Published: Sunday, July 19, 2026, 18:22 [IST]
UP CM Yogi Adityanath News Hindi: इंसान और जानवरों के बीच बढ़ते टकराव को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे 'आपदा' घोषित करने वाला उत्तर प्रदेश को देश का पहला राज्य बताया। 19 जुलाई को लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UP SDMA) के नए हेडक्वार्टर भवन के उद्घाटन के मौके पर CM योगी ने कहा कि इंसान-जानवर टकराव में 4,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि प्राकृतिक आपदाओं में 5,000 से अधिक मौतें हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जागरूकता बढ़ाकर, जोखिम वाले इलाकों की पहचान करके और आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
इंसान-जानवर टकराव: UP में बढ़ती चुनौती
उत्तर प्रदेश में वन्यजीवों की संख्या बढ़ने, जंगलों के सिकुड़ने और मानवीय गतिविधियों के विस्तार के कारण इंसान-जानवर टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाथी, तेंदुआ, मगरमच्छ, भालू और बंदर जैसे जानवरों के साथ आम लोगों के बीच टकराव अब आम बात हो गई है। CM योगी ने इस समस्या को 'आपदा' का दर्जा देते हुए कहा कि राज्य सरकार इसे व्यवस्थित तरीके से संबोधित कर रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले वर्षों में इन टकरावों में 4,000 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
बहराइच मगरमच्छ अटैक से सीएम योगी ने दिया ये संदेश
बहराइच जिले में हाल ही में मगरमच्छ के हमले में 12 वर्षीय सुनील की मौत का जिक्र करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, 'बस दो दिन पहले, बहराइच के पास एक मगरमच्छ ने 12 साल के लड़के को पूरा निगल लिया। अगर हमने थोड़ी सावधानी बरती होती... आखिरकार, लोगों को पता है कि किन इलाकों में मगरमच्छ ज्यादा पाए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि मगरमच्छ बहुत दूर तक जाते हैं। वे आम तौर पर अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ 3 से 5 किलोमीटर के दायरे में ही रहते हैं।
आपको बता दें कि 16 जुलाई की शाम, बहराइच के टिकुरी गांव का रहने वाला सुनील (12), खेतों में धान की बुवाई में अपने चाचा विजय राज सिंह की मदद करने के बाद शौच के लिए घाघरा नदी के किनारे गया था। बाद में, नदी से एक मगरमच्छ निकला और उस पर हमला कर दिया।
'शुगर लेपर्ड' की कहानी: बिजनौर में तेंदुओं का बढ़ता खतरा
सीएम योगी ने बिजनौर में बचाए गए तेंदुओं के बारे में बात करते हुए कहा कि परसों मैं बिजनौर में था। हमने पिछले दो सालों में बिजनौर में 80 तेंदुओं को बचाया है। मैंने पूछा कि इतने सारे तेंदुए यहां कैसे आ गए। उन्होंने (अधिकारियों ने) बताया कि उनकी संख्या बढ़ गई है और दूसरी बात, वे आम तौर पर गन्ने के इलाकों में पाए जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो सालों में वहां 80 तेंदुओं को बचाया गया है। स्थानीय लोग इन्हें 'शुगर लेपर्ड' (गन्ने के तेंदुए) कहने लगे हैं, क्योंकि ये जानवर मुख्य रूप से गन्ने के खेतों में छिपकर रहते हैं। CM ने कहा कि अगर किसी को इस बारे में जानकारी न हो तो वह आसानी से इनका शिकार बन सकता है। उन्होंने जोर दिया कि खतरे की प्रकृति और जोखिम वाले इलाकों की सही पहचान करके लोगों में जागरूकता फैलाना जरूरी है।
प्राकृतिक आपदाओं में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
आदित्यनाथ ने आगे कहा कि अगर हम खतरे की प्रकृति और जोखिम वाले इलाकों की पहचान करके लोगों में जागरूकता बढ़ा सकें, तो हम बड़े पैमाने पर इंसानी जान जाने से रोक सकते हैं। मुख्यमंत्री ने बिजली गिरने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। आदित्यनाथ ने उस घटना का जिक्र किया, जब एक ही दिन में तूफान और बिजली गिरने से 111 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस स्थिति पर नाराजगी जताई थी और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर दिया था, जिसके बाद अधिकारियों ने तीन दिन के अंदर एक प्लान तैयार किया।
उन्होंने कहा, इसका नतीजा यह हुआ कि जब सहारनपुर के शाकंभरी देवी मंदिर में हजारों लोग 'भंडारे' में शामिल हो रहे थे, तो एक अलर्ट मिला और प्रशासन ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। कुछ ही देर बाद, शिवालिक पहाड़ियों से पांच फीट ऊंची पानी की लहर तेजी से नीचे आई। अगर उस समय अलर्ट नहीं मिला होता, तो सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी। उन्होंने आगे कहा कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके हम सुरक्षा के असरदार उपाय सुनिश्चित कर सकते हैं।
(PTI इनपुट के साथ)