बिलासपुर2 घंटे पहले
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हाईकोर्ट ने डीईओ की नियुक्ति पर लगाई थी रोक।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रामेश्वर जायसवाल की नियुक्ति पर लगी रोक हटा दी है। अब रामेश्वर DEO बने रहेंगे। हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु की कोर्ट में कहा कि सिर्फ सीनियरिटी के आधार पर कोई अधिकारी ऊंचे पद पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता। मामले की सुनवाई के दौरान याचिका खारिज होने से पहले ही याचिकाकर्ताओं ने केस वापस लेने का आग्रह किया।
दरअसल, हाईकोर्ट ने गरियाबंद के प्रभारी DEO राजेश चंद्राकर की नियुक्ति पर कहा था कि जूनियर अधिकारी को प्रभारी DEO या BEO बनाना शासन का प्रशासनिक फैसला है। ऐसे मामलों में हाईकोर्ट सामान्य तौर पर हस्तक्षेप नहीं करेगा। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने गरियाबंद में जूनियर अधिकारी को प्रभारी डीईओ नियुक्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी।

बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल।
प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक
बिलासपुर में पदस्थ प्राचार्य राघवेंद्र गौराहा और कामेश्वर बैरागी ने अधिवक्ता जितेंद्र पाली के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने कहा कि बिलासपुर जिले में 100 से ज्यादा ऐसे प्राचार्य हैं, जो नियुक्त किए गए प्रभारी डीईओ से 18 साल या उससे अधिक सीनियर हैं। इसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग ने कुछ महीने पहले पदोन्नत हुए प्राचार्य (एलबी) रामेश्वर जायसवाल को प्रभारी DEO के पद पर नियुक्त कर दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि राज्य सरकार के सर्कुलर के मुताबिक, किसी जूनियर अधिकारी को अपने से सीनियर अधिकारियों के ऊपर पदस्थ नहीं किया जा सकता। खासकर तब जब उसे अपने से सीनियर अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली (CR) लिखने की स्थिति में ला दिया जाए। इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने डीईओ की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी।
याचिका खारिज करने से पहले वापस ली
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के ध्यान में लाया गया कि प्रभार देना एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है। जब तक किसी नियम या कानून में यह अनिवार्य न हो कि सीनियर अधिकारी को ही प्रभार दिया जाएगा, तब तक केवल सीनियरिटी के आधार पर किसी पद का प्रभार पाने का कानूनी अधिकार नहीं बनता।
यह फैसला हाईकोर्ट ने ही डीईओ की नियुक्ति पर दिया है। लिहाजा, आज सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करने की बात कही, तब याचिकाकर्ताओं की तरफ से याचिका वापस लेने की छूट देने का आग्रह किया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
बिलासपुर DEO नियुक्ति का रास्ता साफ
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बिलासपुर डीईओ रामेश्वर जायसवाल की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। वे यहां जिला शिक्षा अधिकारी बने रहेंगे। हालांकि, अभी हाईकोर्ट का आदेश जारी नहीं हुआ है। लिहाजा, रामेश्वर जायसवाल ने इस मामले में अभी कुछ भी कहने से इनकार किया है।
संघ ने हाईकोर्ट के फैसले का किया स्वागत
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष और प्राचार्य संजय शर्मा ने कहा कि, राज्य शासन द्वारा तय नियम के अनुसार प्रशासनिक पदों के लिए जूनियर-सीनियर का कोई विषेश महत्व नहीं है। हर विभाग में इस तरह से हर विभाग में प्रशासनिक पदों के लिए दक्ष और योग्यता के आधार पर पद दिया जाता है। हाईकोर्ट ने बिलासपुर डीईओ के केस में जो फैसला दिया है, वह स्वागतेय है।
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