CG Ka Mudda: सक्ती जिले के जैजैपुर में करीब 6.06 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा नया न्यायालय भवन निर्माण पूरा होने से पहले ही सवालों के घेरे में आ गया है। और बारिश ने 6.06 करोड़ रुपये के इस निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए। छत से पानी टपका, बीम से सीपेज हुई और दीवारों में दरारें नजर आने लगीं। निर्माण पूरा होने से पहले सामने आई इन खामियों ने ठेकेदार के साथ-साथ विभागीय निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बारिश और खुल गई निर्माण की पोल
जिस भवन को वर्षों तक न्याय व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक बनना है, वह पहली ही बारिश में पानी रोकने में असफल नजर आया। छत से रिसाव, बीम के जोड़ से सीपेज और दीवारों में दरारों की तस्वीरें अब चर्चा का विषय हैं। सवाल यह है कि जब भवन अभी निर्माणाधीन है, तब उसकी यह हालत है तो पूरा होने के बाद उसकी गुणवत्ता और मजबूती पर कैसे भरोसा किया जाए।
क्या गुणवत्ता जांच सिर्फ फाइलों तक सीमित रही
सरकारी निर्माण कार्यों में हर चरण पर गुणवत्ता परीक्षण, सामग्री की जांच और नियमित तकनीकी निरीक्षण की जिम्मेदारी विभागीय इंजीनियरों की होती है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सब कुछ मानकों के अनुसार हो रहा था तो पहली ही बारिश में इतनी खामियां क्यों सामने आईं? क्या निरीक्षण केवल कागजों पर पूरा किया गया, या मौके पर भी उतनी ही गंभीरता दिखाई गई? यह ऐसा सवाल है जिसका जवाब विभाग को देना होगा।
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करोड़ों का खर्च लेकिन जवाबदेही किसकी
करीब 6.06 करोड़ रुपये जनता के टैक्स से खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में यदि निर्माणाधीन भवन में ही सीपेज और दरारें दिखाई दें तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। क्या केवल ठेकेदार जवाबदेह होगा या फिर निर्माण की निगरानी करने वाले अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही गुणवत्ता पर समझौता हुआ है तो भविष्य में भवन की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
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जांच होगी या जिम्मेदारी तय होगी?
क्षेत्र में अब स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग तेज हो रही है। लोगों का कहना है कि केवल औपचारिक जांच नहीं, बल्कि निर्माण सामग्री, गुणवत्ता परीक्षण, माप पुस्तिका, भुगतान प्रक्रिया और विभागीय निरीक्षण की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि कहीं लापरवाही या मानकों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। क्योंकि सवाल सिर्फ एक भवन का नहीं, बल्कि सरकारी धन और न्याय व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण संस्थान का है।
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कैमरे के सामने जवाब देने से इनकार
निर्माणाधीन जैजैपुर न्यायालय भवन में पहली बारिश के बाद सामने आई सीपेज और दरारों को लेकर जब लोक निर्माण विभाग की कार्यपालन अभियंता प्रियंका मेहता से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कैमरे पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि विभाग की ओर से जो भी जानकारी दी जाएगी, वह जनसंपर्क विभाग के माध्यम से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उपलब्ध कराई जाएगी।
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अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की इस सरकारी परियोजना में सामने आई इन खामियों की जिम्मेदारी किसकी तय होगी। क्या स्वतंत्र तकनीकी जांच होगी या मामला विभागीय कार्रवाई तक ही सीमित रहेगा? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
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