August 23, 2026

Chandra Grahan 2026: रक्षाबंधन पर लाल होगा चांद! 28 अगस्त को दिखेगा ‘Blood Moon’, जानें भारत में आएगा नजर या नहीं - Haribhoomi

28 अगस्त को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा। यह गहरा आंशिक चंद्रग्रहण होगा, जिसमें चांद का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया में आने से लाल या तांबे जैसा दिखाई दे सकता है। हालांकि, भारत में यह खगोलीय घटना नजर नहीं आएगी।

Chandra Grahan 2026

Chandra Grahan 2026

  • Published: 23 Aug 2026, 08:29 AM IST
  • Last Updated: 23 Aug 2026, 08:29 AM IST

Chandra Grahan 2026: अगस्त का आखिरी सप्ताह खगोल प्रेमियों के लिए खास रहने वाला है। 28 अगस्त को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण होगा। खास बात यह है कि इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। इस दौरान चांद का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया में आ जाएगा और ग्रहण के गहरे चरण में उसकी सतह लाल या तांबे जैसी दिखाई दे सकती है।

हालांकि इसे पूर्ण चंद्रग्रहण कहना सही नहीं होगा। वैज्ञानिक दृष्टि से यह गहरा आंशिक चंद्रग्रहण होगा। अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय समय के अनुसार ग्रहण 27 और 28 अगस्त के बीच दिखाई दे सकता है।

क्यों लाल दिखाई देगा चांद?
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। ग्रहण के दौरान सूर्य की सीधी रोशनी चांद तक नहीं पहुंच पाती।

लेकिन पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह रोकता नहीं है। वायुमंडल से छनकर और मुड़कर पहुंचने वाली लाल रोशनी चांद की सतह को हल्की लालिमा देती है। इसी वजह से चंद्रमा लाल, तांबे या जंग जैसे रंग में दिखाई दे सकता है। इसी तरह के लाल रंग वाले चंद्रमा को आम बोलचाल में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।

चांद का कितना हिस्सा छाया में आएगा?
ग्रहण अपने चरम पर पहुंचने के दौरान चंद्रमा का करीब 93 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया यानी Umbra में आ सकता है। इसलिए चांद का ज्यादातर हिस्सा ढका हुआ दिखाई देगा और उसका रंग सामान्य पूर्णिमा के चांद से काफी अलग नजर आ सकता है।

हालांकि, एक महत्वपूर्ण अंतर है। पूर्ण चंद्रग्रहण में पूरा चांद पृथ्वी की गहरी छाया में चला जाता है, जबकि अगस्त 2026 का ग्रहण उस स्थिति तक नहीं पहुंचेगा। इसलिए इसे गहरा आंशिक चंद्रग्रहण कहा जा रहा है।

किन देशों में दिखेगा चंद्र ग्रहण?
28 अगस्त का यह चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और यूरोप-अफ्रीका के कुछ हिस्सों से देखा जा सकेगा। ग्रहण की खगोलीय घटनाएं एक ही समय पर होंगी, लेकिन अलग-अलग देशों में स्थानीय समय और तारीख के हिसाब से इसका समय अलग दिखाई देगा।

क्या भारत में दिखेगा ‘Blood Moon’?
यह सवाल भारतीय दर्शकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। अगस्त 2026 का यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, चीन और जापान जैसे देशों में भी इस ग्रहण का नजारा देखने को नहीं मिलेगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को 28 अगस्त की रात लाल चांद देखने का मौका नहीं मिलेगा।

क्या भारत में सूतक काल लगेगा?
चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे जुड़े सूतक काल के नियम लागू नहीं होंगे। ऐसे में रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने या अन्य धार्मिक गतिविधियों को लेकर ग्रहण संबंधी किसी विशेष बाधा की बात नहीं होगी।

हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण का क्या महत्व है?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में चंद्र ग्रहण को आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक शांति, स्मरण शक्ति और मातृत्व से जोड़ा जाता है। वहीं ग्रहण की धार्मिक व्याख्या में राहु और केतु का भी उल्लेख मिलता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार राहु द्वारा सूर्य या चंद्रमा को ग्रसने की कथा ग्रहण से जुड़ी हुई है। इसी कारण कई लोग ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और मंत्र जाप करते हैं। भगवान शिव, विष्णु, चंद्रमा या अपने इष्ट देवता के मंत्रों का जाप करने की परंपरा भी कुछ परिवारों में मानी जाती है। हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां चंद्र ग्रहण से जुड़े सूतक आदि के नियम लागू नहीं माने जाएंगे।