September 2, 2026

CMHO BHOPAL का USM Healthcare पर अटैक, सिद्धांता हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त

भोपाल, 2 सितंबर 2026: यदि पुलिस कोई कार्रवाई करे तो उसकी समीक्षा सभी कर लेते हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग यदि कोई कार्रवाई करे तो ज्यादा कुछ समझ में नहीं आता। जैसे 31 अगस्त को भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने सिद्धांता हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त कर दिया। इस अस्पताल में वह सारी गड़बड़ियां पाई गई हैं, जो भोपाल में 50 से ज्यादा अस्पतालों में पाई जाती हैं, लेकिन कार्रवाई केवल एक के खिलाफ हुई है। साफ समझ में आया कि कहीं कुछ गड़बड़ी है। यह कार्रवाई सदभावना पूर्वक और मात्र मरीजों के हित में नहीं की गई है। इसके पीछे कोई और कहानी भी है। 

Siddhanta Superspeciality Hospital, Shivaji Nagar, Bhopal

Siddhanta Superspeciality Hospital, Shivaji Nagar, Bhopal की कहानी जानने की कोशिश की तो काफी कुछ निकाल कर आने लग गया। मामला 2015 से शुरू हुआ है। यह अस्पताल भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी भोपाल के साथ ज्वाइंट वेंचर के रूप में शुरू हुआ था। एग्रीमेंट के अनुसार USM Healthcare नाम की पार्टनरशिप फर्म को 2029 तक अस्पताल संचालित करने का अधिकार दिया गया था। बाद में विवाद हुआ और मामला हाई कोर्ट तक गया। पार्टनर्स ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अस्पताल बंद कराने या संचालन रोकने की कार्रवाई की आशंका जताई थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया था कि अस्पताल के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई नहीं की गई है। राज्य सरकार ने यह भी कहा था कि अस्पताल के संचालन को लेकर शिकायतों की जांच चल रही है और जांच के बाद जरूरत पड़ने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया। 

CMHO ने अस्पताल में 19 गड़बड़ियां निकालीं

हाईकोर्ट में जो शिकायत की बात हुई थी उस पर तो कोई कार्रवाई नहीं हुई लेकिन भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने अस्पताल का निरीक्षण करवाया और 19 गड़बड़ियां निकालीं। 

  • इमरजेंसी रूम में पर्याप्त उपकरण नहीं थे।
  • डायलिसिस और ICU में कमियां।
  • डॉक्टरों की उपलब्धता भी मानकों के अनुरूप नहीं।
  • एक्स-रे जांच में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं।
  • ऑक्सीजन व्यवस्था और पैथोलॉजी में भी कमियां।
  • फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट पर भी सवाल।
  • PET-CT स्कैन क्षेत्र में भी आपत्ति।

मजे की बात यह है कि, आप भोपाल के सभी अस्पतालों का निरीक्षण कर लीजिए। उपरोक्त 19 में से 9 गड़बड़ी तो पक्का मिल जाएगी। जय प्रकाश चिकित्सालय भोपाल के सिविल सर्जन ने निरीक्षण किया था जबकि जय प्रकाश चिकित्सालय में 25 से ज्यादा गड़बड़ियां मिल जाएगी। मतलब जो अपना घर साफ नहीं रख पा रहा है, वह दूसरों के घर की सफाई का निरीक्षण कर रहा है। हम नहीं जानते कि दोनों पार्टियों के बीच में क्या चल रहा है लेकिन सोशल मीडिया और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पक्का कहा जा सकता है कि, जो कुछ भी हो रहा है वह सदभावना पूर्वक और मात्र मरीजों के हित में नहीं हो रहा है। इसके पीछे कुछ और भी हो रहा है। 

18 जून को नोटिस देकर कार्रवाई शुरू की थी

CMHO कार्यालय के अनुसार, अस्पताल को 18 जून 2026 को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। जवाब के परीक्षण के बाद 7 जुलाई को संशोधित आदेश जारी कर निरीक्षण दल का गठन किया गया। सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जय प्रकाश चिकित्सालय भोपाल की अध्यक्षता में टीम ने अस्पताल का भौतिक निरीक्षण किया। जांच में अनुज्ञप्ति की शर्तों और निर्धारित मानकों का लगातार पालन नहीं होना पाया गया। इसके आधार पर मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण एवं अनुज्ञापन) नियम 1973 के तहत अस्पताल का पंजीयन एवं अनुज्ञप्ति निरस्त कर दी गई।