August 14, 2026

छात्रों के समर्थन में CJI, कहा- ये हमारे और स्टूडेंट्स के बीच का मामला, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान देता है

NALASAR स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान छात्रों के अधिकारों पर अहम टिप्पणी सामने आई. मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण और वैध तरीके से विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है.

NALASAR स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान छात्रों के अधिकारों पर अहम टिप्पणी सामने आई. मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण और वैध तरीके से विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है.

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CJI suryakant

NALASAR में छात्र आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान छात्रों के अधिकारों पर अहम टिप्पणी सामने आई. मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण और वैध तरीके से विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ इस मामले में किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.

छात्रों को विरोध का पूरा अधिकार

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि युवावस्था में किसी छात्र की ओर से कोई गलत बयान दिया जाना अपने आप में उसके विरोध करने के अधिकार को खत्म नहीं करता. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से असहमति जताने की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है.

अदालत की टिप्पणी से साफ संकेत मिला कि छात्रों के विरोध को केवल उनकी किसी टिप्पणी या राजनीतिक मतभेद के आधार पर दबाया नहीं जाना चाहिए, बशर्ते प्रदर्शन शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में हो.

CJI बोले- मैं भी छात्र जीवन में सक्रिय रहा हूं

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने अपने छात्र जीवन का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि वह स्वयं छात्र रहते हुए सक्रिय रहे हैं. उनका कहना था कि अगर यह मान भी लिया जाए कि छात्र किसी मुद्दे पर गलत हैं, तब भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है.

CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि यह उनके और छात्रों के बीच की बातचीत है और इस मामले में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए.

BCI का सर्कुलर भी बना विवाद की वजह

इस पूरे मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI की भूमिका भी चर्चा में रही. प्रदर्शन से जुड़े विवाद के बाद BCI की ओर से ऐसा सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें संबंधित छात्रों के वकील के रूप में नामांकन को लेकर रोक की बात सामने आई थी. बाद में इस फैसले का व्यापक विरोध हुआ। इसके बाद BCI ने अपना लंबित सर्कुलर वापस ले लिया.

NALSAR छात्रों पर नहीं होगी कार्रवाई

मामला हैदराबाद स्थित NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों से भी जुड़ा है. छात्रों ने अपने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया था.

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि संबंधित घटनाओं को लेकर NALSAR के छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि संबंधित पक्षों को दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी गई है.

आखिर कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

दरअसल, NEET पेपर लीक के बाद देश के कई हिस्सों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था. इसी क्रम में दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया.

सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान CJI की टिप्पणी को कथित तौर पर गलत संदर्भ में पेश किए जाने के बाद विवाद बढ़ गया. इसके बाद NALSAR के छात्रों ने CJI को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने का शांतिपूर्ण विरोध किया. इसी विरोध के बाद BCI के सर्कुलर ने मामले को और गंभीर बना दिया और छात्रों के अधिकारों को लेकर बहस शुरू हो गई.

लोकतांत्रिक अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट का संदेश

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का व्यापक संदेश यही है कि असहमति लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है. छात्रों या युवाओं को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और केवल किसी विचार या बयान से असहमति के आधार पर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. 

इस सुनवाई में अदालत ने छात्रों को कानूनी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्हें नामांकन और कानूनी सहायता से जुड़े अवसरों की ओर भी ध्यान दिलाया. 

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