October 16, 2026

Chhattisgarh Religious Corridor: छत्तीसगढ़ में बनेगा 1000 किमी का धार्मिक कॉरिडोर, 5 शक्तिपीठों को जोड़ने की तैयारी

Chhattisgarh Religious Corridor: उत्तराखंड के चारधाम (Char Dham) की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh News) में भी करीब 1000 किलोमीटर लंबा धार्मिक कॉरिडोर (Religious Corridor) विकसित करने की तैयारी है। प्रस्तावित आस्था पथ (Aastha Path) के जरिए प्रदेश के 5 प्रमुख शक्तिपीठों को एक धार्मिक पर्यटन सर्किट (Religious Tourism Circuit) से जोड़ने की योजना है। इसके लिए वित्तीय साल 2026-27 के बजट में 5 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। हालांकि, यह राशि श्रद्धालुओं को दर्शन कराने की योजना के लिए है। कॉरिडोर का निर्माण कब शुरू होगा और इसके लिए कितना बजट निर्धारित किया जाएगा, इसे लेकर अभी अंतिम घोषणा नहीं हुई है।

रतनपुर से दंतेवाड़ा तक जुड़ेगा धार्मिक सर्किट

प्रस्तावित आस्था पथ में प्रदेश के 5 प्रमुख देवी मंदिरों को शामिल किया गया है। इसमें बिलासपुर (Chhattisgarh News) के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी, कुदरगढ़ धाम की मां बागेश्वरी और सक्ती जिले के चंद्रपुर स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर शामिल हैं। इन प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाला संभावित रूट करीब 1000 किलोमीटर का होगा। प्रस्तावित रूट मैप तैयार किया जा चुका है। इसके आधार पर आगे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जाएगी।

प्रसाद योजना के तहत मंदिरों का होगा विकास

धार्मिक स्थलों के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रसाद योजना (PRASAD Scheme) का भी सहारा लिया जा रहा है। पर्यटन मंत्रालय की इस योजना का उद्देश्य देश के प्रमुख तीर्थ और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के (Chhattisgarh  Religious Corridor) लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। रतनपुर के मां महामाया मंदिर के समग्र विकास के लिए करीब 200 करोड़ रुपए की कार्ययोजना तैयार कर केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय को भेजी गई है। मंजूरी मिलने के बाद एजेंसी तय कर विकास कार्य शुरू किए जाएंगे।

5 शक्तिपीठों के लिए अलग-अलग रिपोर्ट तैयार होगी

रतनपुर के अलावा डोंगरगढ़, कुदरगढ़, चंद्रपुर और दंतेवाड़ा के प्रमुख मंदिरों के विकास के लिए भी रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल रतनपुर की 200 करोड़ रुपए की कार्ययोजना को मंजूरी मिलने और निर्माण शुरू होने की तारीख स्पष्ट नहीं है। ऐसे में 1000 किलोमीटर के पूरे कॉरिडोर का निर्माण कब शुरू होगा, इसकी तस्वीर DPR और आगे की स्वीकृतियों के बाद ही साफ होगी।

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सड़क, पार्किंग और विश्राम स्थलों पर जोर

प्रस्तावित धार्मिक कॉरिडोर में सिर्फ मंदिरों का विकास ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के पूरे यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने की योजना है। मंदिरों तक बेहतर सड़क संपर्क, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता और सुरक्षा सुविधाएं विकसित की जाएंगी। (Chhattisgarh  Religious Corridor) इसके साथ ही पार्किंग, सामुदायिक शौचालय, विश्राम स्थल, बैठने की व्यवस्था और हवन-पूजन स्थलों को विकसित करने का प्रस्ताव है।

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CCTV से लेकर होम स्टे तक की सुविधा

आस्था पथ के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर CCTV कैमरे, पर्यटक सहायता केंद्र, गार्डन और होम स्टे जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं। परियोजना में स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक वास्तुकला और प्राकृतिक परिवेश को संरक्षित रखने पर (Chhattisgarh  Religious Corridor) भी जोर दिया जाएगा। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, अभी यह पूरी योजना प्रस्तावित चरण में है और अंतिम रूट, बजट व निर्माण की समयसीमा DPR और सरकारी मंजूरी के बाद तय होगी।

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छत्तीसगढ़ के 5 प्रमुख शक्तिपीठ

  • मां महामाया मंदिर : रतनपुर

  • मां बम्लेश्वरी मंदिर : डोंगरगढ़

  • मां दंतेश्वरी मंदिर : दंतेवाड़ा

  • मां बागेश्वरी मंदिर : कुदरगढ़

  • मां चंद्रहासिनी मंदिर : चंद्रपुर

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