Updated On: Jul 17, 2026 | 06:24 PM IST
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सार
Chhatrapati Sambhajinagar में सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसान को 2.22 करोड़ रुपये का बढ़ा हुआ मुआवजा न देना प्रशासन को भारी पड़ा। सिविल कोर्ट के आदेश पर कलेक्टर कार्यालय में जब्ती की कार्रवाई हुई।

छत्रपति संभाजीनगर कलेक्टर कार्यालय (फाइल फोटो, सोर्स: सोशल मीडिया)
विस्तार
Chhatrapati Sambhajinagar Collector Office Seized: छत्रपति संभाजीनगर में अदालत के आदेश का पालन न करना जिला प्रशासन को भारी पड़ गया। वाकोद मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित एक किसान के वारिसों को बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं देने पर सिविल कोर्ट के आदेश के तहत शुक्रवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में जब्ती की कार्रवाई की गई। सिविल कोर्ट के आदेश पर पहुंचे अधिकारियों ने जब कलेक्टर का मुख्य कक्ष बंद पाया, तो उन्होंने दरवाजे के बाहर ही पंचनामा तैयार कर दिया। इस घटनाक्रम से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
क्या है मामला?
यह पूरा मामला छत्रपति संभाजीनगर जिले की फुलंब्री तहसील के लेहा जहांगीर गांव का है। अदालत ने प्रभावित परिवार को 2 करोड़ 22 लाख 61 हजार 19 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन वर्षों बाद भी उसका पालन नहीं किया गया। अदालत के बेलिफ (जब्ती अधिकारी) जब्ती वारंट लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर कक्ष के बाहर पंचनामा की कार्रवाई की। इस घटनाक्रम से कलेक्टर कार्यालय में हड़कंप मच गया।
1996 में हुआ था भूमि अधिग्रहण
फुलंब्री तहसील के लेहा जहांगीर गांव के किसान स्वर्गीय गणपतराव लेहा जहांगीर की भूमि वर्ष 1996 में वाकोद मध्यम परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। उस समय उन्हें केवल 80 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया था। मुआवजा कम होने के कारण वर्ष 2006 में परिवार ने सिविल कोर्ट में अतिरिक्त मुआवजे के लिए याचिका दायर की। लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2022 में अदालत ने किसान के वारिसों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 2.22 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया।
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8 सप्ताह का आश्वासन भी पूरा नहीं हुआ
अदालत के आदेश के बावजूद भुगतान नहीं होने पर वारिसों ने फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद अदालत ने महाराष्ट्र सरकार की चल संपत्ति की जब्ती का वारंट जारी किया। इससे पहले भी अदालत के बेलिफ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। उस समय कलेक्टर की कुर्सी जब्त करने की कार्रवाई होने वाली थी, लेकिन लघु सिंचाई विभाग ने 8 सप्ताह के भीतर पूरी राशि का भुगतान करने का लिखित आश्वासन दिया था। इसी आधार पर कार्रवाई टाल दी गई थी। हालांकि तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते अदालत ने दोबारा जब्ती की कार्रवाई शुरू कराई।
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बंद मिला कलेक्टर का कक्ष तो बाहर ही हुआ पंचनामा
जब अदालत के अधिकारी छत्रपति संभाजीनगर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे तो कलेक्टर का मुख्य कक्ष बंद मिला। दरवाजा नहीं खोले जाने पर अदालत के बेलिफ ने मौके पर ही पंचनामा तैयार किया और कक्ष बंद होने का आधिकारिक उल्लेख दर्ज किया। इस दौरान परियोजना प्रभावित परिवार, उनके अधिवक्ता और निवासी उप जिलाधिकारी के बीच चर्चा हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। बाद में जिला कलेक्टर विनय गौड़ा जीसी कार्यालय पहुंचे, लेकिन तब तक अदालत के अधिकारी बंद कक्ष का पंचनामा तैयार कर चुके थे।
