August 5, 2026

CPEC Funding को लगा झटका, चीन ने रोकी मदद तो अब खुद ही हाईवे बनाएगा कंगाल पाकिस्तान| Navbharat Live

Updated On: Aug 05, 2026 | 07:21 PM IST

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सार

CPEC Funding Crisis: CPEC फंडिंग रोकने के चीन के फैसले के बाद पाकिस्तान अब खुद ही 1.8 अरब डॉलर के काराकोरम हाईवे प्रोजेक्ट को पूरा करेगा। बलूचिस्तान के हालात के चलते चीन ने कदम पीछे खींचे हैं।

CPEC Funding: China halts investment for Karakoram Highway project as Pakistan takes over financing

काराकोरम पाकिस्तान हाईवे चीन की फंडिंग (सोर्स- सोशल मीडिया)

विस्तार

CPEC Funding China Halts Investment For Karakoram Highway Project: चीन और पाकिस्तान के बीच महत्वाकांक्षी आर्थिक गलियारे CPEC को लेकर तनाव बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच विवाद के कारण चीन ने इस प्रोजेक्ट के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता रोक दी है। इसके बाद पाकिस्तान अब अपनी काराकोरम हाईवे परियोजना को अपने ही दम पर खुद फाइनेंस करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

इस प्रोजेक्ट का बजट लगभग 1.8 अरब डॉलर तय किया गया है, जिसे पहले CPEC के तहत बनना था। लेकिन बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओके में बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए चीन ने इस निवेश से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। चीन का कहना है कि बिना सुरक्षा सुधारे वहां नई फंडिंग नहीं मिलेगी।

CPEC को बड़ा झटका

इस काराकोरम हाईवे रीअलाइनमेंट प्रोजेक्ट के लिए पाकिस्तान अब पहली बार अपने घरेलू कॉन्ट्रैक्टर्स को भी बोली लगाने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। इस परियोजना के तहत वर्तमान राजमार्ग के लगभग 280 किलोमीटर के हिस्से के डायमर-भाशा बांध के जलाशय में डूबने से पहले एक सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता बनाना पाकिस्तान के लिए बेहद जरूरी है।

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वैकल्पिक मार्ग की चुनौती

डायमर-भाशा बांध सिंधु नदी पर बनी विशाल जलविद्युत परियोजना है। पाकिस्तान इस वैकल्पिक रास्ते को जल्द पूरा करने की जल्दी में है ताकि चीनी मदद न मिलने पर भी इस रणनीतिक मार्ग को सुचारू रखा जा सके। इसी वजह से पाकिस्तान अब इस प्रोजेक्ट में अपनी स्थानीय कंस्ट्रक्शन कंपनियों को भी शामिल करने की पूरी तैयारी कर रहा है।

इसके लिए पाकिस्तान चीन के साथ किए पुराने सरकार-से-सरकार (G2G) फ्रेमवर्क में बदलाव की योजना बना रहा है। पुराना समझौता इस काम को केवल चीन की तीन बड़ी सरकारी कंपनियों तक सीमित रखता था। लेकिन वर्तमान संकट के बाद अब पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय कंपनियों को शामिल करने से काम में तेजी आ जाएगी।

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पाकिस्तान का अगला कदम

दरअसल, दोनों देशों में मई 2025 में वित्तीय ढांचे पर सहमति बनी थी। इसके तहत चीन को इस प्रोजेक्ट का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा फंड करना था, लेकिन इस पर कोई औपचारिक हस्ताक्षर नहीं हो सके। पाकिस्तान ने चीन से रियायती लोन देने की मांग की, पर बीजिंग ने उसकी मांग स्वीकार नहीं की और अपनी कड़ी व्यावसायिक शर्तें रख दीं।

इस संकट के बीच पाकिस्तान के पास अपने दम पर आगे बढ़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। इस प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करना पाकिस्तान के व्यापार के लिए आवश्यक है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिना चीनी मदद के कर्ज में डूबा पाकिस्तान इस परियोजना के लिए आवश्यक भारी फंड कैसे जुटा पाता है।

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