August 13, 2026

Chamoli Tunnel Collapse Reason: 3,860 करोड़ के प्रोजेक्ट में हादसा, चमोली में कैसे धंस गई टनल? 16 मजदूर फंसे

Time Updated: Thursday, August 13, 2026, 21:22 [IST]

Chamoli Tunnel Collapse Reason: उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार (13 अगस्त) को निर्माणाधीन टनल में अचानक पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया। पीपलकोटी स्थित विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना (VPHEP) की टनल में काम कर रहे 16 मजदूर अंदर फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही जिला मजिस्ट्रेट गौरव कुमार तुरंत मौके पर पहुंचे।

मौके पर जिला प्रशासन, पुलिस, SDRF, NDRF, ITBP, सेना और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें पहुंची। सुरंग के अंदर अभी भी फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। सीएम पुष्कर सिंंह धामी ने भी घटना को लेकर कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए रेस्क्यू टीमों को तत्काल मौके पर भेजा गया है। जिला प्रशासन सहित सभी संबंधित एजेंसियों को युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे हो गया हादसा?

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अचानक टनल में भर गया पानी और मलबा

पीपलकोटी में THDC की 444 मेगावाट की विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के तहत निर्माण कार्य चल रहा है। इसी परियोजना की निर्माणाधीन टनल में गुरुवार को अचानक पानी और मलबा आने की सूचना मिली। हादसे के वक्त मजदूर टनल के अंदर काम कर रहे थे। अचानक पानी और मलबे का प्रवाह बढ़ने से टनल का रास्ता बाधित हो गया और कई मजदूर अंदर फंस गए। स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत टीमों को सूचना मिलते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

16 मजदूर फंसे, कई को सुरक्षित निकाला गया

प्रारंभिक जानकारी में टनल के अंदर 16 मजदूरों के फंसे होने की बात सामने आई। राहत एवं बचाव दलों ने अभियान चलाकर कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। अलग-अलग रिपोर्टों में बचाए गए मजदूरों की संख्या में अंतर है, इसलिए रेस्क्यू पूरा होने तक अंतिम आंकड़े में बदलाव संभव है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता टनल में फंसे बाकी मजदूरों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।

आखिर कैसे धंसी चमोली की टनल?

इस हादसे का सबसे अहम सवाल यही है कि टनल अचानक कैसे धंस गई? मौजूदा जानकारी के आधार पर भारी बारिश और उसके कारण हुए भूस्खलन को संभावित वजह माना जा रहा है। चमोली और आसपास के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण पहाड़ों में मिट्टी और चट्टानों के खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। टनल निर्माण के दौरान पहाड़ के भीतर पहले से मौजूद दरारों, कमजोर चट्टानी परतों और पानी के रास्तों के सामने आने की स्थिति में भी अचानक मलबा और पानी टनल में प्रवेश कर सकता है। लेकिन इस मामले में इनमें से कौन-सा कारण निर्णायक रहा, यह फिलहाल आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

पानी टनल के लिए क्यों बन जाता है बड़ा खतरा?

पहाड़ी इलाकों में सुरंग बनाते समय सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक भूगर्भीय संरचना और पानी का प्रवाह होती है। टनल के रास्ते में अगर पानी से भरी चट्टानी दरार या कमजोर भू-परत मिल जाए तो खुदाई के दौरान अचानक पानी का दबाव बढ़ सकता है। विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों में भी टनल निर्माण के लिए विस्तृत भूगर्भीय और पर्यावरणीय अध्ययन को बताया गया है। परियोजना में 13.4 किलोमीटर लंबी हेडरेस टनल और करीब 3 किलोमीटर लंबी टेलरेस टनल शामिल हैं। यानी जिस टनल में हादसा हुआ, वह किसी सामान्य छोटी सुरंग का हिस्सा नहीं बल्कि एक बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट की भूमिगत संरचना है।

2025 में भी टनल में हुआ था हादसा

विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना में इससे पहले भी निर्माण के दौरान दुर्घटना सामने आ चुकी है। दिसंबर 2025 में इसी परियोजना की टनल के अंदर दो औद्योगिक लोको ट्रेन आपस में टकरा गई थीं। उस समय टनल में 109 कर्मचारी मौजूद थे और बड़ी संख्या में कर्मचारी घायल हुए थे। हादसे के बाद इसकी जांच भी शुरू की गई थी।

परियोजना को हिमालयी क्षेत्र की कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों में बनाया जा रहा है। ऐसे में टनल निर्माण के दौरान चट्टानों की स्थिति, पानी के स्रोत, भारी बारिश और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक परिस्थितियां लगातार चुनौती बनी रहती हैं।

444 मेगावाट का है यह प्रोजेक्ट

विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की क्षमता 444 मेगावाट है। यह अलकनंदा नदी पर बनाया जा रहा रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट है। THDC के दस्तावेज के मुताबिक, परियोजना में 65 मीटर ऊंचा डायवर्जन डैम, 13.4 किलोमीटर हेडरेस टनल, करीब 3 किलोमीटर टेलरेस टनल और भूमिगत पावर हाउस जैसी प्रमुख संरचनाएं शामिल हैं।

THDC की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, परियोजना स्थल पर 2025-26 में भी निर्माण कार्य जारी थे। जुलाई 2025 में परियोजना में बाढ़ से निपटने की तैयारियों के लिए मल्टी-एजेंसी मॉक ड्रिल और अर्ली फ्लड वार्निंग सिस्टम से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे।

3,860 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजना

केंद्र सरकार के परियोजना मॉनिटरिंग रिकॉर्ड में विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना की मूल लागत ₹2,491.58 करोड़ दर्ज है, जबकि संशोधित लागत ₹3,860.35 करोड़ बताई गई है। रिकॉर्ड में परियोजना की शुरुआत अगस्त 2008 और संशोधित लक्ष्य जून 2026 दर्ज किया गया है।

अब एक नजर पूरे प्रोजेक्ट पर-