उत्तर रेलवे ने दिल्ली मंडल में डिजिटल नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाने के लिए करीब 3.72 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की है। इसके तहत रेलवे स्टेशनों, परिचालन कार्यालयों और विभिन्न तकनीकी केंद्रों पर लगे पुराने डाटाकॉम (डेटा कम्युनिकेशन) उपकरणों को नई पीढ़ी के आधुनिक नेटवर्किंग उपकरणों से बदला जाएगा। इस संबंध में उत्तर रेलवे ने निविदा जारी कर दी है। परियोजना का उद्देश्य नेटवर्क की गति, सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाकर रेलवे की महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं को निर्बाध बनाना है।
दिल्ली उत्तर रेलवे का सबसे व्यस्त रेल मंडल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मेल, एक्सप्रेस, उपनगरीय और मालगाड़ियों का संचालन होता है। ट्रेनों के संचालन, टिकटिंग, माल परिवहन, क्रू प्रबंधन और विभिन्न प्रशासनिक कार्य पूरी तरह डेटा नेटवर्क पर आधारित हैं। ऐसे में नेटवर्क प्रणाली का आधुनिकीकरण रेलवे की परिचालन क्षमता को मजबूत करेगा।
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रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर स्थापित मौजूदा नेटवर्किंग उपकरण अपनी उपयोगी अवधि पूरी कर चुके हैं। इनके कारण भविष्य में तकनीकी खराबी, नेटवर्क बाधित होने और डिजिटल सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। इसी जोखिम को देखते हुए पुराने उपकरणों को समय रहते बदलने का निर्णय लिया गया है।
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परियोजना के तहत अत्याधुनिक नेटवर्किंग उपकरण लगाए जाएंगे। कार्य का निष्पादन उत्तर रेलवे के वरिष्ठ मंडल संकेत एवं दूरसंचार अभियंता कार्यालय की निगरानी में किया जाएगा। आधुनिक डाटाकॉम नेटवर्क स्टेशन, कंट्रोल ऑफिस, टिकट काउंटर, माल ढुलाई केंद्र और परिचालन विभागों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की रीढ़ माना जाता है।
माल परिवहन के लिए भी अहम
यह परियोजना रेलवे के फ्रेट ऑपरेशन इंफॉर्मेशन सिस्टम (एफओआईएस) को भी अधिक प्रभावी बनाएगी। एफओआईएस के माध्यम से मालगाड़ियों की आवाजाही, रैक आवंटन, माल बुकिंग और लॉजिस्टिक्स का संचालन होता है। बेहतर नेटवर्क से माल परिवहन की निगरानी और संचालन में दक्षता बढ़ेगी, जिसका लाभ उद्योगों और व्यापारिक संस्थानों को भी मिलेगा। इसके अलावा क्रू मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से लोको पायलटों और गार्डों की ड्यूटी, उपलब्धता और कार्य आवंटन अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेगा। रेलवे का मानना है कि नई डिजिटल व्यवस्था से परिचालन में पारदर्शिता, समयबद्धता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उत्तर रेलवे पिछले कुछ वर्षों से सिग्नलिंग, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े बुनियादी ढांचे के लगातार काम कर रहा है और यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।