October 14, 2026

'भले ही बैनर अलग हों, लेकिन' तिहाड़ जेल में बंद CJP नेताओं के समर्थन में उतरे राहुल गांधी, दिपके को दिया मैसेज

Time Published: Wednesday, October 14, 2026, 14:01 [IST]

Rahul Gandhi Backs CJP Leaders: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रूप से और गरमा गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो नेताओं को जेल भेजे जाने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। मामला केवल प्रदर्शन करने या पुलिस की अनुमति का नहीं रह गया है, बल्कि अब इसे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जोड़कर देखा जा रहा है।

इस बीच लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए युवाओं के खिलाफ हुई कार्रवाई की आलोचना की। साथ ही जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार को लेकर बड़ा बयान दिया है। राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

Rahul Gandhi Backs CJP Leaders

राहुल गांधी ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके की पोस्ट साझा करते हुए दिल्ली में हुई कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल में डालना कायरतापूर्ण काम है।

ये भी पढ़ें: सौरव दास-आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत! तिहाड़ भेजे जाने पर भड़की CJP, दिपके ने दी खुली चुनौती

राहुल गांधी ने कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और इंडिया गठबंधन भले ही अलग-अलग बैनर के नीचे प्रदर्शन कर रहे हों, लेकिन सभी का मकसद एक ही है। उनके मुताबिक, ये सभी लोग अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

'जंतर-मंतर जनता का है'

राहुल गांधी ने अपने बयान में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के अधिकार का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग संगठनों के विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य एक ही है और सभी नागरिक अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं।

राहुल गांधी ने कहा, "जंतर-मंतर भारत के लोगों का है। हम इसे वापस हासिल करेंगे।" उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने का विरोध किया जा रहा है।

अभिजीत दीपके ने उठाए सवाल

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी अपने संगठन के दो नेताओं को जेल भेजे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दीपके ने सवाल किया कि आखिर दोनों नेताओं ने ऐसा कौन-सा अपराध किया है, जिसके लिए उन्हें जेल भेजा गया? क्या तिरंगा फहराना अपराध है?

उन्होंने यह भी साफ किया कि सीजेपी एक स्वतंत्र प्रेशर ग्रुप है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संगठन विपक्षी इंडिया गठबंधन के खिलाफ है। दीपके के अनुसार, सीजेपी का आंदोलन और इंडिया गठबंधन एक ही उद्देश्य के लिए काम कर रहे हैं।

मंगलवार को क्या हुआ था?

दिल्ली में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इसके स्थान पर प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान चुने गए हैं। इसी फैसले का विरोध करने के लिए मंगलवार को सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका अन्य कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे। बताया गया कि दोनों नेता गेट फांदकर परिसर में दाखिल हुए और वहां तिरंगा फहराया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया।

क्यों भेजा गया तिहाड़ जेल?

सौरव दास और आशुतोष रांका पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का दोबारा उल्लंघन करने और पहले से तय बॉन्ड की शर्तें तोड़ने का आरोप है। इसके बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत के आदेश के बाद दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल ले जाया गया।

10 अक्टूबर को भी हुई थी कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है, जब सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इससे पहले 10 अक्टूबर को भी दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में लिया था। उस समय उन्हें अदालत में पेश किया गया था, जहां से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिली थी। पुलिस का आरोप है कि मंगलवार को जंतर-मंतर पहुंचकर दोनों नेताओं ने उन्हीं शर्तों का उल्लंघन किया।

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी आंदोलन

सीजेपी और विपक्षी इंडिया गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। 23 सितंबर को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया था। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में गड़बड़ियां हो रही हैं।

इसी वजह से विपक्षी नेता SIR पर रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। अब सीजेपी नेताओं को जेल भेजे जाने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के अधिकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जारी आंदोलन को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है।

ये भी पढ़ें: AISA अध्यक्ष की हमशक्ल हिरासत में, असली नेहा बोरा सड़क पर लगाती रही दौड़, चकमा देने के लिए बनाया प्लान?