DUSU Election 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) इलेक्शन 2026 का आधिकारिक शंखनाद हो गया है. नामांकन के बाद नाम वापसी की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है, जिसके बाद छात्र संगठनों ने केंद्रीय पैनल समेत कॉलेज पैनल के लिए अपने-अपने कैंडिडेट्स के नामों का ऐलान कर दिया है. डूसू इलेक्शन 2026 के केंद्रीय पैनल का नाम तय करने में ABVP की राष्ट्रीय महामंत्री डॉ वीरेंद्र सोलंकी एक्टिव रहे. तो वहीं NSUI के कैंडिडेट्स तय करने में NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की सक्रियता किसी से छिपी नहीं है. कुछ ऐसी ही स्थिति AISA समेत दूसरे संगठनों की है, जिनके राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने मौजूदा समय में डीयू में डेरा डाला हुआ है. तो वहीं चुनाव होते ही मुख्य राजनीतिक दलों के नेता भी डीयू पहुंचते हैं.
अब सवाल ये ही है आखिर क्यों डूसू इलेक्शन को इतना खास माना जाता है? क्या कारण है कि सभी छात्रसंगठन डूसू इलेक्शन में ज्यादा जोर लगाते हैं. जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर इसके पीछे क्या कारण हैं.
डीयू में देशभर के स्टूडेंट्स का प्रतिनिधित्व
असल में डीयू में देशभर से स्टूडेंट्स पढ़ने आते हैं. डीयू के कॉलेज की ब्रांड वैल्यू और पारदर्शी एडमिशन व्यवस्था की वजह से प्रत्येक साल कई राज्यों से स्टूडेंट्स एडमिशन के लिए आवेदन करते हैं. मसलन, डीयू में उत्तर भारत के राज्यों से आए स्टूडेंट्स की बहुलता है. तो बड़ी संख्या में नार्थ ईस्ट के राज्यों के स्टूडेंट्स भी हैं. इसी तरह साउथ इंडिया और वेस्टर्न इंडिया से भी बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स डीयू में प्रत्येक साल एडमिशन लेते हैं. ऐसे में डीयू में देशभर के स्टूडेंट्स का प्रतिनिधित्व देखने को मिलता है, जो डूसू इलेक्शन में छात्रसंगठनों के लिए मायने रखता है.
डूसू इलेक्शन में सबसे अधिक मतदाता
डूसू इलेक्शन में सबसे अधिक स्टूडेंट्स वोट करते हैं. प्रत्येक साल 70 हजार नए एडमिशन यूजी में ही होते हैं. ऐसे में समझें तो 4 साल के ग्रेजुएशन और पीजी को मिलाकर लगभग 3 लाख से अधिक स्टूडेंट्सडूसू इलेक्शन के लिए वोट करते हैं. देखें तो भारत समेत दुनिया कि किसी भी यूनिवर्सिटी में इतने स्टूडेंट वोटर यूनियन नहीं चुनते हैं. ऐसे में डूसू इलेक्शन को सबसे बड़ा स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन माना जाता है.
डूसू इलेक्शन से निकले हैं कई नेता
डूसू इलेक्शन को देश के स्टूडेंट इलेक्शन माना जाता है. इसके कई कारण हैं, लेकिन इसमें एक कारण ये भी है कि डूसू इलेक्शन जीतने वाले कई नेता बाद में देश में बड़े नेता के तौर पर स्थापित हुए हैं. इसमें अरुण जेटली से लेकर विजय गोयल, अजय माकन, अलका लांबा, आशीष सूद सरीखे कुशल राजनेता शामिल हैं.
डीयू के स्टूडेंट्स का मिजाज, राजनीतिक दलों के लिए मैसेज
डूसू इलेक्शन में देश के अधिकांश राज्यों से आए स्टूडेंट्स का प्रतिनिधित्व होता है. ऐसे में डूसू चुनाव के नतीजे छात्रसंगठनों के साथ ही राजनीतिक दलों के लिए भी अहम माने जाते हैं. कई मायनाें में डूसू चुनाव में डीयू के स्टूडेंट्स के मिजाज को राजनीतिक दलों के लिए मैसेज के तौर पर देखा जाता है.
राजधानी दिल्ली के छात्रंघ चुनाव पर देश की नजर
डूसू इलेक्शन के खास होने और छात्र संगठनों की तरफ से इस चुनाव के लिए जोर लगाने का कारण आपस में जोड़ा हुआ है. असल में डूसू इलेक्शन देश की राजधानी दिल्ली में संपन्न होता है. ऐसे में इस चुनाव पर देश की नजर होती है. मसलन, दिल्ली में संपन्न होने की वजह से देश के दूसरे राज्यों के स्टूडेंट्स व नागरिक भी भी डूसू चुनाव में दिलचस्पी रखते हैं.

मनोज भट्ट
पत्रकारिता में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. नवोदय टाइम्स, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान में लंबे समय तक फील्ड रिपोर्टिंग. कई मुद्दों व खबरों को लीड किया, जो चर्चा में रही. अभी तक पंचायत, कृषि, प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा, राजनीति, पर्यावरण, स्वास्थ्य, चुनाव, बिजनेस से जुड़े विषयों पर काम किया है और इनमें लेखन की दिलचस्पी है.
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