August 8, 2026

मंडी से डिजिटल मार्केट तक: e-NAM के जरिए UP के किसानों को कैसे मिल रहा फसल का सही दाम?

अपनी उपज का सही दाम पाने के लिए कभी सिर्फ स्थानीय मंडियों पर निर्भर रहने वाला उत्तर प्रदेश का किसान अब एक क्लिक पर पूरे देश के खरीदारों से जुड़ रहा है. e-NAM के जरिए प्रदेश की मंडियां तेज़ी से हाई-टेक हो रही हैं.

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किसानों के लिए सरकार का तोहफा (Photo-Pexels)

किसानों के लिए सरकार का तोहफा (Photo-Pexels)

e-NAM यानी इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट, केंद्र सरकार का एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे 14 अप्रैल 2016 को शुरू किया गया था. यह प्लेटफॉर्म देशभर की मौजूदा कृषि मंडियों (APMC मंडियों) को आपस में डिजिटल रूप से जोड़ता है, ताकि किसान अपनी उपज को सिर्फ अपने नजदीकी मंडी तक सीमित न रखें, बल्कि पूरे देश के खरीदारों तक ऑनलाइन नीलामी के जरिए पहुंचा सकें. इससे दाम मिलने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होती है और बिचौलियों की भूमिका कम होती है.

देशभर में e-NAM की मौजूदा स्थिति

जून 2025 तक की जानकारी के अनुसार:

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  • देशभर में 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 1,522 मंडियां e-NAM से जुड़ चुकी हैं.
  • 1.79 करोड़ से ज्यादा किसान और 2.67 लाख से ज्यादा व्यापारी इस प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड हैं.
  • अब तक कुल ₹4,39,941 करोड़ का कृषि व्यापार e-NAM के जरिए हो चुका है.
  • प्लेटफॉर्म पर 231 कृषि उत्पादों की ऑनलाइन नीलामी की सुविधा है.
  • उत्तर प्रदेश की भूमिका

किसानों की रजिस्ट्रेशन संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है:

  • अगस्त 2025 तक उत्तर प्रदेश में 33.05 लाख किसान e-NAM पर रजिस्टर्ड थे, जो देश में सबसे ज्यादा है
  • उत्तर प्रदेश की मंडियों में कारोबार की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है.  2022-23 में 7.49 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2023-24 में 8.97 लाख मीट्रिक टन, और 2024-25 में 10.89 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई.

मंडियों के आधुनिकीकरण और e-NAM विस्तार का नया फैसला

31 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की 172वीं बोर्ड बैठक हुई, जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹3,025.49 करोड़ के बजट को मंजूरी दी गई.

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इस बैठक में लिए गए कुछ अहम फैसले:

  • मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रदेश की अधिक से अधिक मंडियों को e-NAM प्लेटफॉर्म से जोड़ने का निर्देश दिया.
  • मंडियों में पेयजल, स्वच्छता और प्रकाश जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया.
  • मंडी परिसरों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत कृषि प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) इकाइयां स्थापित करने को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • दलहन-तिलहन की खरीद व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सहकारी संस्थाओं को ब्याजमुक्त कार्यशील पूंजी देने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया.
  • राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से ज्यादा किसानों को जोड़ने और हर जिले में ऑर्गेनिक उत्पादों के सर्टिफिकेशन की व्यवस्था बनाने पर भी निर्देश दिए गए.

किसानों को क्या फायदा होगा

  • अपनी उपज के लिए राज्य और देशभर के ज्यादा खरीदारों तक पहुंच
  • ऑनलाइन नीलामी से दाम तय होने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी
  • मंडियों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी
  • प्रसंस्करण इकाइयां लगने से उपज की वैल्यू एडिशन होगी, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी

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