August 30, 2026

विविधता में एकता भारत के DNA में, इसका सम्मान किया जाना चाहिए: RSS प्रमुख मोहन भागवत

August 30, 2026

विविधता में एकता भारत के DNA में, इसका सम्मान किया जाना चाहिए: RSS प्रमुख मोहन भागवत

न्यूयॉर्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और ”इसका उत्सव मनाया जाना चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।” शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6,000 से अधिक सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने और समुदायों का समर्थन करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ”जब हम अमेरिका या यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका कहते हैं, तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है और वह है बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक और वाक्यांश की चर्चा होती है: विविधता में एकता।” उनकी इस बात पर वहां उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं।

उन्होंने यह बात ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ फोरम द्वारा आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, ”भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं।” उन्होंने स्वामी विवेकानंद के एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के सामने एक लक्ष्य होता है, जिसे उसे पूरा करना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे साकार करना होता है।

#WATCH न्यूयॉर्क, US | यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन में, RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा, “भारत दुनिया को समय-समय पर विविधता में एकता का एहसास कराने और उसे महसूस कराने के लिए है। हम एक हैं और विविधता के कारण, वह एकता सुशोभित है…”

(सोर्स: यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन) pic.twitter.com/AckUG38b6Z

— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 29, 2026

आरएसएस प्रमुख ने कहा, ”भारत को कौन-सी नियति मिली है? भारत का उद्देश्य इस विविधता में एकता को साकार करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना है। हम एक हैं और हमारी यही विविधता हमारी एकता को और अधिक खूबसूरत बनाती है।”

करीब एक घंटे के अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ”विविधता का उत्सव मनाया जाना चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही हमें एकता की इस भावना को भी ध्यान में रखना चाहिए। यह बहुत सच्ची भावना है।” ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में अमेरिका के 39 राज्यों और 853 शहरों से लोग शामिल हुए। अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 250 से अधिक छात्र और 250 संगठन भी इसमें शामिल हुए।

भागवत ने विविधता को अपनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ”हम एक-दूसरे के हैं”। उन्होंने समुदाय तथा दुनिया के प्रति अपना योगदान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, ”हम जो कुछ भी हासिल करते हैं, उसमें दूसरों का योगदान होता है। हम दुनिया से बहुत कुछ लेते हैं, इसलिए हमें भी दुनिया को कुछ वापस देना चाहिए। हम कितना कमाते हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं है; महत्वपूर्ण यह है कि हम उसमें से कितना दूसरों के साथ बांटते हैं।” भागवत (75) ने अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रवासियों से अपनी ‘कर्मभूमि’ यानी जिस देश में वे रहकर काम कर रहे हैं, उसके प्रति वफादार रहने का भी आह्वान किया।

आरएसएस प्रमुख ने जोर देकर कहा कि कोई राष्ट्र केवल भौगोलिक जमीन का एक टुकड़ा नहीं होता। उन्होंने कहा, ”हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसे उसे पूरा करना होता है। यही भारत की नियति है। आइए, भारतीयों के रूप में उस नियति के प्रति जागरूक हों और अपनी कर्मभूमि के साथ-साथ जन्मभूमि के प्रति भी अपने कर्तव्यों को पूरा करें। अगर हम ऐसा करते हैं, तो यह उन सभी समस्याओं से जूझ रही और हर कदम पर मुश्किलों का सामना कर रही दुनिया के लिए वरदान साबित होगा। हमें दुनिया को सहारा देना है। हमें इस दुनिया को किसी न किसी रूप में अपना सहयोग देना है।”