दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की अंडरग्रेजुएट (UG) एडमिशन रेस में CUET-CSAS के तहत छात्रों की पसंद में एक बड़ा बदलाव (रीसेट) देखने को मिल रहा है. जहां एक तरफ दयाल सिंह, श्री वेंकटेश्वर, किरोड़ीमल और रामजस कॉलेज अपनी बढ़त बना रहे हैं, वहीं SRCC, सेंट स्टीफेंस और मिरांडा हाउस जैसे पारंपरिक रूप से टॉप पर रहने वाले कॉलेजों का दबदबा कम होता दिख रहा है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंडरग्रेजुएट एडमिशन में इस साल आवेदकों की कॉलेज प्राथमिकताओं में एक उल्लेखनीय बदलाव आया है. यह बदलाव कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS) के तहत छात्रों की बदलती रणनीति को दर्शाता है. 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कई वर्षों में पहली बार दयाल सिंह कॉलेज ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के छह सबसे पसंदीदा कॉलेजों में अपनी जगह पक्की की है, जबकि श्री वेंकटेश्वर कॉलेज ने भी छात्रों की टॉप-टियर पसंद में एंट्री मारी है.
इस फेरबदल ने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC), सेंट स्टीफेंस कॉलेज और मिरांडा हाउस जैसे पारंपरिक पसंदीदा कॉलेजों को टॉप-5 प्रेफरेंस लिस्ट से बाहर कर दिया है.
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कॉलेज रैंकिंग में यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब यूनिवर्सिटी में अंडरग्रेजुएट एडमिशन के लिए 2.18 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन पूरे हो चुके हैं. आवेदकों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक बनी हुई है, और बीकॉम ऑनर्स अभी भी उम्मीदवारों के बीच सबसे लोकप्रिय यूजी कोर्स बना हुआ है.
हालांकि, इन उभरते रुझानों के बावजूद, यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि अभी कोई भी ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. एडमिशन की प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए सीटों के आवंटन (Seat Allotments) के साथ-साथ छात्रों की प्राथमिकताएं और ओवरऑल एलोकेशन पैटर्न बदल सकता है.
कॉलेज प्रेफरेंस में बड़ा रीसेट
ताजा रुझान बताते हैं कि कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS) के तहत दिल्ली यूनिवर्सिटी के सबसे पसंदीदा कॉलेजों का सालों पुराना क्रम धीरे-धीरे बदल रहा है. साल 2022 में कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) को अपनाने के बाद शुरू की गई इस व्यवस्था ने आवेदकों के एडमिशन एप्रोच को काफी बदल दिया है.
किरोड़ीमल कॉलेज (KMC) अभी भी यूनिवर्सिटी के सबसे पसंदीदा संस्थानों में से एक बना हुआ है, जबकि श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, रामजस कॉलेज और दयाल सिंह कॉलेज की लोकप्रियता में भारी उछाल दर्ज किया गया है और इन्होंने टॉप चॉइस में अपनी जगह बनाई है.
दूसरी ओर, जो कॉलेज पारंपरिक रूप से छात्रों की प्रेफरेंस लिस्ट में राज करते थे जैसे कि श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC), सेंट स्टीफेंस कॉलेज और मिरांडा हाउस, वो अब टॉप-5 पोजीशन में शामिल नहीं हैं. यूनिवर्सिटी अधिकारियों के अनुसार, बदलती पसंद का यह पैटर्न उम्मीदवारों की एक बेहद नपी-तुली एडमिशन रणनीति को दर्शाता है. चूंकि प्रेफरेंस सबमिट करने से पहले ही छात्रों के पास उनके CUET स्कोर उपलब्ध होते हैं, इसलिए आवेदक कॉलेज की प्रतिष्ठा के साथ-साथ पिछले एडमिशन ट्रेंड्स, सीटों की संख्या और अपने पसंदीदा कोर्स में सीट मिलने की संभावनाओं का आकलन करके समझदारी से फैसले ले रहे हैं.
सीट उपलब्धता बनी गेम-चेंजर
यूनिवर्सिटी अधिकारियों का मानना है कि इस साल कॉलेज प्राथमिकताओं में आए बदलाव के पीछे सीटों की संख्या (Seat Capacity) एक मुख्य कारण हो सकती है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि दयाल सिंह कॉलेज में सेंट स्टीफेंस कॉलेज की तुलना में लगभग 800 सीटें अधिक हैं, जो एडमिशन पक्का करने की उम्मीद रखने वाले कई आवेदकों के लिए इसे एक अधिक व्यावहारिक विकल्प बनाता है.
अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि एडमिशन प्रक्रिया अभी चल रही है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. हालांकि, उन्होंने नोट किया कि CUET-CSAS एडमिशन सिस्टम के तहत, छात्र कॉलेज की ब्रांड वैल्यू के साथ-साथ सीटों की उपलब्धता को ज्यादा ध्यान से देख रहे हैं, जो उनकी अधिक व्यावहारिक और डेटा-आधारित सोच को दर्शाता है.
कोर्स चॉइस में कॉमर्स का दबदबा बरकरार
भले ही कॉलेज की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया हो, लेकिन कोर्सेज को लेकर छात्रों की पसंद काफी हद तक पहले जैसी ही है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी का बीकॉम (ऑनर्स) अभी भी सबसे पसंदीदा यूजी प्रोग्राम बना हुआ है, जिसे 48,336 पहली पसंद के प्रेफरेंस मिले हैं. इसके बाद बीए (ऑनर्स) पॉलिटिकल साइंस और बीएससी (ऑनर्स) जूलॉजी का नंबर आता है.
ओवरऑल प्रेफरेंस में भी कॉमर्स कोर्सेज का जलवा है, जिसमें बीकॉम (ऑनर्स) और बीकॉम सबसे आगे हैं. इसके बाद बीए (ऑनर्स) इंग्लिश, बीए (ऑनर्स) पॉलिटिकल साइंस, बीए प्रोग्राम के तहत हिस्ट्री-पॉलिटिकल साइंस कॉम्बिनेशन, बीए (ऑनर्स) हिस्ट्री और बीएससी (ऑनर्स) जूलॉजी शामिल हैं.
पिछले एडमिशन साइकिल का डेटा भी इसी तरह का ट्रेंड दिखाता है, जहां बीकॉम (ऑनर्स) को 19.90 लाख प्रोग्राम प्रेफरेंस मिले थे, जिसके बाद बीकॉम को 15.26 लाख और बीए (ऑनर्स) इंग्लिश को 12.23 लाख प्रेफरेंस मिले थे.
2.18 लाख रजिस्ट्रेशन पार, लड़कों से आगे निकलीं लड़कियां
एडमिशन प्रक्रिया में छात्रों की भारी भागीदारी देखने को मिल रही है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2,73,751 उम्मीदवारों ने CSAS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया, जिनमें से 2,18,284 ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर ली है. वहीं, 2.06 लाख से अधिक आवेदकों ने अपने कोर्स और कॉलेज के प्रेफरेंस सबमिट कर दिए हैं.
आवेदकों के इस पूल में महिलाओं का दबदबा बरकरार है. 1,20,509 महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन पूरा किया है, जबकि पुरुषों की संख्या 97,775 है यानी कुल रजिस्टर्ड उम्मीदवारों में छात्राओं की हिस्सेदारी 53 फीसदी से अधिक है.
मुकाबला बेहद कड़ा है, क्योंकि 69 कॉलेजों और शैक्षणिक विभागों द्वारा ऑफर किए जाने वाले 73 प्रोग्राम्स की करीब 71,600 अंडरग्रेजुएट सीटों के लिए 2 लाख से अधिक उम्मीदवार रेस में हैं. यूनिवर्सिटी बीए प्रोग्राम के तहत करीब 150 कॉम्बिनेशन भी ऑफर कर रही है.
16 जुलाई को आएगी पहली अलॉटमेंट लिस्ट
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने उम्मीदवारों के CUET स्कोर और सबमिट किए गए प्रेफरेंस के आधार पर 'सिमुलेटेड रैंक' जारी कर दी है, जिससे आवेदक सीट आवंटन के पहले दौर से पहले ही अपनी संभावित एडमिशन संभावनाओं का अंदाजा लगा सकते हैं. उम्मीदवार 13 जुलाई की शाम 4:59 बजे तक अपने कोर्स और कॉलेज के प्रेफरेंस में बदलाव (रिवाइज) कर सकते हैं. पहली CSAS अलॉटमेंट लिस्ट की घोषणा 16 जुलाई को की जाएगी, जिसके बाद चुने गए छात्रों को 18 जुलाई तक अपनी आवंटित सीटों को स्वीकार करना होगा.
कॉलेज 20 जुलाई तक दस्तावेजों का वेरिफिकेशन पूरा करेंगे, जबकि पहले दौर में फीस भुगतान की आखिरी तारीख 21 जुलाई है. दूसरी अलॉटमेंट लिस्ट 25 जुलाई को जारी होने का कार्यक्रम है.
एडमिशन स्ट्रेटेजी में बड़ा बदलाव
ताजा रुझान बताते हैं कि CUET-CSAS के दौर में डीयू का एडमिशन लैंडस्केप धीरे-धीरे बदल रहा है. हालांकि कॉलेज का नाम और प्रतिष्ठा अभी भी आवेदकों को प्रभावित करती है, लेकिन छात्र अब ब्रांड वैल्यू के साथ सीटों की संख्या और एडमिशन मिलने की संभावना के बीच संतुलन बनाकर बेहद नपे-तुले फैसले ले रहे हैं.
दयाल सिंह और श्री वेंकटेश्वर जैसे कॉलेजों का उभरना इसी बदलाव को रेखांकित करता है. यह दिखाता है कि कई उम्मीदवारों के लिए अब किसी पारंपरिक रूप से मशहूर कॉलेज में एंट्री लेने के बजाय अपने पसंदीदा कोर्स में एडमिशन पक्का करना ज्यादा जरूरी हो गया है.
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