर्जी ड्रिंक्स कैटेगरी का मार्केट साइज़ 13,000 करोड़ रुपए से ज्यादा होने का अनुमान है और कंपनियां सालाना मार्केटिंग पर कुल मिलाकर 2,000 करोड़ रुपए खर्च करती हैं. हालांकि रेड बुल लंबे समय से इस कैटेगरी में हावी रही है, लेकिन 2017 में 50 रुपए प्रति 250-ml कैन के साथ लॉन्च हुए स्टिंग ने बाद में इस कैटेगरी में कीमतें कम करके इसे आम लोगों की पहुंच में ला दिया.

इसने PET बोतलों में 20 रुपए में बिकना शुरू किया, जिससे इसे मार्केट शेयर बढ़ाने में मदद मिली. अब फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) ने यह अनिवार्य कर दिया है कि वह एनर्जी ड्रिंक्स को एक अलग कैटेगरी के तौर पर नहीं मानेगी. उसका आरोप है कि “शरीर और दिमाग को फिर से ऊर्जावान बनाने” जैसे दावे कंज्यूमर्स को गुमराह करते हैं. ET ने अपनी 30 जुलाई की रिपोर्ट में बताया था कि देश भर में डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियों से एनर्जी ड्रिंक्स का मौजूदा स्टॉक लेने से मना कर रहे हैं, जिसकी वजह से रिटेल काउंटर्स पर इन ब्रांड्स में से दर्जनों की कमी दिखने लगी है.

आईबीए का FSSAI को लेटर

इंडियन बेवरेज एसोसिएशन (IBA), जिसमें कोका-कोला, पेप्सिको और रिलायंस जैसे बड़े सदस्य शामिल हैं, ने FSSAI के CEO रजित पुन्हानी को पत्र लिखकर नियम लागू करने से पहले बातचीत करने का आग्रह किया है और कंपनियों की ओर से मुख्य अधिकारियों से मुलाकात भी की है. एनर्जी ड्रिंक्स बनाने वाली एक कंपनी के एग्जीक्यूटिव ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि हमने पहले से प्रिंट हो चुकी कैन और PET बोतलों के कारण होने वाले नुकसान के बारे में FSSAI को अलग से पत्र लिखा है और समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है.

हम जवाब का इंतजार कर रहे हैं. IBA की सेक्रेटरी जनरल गुनवीना चड्ढा ने रेगुलेटर को लिखे पत्र में कहा है कि ये मानक कई वर्षों के विचार-विमर्श और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के बाद जारी किए गए थे. पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स ने कैलेंडर ईयर 2025 के लिए अपने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 8 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 9,798 करोड़ रुपए की कमाई दर्ज की, जबकि नेट प्रॉफिट 4.5 फीसदी बढ़कर 905 करोड़ रुपए हो गया.

ब्रोकरेज फर्म एमके सिक्योरिटीज ने पेप्सिको के बॉटलिंग पार्टनर वरुण बेवरेजेज पर एक नोट में लिखा है कि स्टिंग क्लासिक जैसे नए प्रोडक्ट्स को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है और मांग उम्मीद से बेहतर है, हालांकि एल्युमीनियम कैन की कमी एक रुकावट बनी हुई है.

सौरभ शर्मा

सौरभ शर्मा

15 साल से शेयर मार्केट, इकोनॉमी और कमोडिटी कवर कर रहे हैं. टीवी9 के साथ जुड़ने से पहले डीएनए, ए​शियानेट, जनसत्ता और राजस्थान पत्रिका जैसे कई बड़े संस्थानों के साथ भी जुड़े रहे.

Read More

google button