बिलासपुर। 31 जुलाई 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने स्थानीय निकाय के कर्मचारियों के तबादले को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है, एक नगर निगम में पदस्थ कर्मचारी का दूसरे स्थानीय निकाय में सीधे तबादला नहीं किया जा सकता। ऐसे कर्मचारी को दूसरे निकाय में भेजने के लिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत प्रतिनियुक्ति का सहारा लेना होगा और मूल निकाय में उसका लीन बनाए रखना होगा।
रायपुर नगर निगम में पदस्थ उप-अभियंता आशीष कुमार शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी 11 जुलाई 2026 के स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, नगर पालिका निगम अधिनियम, 1956 की धारा 58 के तहत नगर निगम के कर्मचारी को किसी दूसरे नगर पालिका निकाय में सीधे स्थानांतरित करने का प्रावधान नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को यह छूट दी है कि प्रशासनिक आवश्यकता होने पर कानून और अधिनियम के प्रावधानों का पालन करते हुए कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए नया आदेश जारी कर सकती है।
पढ़िए क्या है मामला?
याचिकाकर्ता आशीष कुमार शर्मा रायपुर नगर पालिक निगम में उप-अभियंता के पद पर पदस्थ थे। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 11 जुलाई 2026 को स्थानांतरण आदेश जारी किया। इस आदेश में आशीष कुमार शर्मा का नाम था। उन्हें रायपुर नगर निगम से नगर पालिका परिषद आरंग, जिला रायपुर भेज दिया गया था। स्थानांतरण आदेश को चुनाैती देते हुए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने नियमों का दिया हवाला
याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता सोमकांत वर्मा ने कहा, छत्तीसगढ़ नगर पालिका निगम अधिनियम, 1956 की धारा 58(5) और 58(6) के तहत एक नगर निगम में पदस्थ कर्मचारी का दूसरे नगर पालिका निकाय में सीधे तबादला नहीं किया जा सकता। ऐसे मामले में प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। इसके तहत कर्मचारी का मूल सेवा संबंध और लीन उसके मूल निकाय में बना रहता है। तय प्रावधान के अलावा याचिकाकर्ता ने अपने वृद्ध और बीमार माता-पिता की देखभाल की व्यक्तिगत कठिनाई का भी उल्लेख अपनी याचिका में किया था।
राज्य सरकार ने कहा- स्थानांतरण प्रशासनिक जरूरत का हिस्सा
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए गर्वनमेंट एडवोकेट विवेक वर्मा और नगर निगम रायपुर की ओर से अधिवक्ता स्वाति अग्रवाल ने कहा, स्थानांतरण सेवा का हिस्सा है और प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर कर्मचारी को दूसरी जगह पदस्थ किया जा सकता है। यह भी कहा, धारा 58(5) और (6) के तहत राज्य सरकार को स्थानांतरण का अधिकार प्राप्त है तथा इससे कर्मचारी के वेतन, भत्ते और वरिष्ठता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
स्थानांतरण आदेश को किया निरस्त
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, नगर निगम के कर्मचारी को किसी दूसरे निकाय में भेजने के मामले में अधिनियम की व्यवस्था के अनुरूप प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया अपनाना जरूरी है। कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार का 11 जुलाई 2026 का आदेश सामान्य स्थानांतरण आदेश था। इसमें कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने या मूल नगर निगम में उसका लीन बनाए रखने संबंधी व्यवस्था नहीं थी। इसलिए आदेश को संबंधित कर्मचारी की हद तक वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए 11 जुलाई 2026 के स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया है।