September 23, 2026

पार्षद के बयान से दादर खुर्द के ग्रामीण नाराज: भू-विस्थापित न मानने पर विवाद, CGM और कलेक्टर को ज्ञापन, उग्र आंदोलन की चेतावनी - Korba News

कोरबा के दादर खुर्द गांव के भू-विस्थापितों और ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधि के बयानों और रोजगार में कथित पक्षपात का विरोध किया है। ग्रामीणों ने SECL मानिकपुर क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) और कोरबा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले में स्थिति स्पष

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ग्रामीणों का आरोप है कि वार्ड नंबर 10 भिलाई खुर्द के पार्षद उपेंद्र पटेल ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि दादर खुर्द के ग्रामीण भू-विस्थापित नहीं हैं। ग्रामीणों ने इस बयान को असत्य और उनके लंबे संघर्ष का अपमान बताया है।

पार्षद के बयान को बताया संघर्ष का अपमान

उनका कहना है कि उनके पूर्वजों और ग्रामीणों की जमीनें SECL की खदानों के विस्तार और औद्योगिक कार्यों के लिए अधिग्रहित की गई थीं। इसके राजस्व रिकॉर्ड भी मौजूद हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, किसी बाहरी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि को उनके विस्थापन की श्रेणी को खारिज करने का अधिकार नहीं है।

ठेका कंपनियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने का आरोप

ज्ञापन में ग्रामीणों ने मानिकपुर खदान के तहत संचालित निजी ठेका कंपनियों, कोयला ट्रांसपोर्टिंग और अन्य कामों में स्थानीय प्रभावित युवाओं को रोजगार नहीं मिलने का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय युवाओं की मांगों को दबाकर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे प्रभावित परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन इस पूरे मामले पर चुप है और विस्थापितों के हक में रोजगार नीति को सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा।

ग्रामीणों ने SECL मानिकपुर CGM और कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

ग्रामीणों ने SECL मानिकपुर CGM और कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

दादर खुर्द के विस्थापन की स्थिति साफ करने की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि दादर खुर्द के भू-विस्थापितों की स्थिति स्पष्ट की जाए और गलत प्रचार करने वालों को चेतावनी दी जाए। उन्होंने खदान क्षेत्र में होने वाले स्थानीय कार्यों और ठेका कंपनियों में दादर खुर्द समेत वास्तविक विस्थापित गांवों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की मांग की है।

रोजगार नहीं मिला तो खदान बंद कराने की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि रोजगार में रुकावट डालना बंद नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और खदान का काम बंद कर देंगे। ग्रामीणों ने कहा है कि ऐसी स्थिति की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।