सरकार के साथ 24 जुलाई 2026 को हुई बैठक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने जवाब देने के लिए 25 जुलाई दोपहर तक का समय मांगा है।

जंतर मंतर पर पुलिस की तैनाती की रात की तस्वीर (फोटो साभार: खबर लहरिया)
जंतर-मंतर पर सीजेपी द्वारा शुरू किया गया विरोध प्रदर्शन अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। 20 जुलाई को छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आंदोलन में तेजी दिख रही है। आज, 24 जुलाई को दोपहर 1 बजे संविधान क्लब ऑफ इंडिया में सरकार और सीजेपी के बीच हुई। इसके बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने सरकार से हुई बातचीत के बारे में मीडिया को बताया। एएनआई ने इसका वीडियो X पर पोस्ट किया।
जंतर मंतर पर रोजाना भीड़ प्रदर्शन का हिस्सा बनने के लिए जा रही है। इस मुद्दे की गूंज संसद के मानसून सत्र में भी सुनाई दी, जहाँ विपक्ष ने सरकार को घेरा। वहीं, जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है और कई छात्रों को हिरासत में लिए जाने तथा प्रदर्शन स्थल तक जाने से रोके जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
वहीं इस बीच जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू/JNU) और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू/DU) के छात्रों और शिक्षकों को जंतर मंतर प्रोटेस्ट में शामिल न होने के लिए कहा है। दोनों विश्वविद्यालय ने चेतवानी दी है कि यदि ऐसा होता है तो उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। कई लोगों को मेट्रो के द्वारा जंतर मंतर तक पहुंचने से भी रोका जा रहा है क्योंकि कई दिन से सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के करीब 17 स्टेशन बंद किए जा रहे हैं। आज 24 जुलाई को भी दिल्ली मेट्रो ने 17 स्टेशन बंद होने की जानकारी दी।

लोगों को सिर्फ जंतर मंतर नहीं बल्कि ऑफिस घर भी जाना होता है जिसकी वजह से लोग मेट्रो से सफर नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें मजबूरन कैब करनी पड़ती है और जिससे उनकी जेब पर भी भारी असर पड़ता है। इसी के साथ ही जंतर-मंतर के 1.5 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया जाता है।
सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद तोड़ा अनशन
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर जानकारी दी कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी 26 दिवसीय भूख हड़ताल तब समाप्त कर दी। क्योंकि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे। उन्हें सरकार की ओर से उनकी चिंताओं को दूर करने की प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया।
X पर एक पोस्ट में गोयल ने कहा कि वांगचुक का निर्णय छात्रों के हितों की रक्षा के लिए मोदी सरकार की प्रतिबद्धता पर उनके भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार पेपर लीक के खिलाफ कार्रवाई करने, परीक्षा सुधारों को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि “देश के भविष्य के खिलाफ काम करने वाले हर दोषी को दंडित किया जाएगा।”
Sonam Wangchuk ji has ended his fast after my colleagues, Shri @JPNadda ji and Shri @DrJitendraSingh ji met him at Medanta Hospital, Gurugram, and assured him of the government’s commitment to address the concerns.
Wangchuk ji’s decision to end his fast reflects his trust in the… pic.twitter.com/T5KGB4X25b
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) July 24, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक और प्रदर्शन को लेकर बयान जारी किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात 11:52 बजे एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों पर सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल इस कानून के मसौदे पर चर्चा करेगा और सरकार मानसून सत्र में इसे जल्द से जल्द संसद से पारित कराने का प्रयास करेगी। मोदी ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों और उनके परिवारों को नुकसान हुआ है, इसलिए सरकार ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहती है।
More strict actions against paper leaks to come in tomorrow’s Cabinet! pic.twitter.com/NRysBukk5U
— Narendra Modi (@narendramodi) July 23, 2026
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को प्रदर्शन में शमिल होने से किया मना
जंतर मंतर पर मौजूद भीड़ से अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि इन लोगों का हौसला और बुलंद हो चुका है। इस आंदोलन को 1 महीने से अधिक हो चुका है फिर भी भीड़ कम नहीं दिख रही है। इसके लिए दिल्ली पुलिस पर दबाव और सरकार की चिंता दोनों दिखाई दे रही है। लोगों को जंतर मंतर प्रदर्शन में शामिल होने से रोका जा रहा है। अब खबर आई है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्र और पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए प्रदर्शन में शामिल होना दोनों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।
कल 23 जुलाई को सोशल मीडिया X पर दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कहा कि “प्रिय छात्रों और शिक्षकों, आपकी सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। कृपया ध्यान दें कि जंतर-मंतर पर किसी भी प्रकार की गैरकानूनी सभा या प्रदर्शन कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित कर सकता है। ऐसी गतिविधियाँ छात्रों की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं और उनकी शैक्षणिक प्रगति और व्यावसायिक अवसरों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं।”
Dear students and faculty, your safety matters to us. Please note that any unlawful assemblies or demonstrations at Jantar Mantar, New Delhi, which are strictly regulated as per the directives of the Hon’ble Supreme Court of India, may invite legal action. Such activities can…
— University of Delhi (@UnivofDelhi) July 23, 2026
यानी विश्वविद्यालय ने चेतावनी दी है कि गैरकानूनी प्रदर्शन में शामिल होने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जिसका असर पढ़ाई और भविष्य के करियर पर भी पड़ सकता है। अब जेएनयू ने भी छात्रों और शिक्षकों के लिए आदेश जारी किया है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रों और शिक्षकों को प्रदर्शन में शमिल होने से किया मना
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने अपने छात्रों और शिक्षकों को आज 24 जुलाई को सलाह दी है कि वे जंतर-मंतर या आसपास होने वाली अनधिकृत सभाओं और प्रदर्शनों से दूर रहें। विश्वविद्यालय ने कहा है कि सभी लोग अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें। जेएनयू ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानून के तहत कार्रवाई के साथ-साथ विश्वविद्यालय की आचार संहिता के अनुसार भी कार्रवाई की जा सकती है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर कहा “शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं का सबसे ज्यादा असर छात्रों पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को निशाना बना रही है और उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करने के बजाय सरकार संस्थानों पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि इन्हीं कारणों से युवा सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।”
Students are on ground zero, because Modi Govt is now using these much-respected universities as propaganda outlets to bully them.
Instead of making Dharmendra Pradhan resign and then start a meaningful discussion on the Education System, Modi-Shah have resorted to denigerating… pic.twitter.com/Kw4WbD0LeQ
— Mallikarjun Kharge (@kharge) July 24, 2026
देशभर में प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई
जंतर-मंतर से शुरू हुआ सीजेपी का विरोध प्रदर्शन अब देशभर में होने लगा है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और अन्य राज्यों के कई जिलों में छात्रों और युवाओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए। कॉक्रोच जनता पार्टी ने कल 23 जुलाई को रात में सोशल मीडिया X पर पोस्ट के माध्यम से उन शहर और राज्य के साझा किये जहां प्रदर्शन जारी है।
– Kurukshetra
– Chandigarh
– Jammu
– Dharamshala
– Jaipur
– Jodhpur
– Lucknow
– Prayagraj
– Unnao
– Rampur
– Bhopal
– Indore
– Ahmedabad
– Surat
– Patna
– Bilaspur
– Raipur
– Indore
– Calcutta
– Jadavpur
– Bangalore
– Davangere
-…— Cockroach Janta Party (@CJP_for_India) July 23, 2026
वहीं दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कई जगह बैरिकेडिंग की गई, मेट्रो स्टेशनों पर निगरानी बढ़ाई गई और जंतर-मंतर जाने वाले कई प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोककर हिरासत में लिया गया।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली पुलिस ने कल 23 जुलाई को देर रात जंतर-मंतर की ओर जा रहे 25 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि ये अपने साथ विरोध प्रदर्शन के पोस्टर लेकर जा रहे थे। इससे पहले भी 22 जुलाई को खबर आई थी कि जामिया मिलिया इस्लामिया के करीब 20 छात्रों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। ऐसा तब हुआ जब उनमें से कुछ छात्र जंतर मंतर जा रहे थे और कुछ लोग कहीं और जा रहे थे तब दिल्ली पुलिस ने उन्हें निज़ामुद्दीन गोल चक्कर से उठाया।
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पटना में करीब 117 लोगों पर प्रदर्शन में हिंसा भड़काने और तोड़फोड़ का आरोप
बिहार में नीट पेपर लीक को लेकर, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और जंतर मंतर पर हो रहे प्रदर्शन के समर्थन में 22 जुलाई को प्रदर्शन हुआ। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें की गई और लाठी चार्ज की गई। वहीं बिहार पुलिस के मुताबिक सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पथराव करने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोगों की पहचान डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत 117 संदिग्धों की फोटो वाला दस्तावेज जारी किया गया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए एक टीम गठित की गई है।
मुंबई में भी प्रदर्शन के दौरान कई लोग हिरासत में
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार 22 जुलाई को मुंबई में पुलिस ने कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और अन्य लोगों को बिना नोटिस या वारंट के उनके घरों से हिरासत में लिया। हिरासत में लेने की वजह भी कई घंटों तक नहीं बताई गई। मानवाधिकार कार्यकर्ता संध्या फणस्कर को भी उनके घर से वाकोला पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
इससे पहले 20 जुलाई को चैत्यभूमि में प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश पर उन्हें और उनके 11 वर्षीय बेटे को भी हिरासत में लिया गया था। पुलिस की सख्ती और बड़ी संख्या में हिरासत के बावजूद प्रदर्शनकारी शहर के अलग-अलग हिस्सों में जुटे रहे हैं।
यूपी के वारणशी में भी प्रदर्शन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में वाराणसी में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन वारणशी समेत प्रयागराज, गाजीपुर, चंदौली और जौनपुर में हो रहा था। प्रदर्शनकारियों ने गले और हाथों में जंजीर बांधकर विरोध जताया। बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर मौके से हटा दिया।
विपक्ष का धरना प्रदर्शन
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव और आम आदमी पार्टी के कई नेता प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इसके बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री निवास के सामने प्रदर्शन करके छात्रों के प्रति अपना समर्थन दिखाया था जिसके बाद पुलिस ने राहुल गाँधी समेत विपक्ष के नेता को हिरासत में लिया था बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
प्रदर्शन ने अब राजनीतिक स्वरूप भी ले लिया है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही यह मुद्दा सदन में गूँजता दिखाई दिया, जहाँ विपक्षी दलों ने सरकार से जवाब माँगा और इस मामले को लेकर तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज़ उठाई है।
चंद्रशेखर आज़ाद ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। इसके विरोध में उन्होंने संसद परिसर में बाबा साहेब आंबेडकर की प्रतिमा के नीचे धरना शुरू किया और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही। वह अभी भी धरने पर बैठे हैं।
जो लोग अन्याय, अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाते है।
वो कुछ दिनों बाद अपनों की ही लाशें उठाते है।।#संसद_मार्च #जंतर_मंत्र #delhi pic.twitter.com/SPg5yR1bgO
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) July 22, 2026
अब यह धरना प्रदर्शन कब तक चलेगा कुछ पता नहीं क्योंकि सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती वह धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे।
पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। सीजेपी की मांग है कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए छात्रों व प्रदर्शनकारियों को न्याय मिले। शिक्षा प्रधान धमेंद्र प्रधान से इस्तीफा और नीट के जिन अभ्यर्थियों ने पेपर लीक के कारण आत्महत्या की है, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए।
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