October 21, 2026

शहीदों का बलिदान हमारी प्रेरणा, उनकी विरासत हमारी जिम्मेदारी: DGP अशोक तिवारी

October 21, 2026

शहीदों का बलिदान हमारी प्रेरणा, उनकी विरासत हमारी जिम्मेदारी: DGP अशोक तिवारी

शिमला: हिमाचल प्रदेश पुलिस ने बुधवार को शिमला के भराड़ी स्थित पुलिस मैदान में पुलिस स्मृति दिवस मनाया। इस अवसर पर देश और प्रदेश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा आम नागरिकों के जीवन की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर पुलिस जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह में पुलिस शहीदों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देशसेवा के प्रति समर्पण को याद किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने किया। इस दौरान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न इकाइयों के जवानों ने शहीदों को नमन किया।

समारोह की शुरुआत सशस्त्र सलामी और औपचारिक परेड के साथ हुई। इसके बाद शहीद पुलिसकर्मियों के नामों का वाचन किया गया और उन्हें पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। उपस्थित अधिकारियों और जवानों ने दो मिनट का मौन रखकर वीर शहीदों के बलिदान को याद किया। इस दौरान शहीदों के परिवारों के त्याग, धैर्य और संघर्ष को भी सम्मानपूर्वक स्मरण किया गया।

राज्यपाल ने अपने संदेश में पुलिस शहीदों को नमन करते हुए कहा कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने और राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई बार अपने जीवन को जोखिम में डालकर कर्तव्य निभाते हैं। उनका साहस, समर्पण और सेवा भावना समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने देशसेवा में अपने प्रियजनों को खोने वाले शहीद परिवारों के त्याग और धैर्य के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपने संदेश में कर्तव्य निर्वहन के दौरान प्राण न्योछावर करने वाले वीर पुलिस जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान सदैव देश और समाज को प्रेरित करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बल का पेशेवर, संवेदनशील, उत्तरदायी और जनहितैषी होना आवश्यक है। उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों के साहस और संघर्ष को भी नमन किया।

हर शहीद के पीछे साहस और बलिदान की कहानी

पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हर शहीद के नाम के पीछे साहस से भरा जीवन, अपूरणीय क्षति सहने वाला परिवार और ऐसा बलिदान है, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। इन वीर जवानों ने वर्दी के सर्वोच्च आदर्शों को अपने जीवन में उतारा और दूसरों की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दिया। राष्ट्र अपने वीरों को गर्व और सम्मान के साथ याद करता है, लेकिन उनके परिवार हर दिन उनके न होने का दर्द सहते हैं। इसलिए शहीद परिवारों का कल्याण, सम्मान और गरिमा पुलिस संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहना चाहिए। शहीदों की विरासत को आगे बढ़ाना और उनके आदर्शों के अनुरूप जनसेवा करना पुलिस बल की जिम्मेदारी है।

10 सीआरपीएफ जवानों के बलिदान से जुड़ा है दिवस

पुलिस स्मृति दिवस हर वर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका संबंध वर्ष 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीनी सैनिकों के घात लगाकर किए गए हमले में शहीद हुए 10 सीआरपीएफ जवानों के बलिदान से है। कालांतर में यह दिवस देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने का प्रतीक बन गया। यह दिन पुलिसकर्मियों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद करने के साथ शहीद परिवारों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भी संदेश देता है।

📍 Location: शिमला (शिमला)