September 15, 2026

Delhi Matrimonial Fraud: दुल्हन नकली, प्रोफाइल फर्जी-झूठे कॉल, आगरा से कैसे चलता था पैन-इंडिया ठगी का खेल?

Time Published: Tuesday, September 15, 2026, 22:11 [IST]

Delhi Matrimonial Fraud: शादी के लिए ऑनलाइन रिश्ता तलाश रहे पुरुषों को ठगने वाले साइबर फ्रॉड रैकेट का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह आगरा से एक फर्जी मैट्रिमोनियल सर्विस की आड़ में अपना नेटवर्क चला रहा था और देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले शादी के इच्छुक पुरुषों को निशाना बनाता था।

इस पूरे कथित ऑपरेशन का मास्टरमाइंड 29 वर्षीय अमित कुमार, पेशे से वकील बताया जा रहा है। पुलिस का आरोप है कि वह खुद को इस फर्जी कारोबार से अलग दिखाने के लिए 'कानूनी सलाहकार' के तौर पर पेश करता था। पुलिस ने इस मामले में कथित फर्म की 44 वर्षीय महिला मालिक और आठ महिला टेली-कॉलर समेत अमित कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी इंटरनेट से महिलाओं की तस्वीरें लेकर उन्हें संभावित दुल्हन के रूप में पेश करते थे। जब कोई ग्राहक रिश्ता आगे बढ़ाने में दिलचस्पी दिखाता था तो कॉल सेंटर की दूसरी महिला कर्मचारी फोन पर दुल्हन बनकर उससे बात करती थी।

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कैसे हुआ पूरे रैकेट का खुलासा?

मामला एक शिकायत से शुरू हुआ। दिल्ली पुलिस को एक व्यक्ति ने शिकायत दी कि उसे एक वेबसाइट के जरिए शादी का रिश्ता उपलब्ध कराने का झांसा दिया गया। शिकायतकर्ता से पहले रजिस्ट्रेशन, फिर प्रोफाइल एक्सेस, एक्टिवेशन और कॉन्टैक्ट अनलॉक करने के नाम पर अलग-अलग रकम ली गई। कुल मिलाकर उससे करीब 15 हजार रुपये की ठगी की गई। जांच के दौरान पुलिस को 'M/s Shaadi Partner Com' के नाम से संचालित एक करंट बैंक अकाउंट मिला। इसी अकाउंट में शिकायतकर्ता की रकम जमा हुई थी। इसके बाद पुलिस ने खाते से जुड़े रिकॉर्ड को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के डेटाबेस से मिलाया। पुलिस के मुताबिक, यही बैंक अकाउंट देश के अलग-अलग हिस्सों से दर्ज कम से कम छह शिकायतों से जुड़ा मिला। सभी मामलों में ठगी का तरीका लगभग एक जैसा था। यहीं से पुलिस को शक हुआ कि मामला किसी एक व्यक्ति की ठगी नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का है।

आगरा में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस की टीम आगरा पहुंची। 4 सितंबर को आगरा के एक अपार्टमेंट में चल रहे कथित कॉल सेंटर पर छापा मारा गया। यहां से पुलिस ने 44 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया, जिसे कागजों पर फर्म की मालिक बताया गया है। इसके अलावा आठ महिला टेली-कॉलर को भी पकड़ा गया। पूछताछ में पुलिस को कथित तौर पर अमित कुमार की भूमिका के बारे में जानकारी मिली।

अमित कुमार ने खुद को कैसे बचाने की तैयारी की थी?

पुलिस के मुताबिक, इस पूरे रैकेट में अमित कुमार ने अपनी भूमिका को छिपाने के लिए काफी सोची-समझी व्यवस्था की थी। उसने कथित तौर पर एक महिला के नाम पर 'M/s Shaadi Partner Com' नाम की प्रोपराइटरशिप फर्म बनवाई। इसके बाद Netnexis Solutions (OPC) Pvt Ltd के साथ फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट किया गया। पुलिस का आरोप है कि अमित कुमार खुद को इस कारोबार का मालिक या ऑपरेटर बताने के बजाय 'लीगल एडवाइजर' के तौर पर पेश करता था। इससे वह यह दावा कर सकता था कि उसकी भूमिका सिर्फ कानूनी सेवाएं देने तक सीमित है और कॉल सेंटर की गतिविधियों से उसका कोई सीधा संबंध नहीं है।

छापे की खबर मिलते ही मोबाइल बंद कर हुआ फरार

कॉल सेंटर पर पुलिस की कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद अमित कुमार कथित तौर पर फरार हो गया। पुलिस के मुताबिक, उसने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए और भूमिगत हो गया। जांच टीम ने तकनीकी निगरानी के जरिए उसकी लोकेशन ट्रैक की। आखिरकार 8 सितंबर को आगरा के काला कुंज इलाके में एक SUV में जाते समय पुलिस ने उसे रोक लिया। उसने पुलिस को अपने UP State Bar Council से जुड़े दस्तावेज दिखाए और दावा किया कि वह सिर्फ कानूनी सलाहकार है। लेकिन पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान मिले डिजिटल सबूतों से उसका इस कथित ऑपरेशन से संबंध सामने आया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

ऐसे चलता था पूरा मैट्रिमोनियल फ्रॉड

अब सवाल है कि आखिर यह गैंग शादी के इच्छुक लोगों को फंसाता कैसे था?

पुलिस की जांच के मुताबिक, इसके लिए पूरा सिस्टम तैयार किया गया था।

Step 1: शादी के इच्छुक पुरुषों का डेटा जुटाना

आरोपी अपनी वेबसाइट के अलावा सोशल मीडिया पर मौजूद मैट्रिमोनियल पेज, ग्रुप और कमेंट्स से शादी के इच्छुक पुरुषों के मोबाइल नंबर जुटाते थे। यानी पहले संभावित ग्राहक खोजे जाते थे।

Step 2: महिला टेली-कॉलर करती थी फोन

इसके बाद महिला टेली-कॉलर पुरुषों को फोन करती थीं। वह खुद को मैट्रिमोनियल सर्विस से जुड़ा बताती थीं और संभावित दुल्हन के बारे में जानकारी देती थीं।

Step 3: इंटरनेट से ली गई तस्वीरें दिखाते थे

पुलिस के मुताबिक, कथित गिरोह इंटरनेट से महिलाओं की तस्वीरें लेकर उन्हें संभावित दुल्हन के रूप में इस्तेमाल करता था। कॉलर पहले ग्राहक की आर्थिक स्थिति और शादी से जुड़ी उसकी जरूरतों के बारे में जानकारी हासिल करती थीं।

Step 4: फिर शुरू होती थी पैसों की मांग

जैसे ही कोई पुरुष किसी प्रोफाइल में दिलचस्पी दिखाता था, उससे अलग-अलग बहाने से पैसे मांगे जाते थे। कथित तौर पर इन मदों में शामिल थे...

  • रजिस्ट्रेशन फीस
  • प्रोफाइल एक्टिवेशन
  • सिक्योरिटी डिपॉजिट
  • कॉन्टैक्ट अनलॉक
  • मेंबरशिप पैकेज

हर बार रकम छोटी रखी जाती थी। कुल वसूली 2,500 से 15,000 रुपये तक पहुंचती थी।

असली रिश्ता दिखाने के लिए बनाते थे फर्जी प्रोफाइल

पुलिस के मुताबिक, ठगी को असली दिखाने के लिए वेबसाइट पर ग्राहकों के लिए डमी प्रोफाइल बनाई जाती थीं। फिर इन प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट ग्राहकों को भेजे जाते थे। इससे पीड़ित को लगता था कि उसे वास्तव में किसी मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म पर संभावित दुल्हन का प्रोफाइल मिला है। लेकिन जब वह महिला से बात करने की मांग करता, तो असली खेल शुरू होता था।

एक महिला की फोटो, दूसरी महिला की आवाज

यह इस कथित रैकेट का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा था। ग्राहक जिस महिला की तस्वीर देख रहा होता था, उससे बात कराने के नाम पर कॉल सेंटर की दूसरी महिला कर्मचारी फोन पर दुल्हन बनकर बात करती थी। कई बार कॉन्फ्रेंस कॉल भी कराई जाती थी। महिला टेली-कॉलर कई दिनों तक ग्राहक से बातचीत करती थी, जिससे उसे विश्वास हो जाए कि सामने वास्तव में शादी की इच्छुक महिला ही है।

रिश्ता क्यों टूट जाता था?

जब ग्राहक शादी की दिशा में आगे बढ़ना चाहता था तो अचानक कोई नया बहाना सामने आ जाता था। पुलिस के मुताबिक, इनमें ऐसे कारण बताए जाते थे:

  • कुंडली में मांगलिक दोष
  • परिवार की असहमति
  • लड़की की कहीं और सगाई
  • सामाजिक या आर्थिक अंतर

अगर ग्राहक दूसरे रिश्ते की मांग करता तो उसे पोर्टल पर मौजूद किसी दूसरी कथित प्रोफाइल की जानकारी दी जाती। लेकिन यहां भी कहानी लगभग वही रहती थी-कुछ समय बाद दूसरा परिवार भी रिश्ता ठुकरा देता था।

मेंबरशिप 2-3 महीने तक खींचते थे

पुलिस के मुताबिक, जिन ग्राहक लगातार नए रिश्ते की मांग करते थे, उन्हें कहा जाता था कि 'सही प्रोफाइल मिलने तक इंतजार करें।' इस तरह उनकी मेंबरशिप को दो या तीन महीने तक खींचा जाता था। समय पूरा होने के बाद मेंबरशिप को एक्सपायर घोषित कर दिया जाता था। यानी ग्राहक को रिश्ता भी नहीं मिलता और जमा किए गए पैसे भी वापस नहीं मिलते थे।

टेली-कॉलर्स को मिलता था इंसेंटिव

जांच में पुलिस को कथित तौर पर कॉल सेंटर के कर्मचारियों के भुगतान का तरीका भी पता चला। महिला टेली-कॉलर्स को 6,000 से 7,000 रुपये की बेसिक सैलरी दी जाती थी। इसके अलावा पीड़ितों से वसूली गई रकम पर करीब 10 फीसदी इंसेंटिव दिया जाता था। हर कॉलर को महीने में कम से कम 15 हजार रुपये की वसूली का लक्ष्य दिया जाता था। लक्ष्य पूरा नहीं होने पर वेतन काटने या नौकरी से निकालने की धमकी दिए जाने का भी पुलिस ने दावा किया है।

पीड़ित पुलिस के पास जाने लगे तो रिफंड का खेल

पुलिस के मुताबिक, गिरोह की एक और रणनीति थी, अगर कोई पीड़ित पुलिस के पास जाने की तैयारी करता दिखता तो उसे पैसे वापस करने का लालच दिया जाता था। मामला NCRP पर दर्ज होने के बाद अगर बैंक अकाउंट फ्रीज हो जाता, तो आरोपी कथित तौर पर संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क करते थे। पुलिस का आरोप है कि वे अपनी कंपनी को वैध मैट्रिमोनियल सर्विस बताते हुए शिकायत को 'सेवाओं को लेकर गलतफहमी' का मामला बताते थे। इसके बाद शिकायतकर्ता को पैसे वापस करने की व्यवस्था की जाती थी। आरोप है कि रिफंड के बाद बैंक अकाउंट को अनफ्रीज कराने की कोशिश की जाती और कारोबार दोबारा शुरू हो जाता।

छापे में क्या-क्या मिला?

पुलिस ने कथित कॉल सेंटर से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और नकदी बरामद की है।

बरामदगी में शामिल हैं:

  • 7 डेस्कटॉप CPU
  • 47 मोबाइल फोन
  • कई बेसिक कीपैड फोन
  • 50 हजार रुपये नकद
  • एक SUV

पुलिस इन उपकरणों में मौजूद डेटा की जांच कर रही है।

कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

अब तक की पुलिस कार्रवाई में:

1. अमित कुमार: 29 वर्षीय, पेशे से वकील बताया गया है। पुलिस उसे कथित रैकेट का मुख्य संचालक मान रही है।

2. 44 वर्षीय महिला: कथित फर्म की कागजी मालिक और ऑपरेशनल मैनेजर बताई गई है।

3. आठ महिला टेली-कॉलर: इनकी उम्र करीब 21 से 32 वर्ष के बीच बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, ये ग्राहक बनाकर पुरुषों से बातचीत करती थीं।

पुलिस अब किस दिशा में जांच कर रही है?

दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है। जब्त किए गए मोबाइल फोन, कंप्यूटर, WhatsApp चैट और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि एक साल से चल रहे इस कथित नेटवर्क ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कुल कितनी रकम ठगी। शुरुआती जांच में देश के अलग-अलग हिस्सों से छह शिकायतें एक ही बैंक खाते से जुड़ी मिली हैं। लेकिन डिजिटल डेटा की पूरी जांच के बाद पीड़ितों की वास्तविक संख्या और ठगी की कुल रकम सामने आने की उम्मीद है।

(PTI इनपुट के साथ)