August 23, 2026

DIIs ने दिखाया दम: FIIs की बिकवाली से 347% ज्यादा पैसा लगाया, 1.81 लाख करोड़ का आउटफ्लो संभाला - Haribhoomi

FY26 में DIIs ने रिकॉर्ड 8.09 लाख करोड़ रुपये लगाए, जबकि FIIs ने 1.81 लाख करोड़ रुपये निकाले। SIP, रिटेल निवेशकों और म्यूचुअल फंड की बढ़ती हिस्सेदारी से घरेलू बाजार मजबूत हुआ।

domestic institutional investors

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  • Published: 23 Aug 2026, 01:50 PM IST
  • Last Updated: 23 Aug 2026, 12:24 PM IST

भारतीय शेयर बाजार में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DIIs मजबूत सहारा बने। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने पूरे वित्त वर्ष में रिकॉर्ड 8.09 लाख करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 1.81 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यानी डीआईआई का निवेश FIIs की बिकवाली से करीब 347% ज्यादा रहा।

विदेशी बिकवाली का घरेलू निवेशकों ने दिया जवाब
AMFI-Crisil Factbook 2026 के मुताबिक, DIIs ने FIIs की 1.81 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली को लगभग पूरी तरह संभाल लिया। रिपोर्ट ने इसे घरेलू संस्थागत निवेशकों की ‘उल्लेखनीय मजबूती’ बताया है। इसमें म्यूचुअल फंड की भूमिका सबसे अहम रही।

इस बदलाव से भारतीय शेयर बाजार में घरेलू पूंजी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। अब विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री का असर पहले की तुलना में घरेलू निवेशकों की मजबूत मौजूदगी से कुछ हद तक संतुलित हो रहा है।

शेयर बाजार में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, NSE पर सूचीबद्ध कंपनियों के फ्री-फ्लोट मार्केट कैप में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी मार्च 2021 के करीब 15% से बढ़कर मार्च 2026 में लगभग 23% हो गई। इसी अवधि में FIIs की हिस्सेदारी घटी है। इससे विदेशी निवेशकों और घरेलू म्यूचुअल फंड के बीच का अंतर भी कम हुआ है।

इस बदलाव के पीछे रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और SIP को बड़ी वजह माना गया है। SIP के जरिए हर महीने बाजार में लगातार पैसा आता रहा, जिससे घरेलू बाजार को एक स्थिर निवेश आधार मिला।

SIP में रिकॉर्ड निवेश
वित्त वर्ष 2026 में मंथली SIP निवेश रिकॉर्ड 32,087 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं SIP से जुड़ी एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 14.83 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई। यह म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल संपत्ति का करीब पांचवां हिस्सा है।

खास बात यह है कि शेयर बाजार में तेज गिरावट के दौर में भी SIP निवेश जारी रहा। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव के बजाय लंबे समय में संपत्ति बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

एक साल में जुड़े 78 लाख नए निवेशक
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी। मार्च 2025 में यूनिक म्यूचुअल फंड निवेशक 5.36 करोड़ थे, जो मार्च 2026 में बढ़कर 6.14 करोड़ हो गए। यानी एक साल में करीब 78 लाख नए निवेशक जुड़े।

इसी दौरान म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल AUM 65.74 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 73.73 लाख करोड़ रुपये हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, बाजार से जुड़ी बचत अब बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। Tier-2, Tier-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों से भी निवेश बढ़ रहा है।

घरेलू पैसा बन रहा बाजार का सहारा
Factbook के अनुसार, घरेलू निवेश बाजार में आने वाली विदेशी पूंजी के उतार-चढ़ाव के सामने एक स्थिर आधार तैयार कर रहा है। SIP, रिटेल निवेशकों और म्यूचुअल फंड की बढ़ती पहुंच से DIIs की भूमिका आगे भी मजबूत होने की उम्मीद है। इससे घरेलू बचत भारतीय शेयर बाजार की स्थिरता और लंबे समय में पूंजी निर्माण का बड़ा स्रोत बन सकती है।

(प्रियंका कुमारी)