
यूपी चुनाव आयोग से जुड़े हालिया विवाद क्या हैं?
उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है. आगरा MLC चुनाव में धांधली के आरोपों पर 6 अधिकारियों का सस्पेंशन, सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट और SIR के दौरान पीलीभीत में अधिकारियों पर कार्रवाई, तीन ऐसे मामले हैं, जिन्होंने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया और यूपी चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
इन मामलों में दिल्ली से निर्देश, विवाद के बाद माफी और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे पहलू सामने आए हैं. इससे भारत निर्वाचन आयोग की साख और यूपी में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
1. आगरा में धांधली के आरोप, 6 अधिकारी सस्पेंड
26 अक्टूबर को आगरा में MLC चुनाव में धांधली के आरोपों को लेकर कार्रवाई हुई. चुनाव के दौरान गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में 6 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया. इनमें सेक्टर मजिस्ट्रेट, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर शामिल थे.
मामले में ECI ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की. इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए. चुनाव के दौरान गड़बड़ियों को रोकने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर होती है, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई होने से मामला और गंभीर हो गया.
2. सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद, 24 घंटे बाद माफी
यूपी CEO के सोशल मीडिया हैंडल से हुई एक पोस्ट पर जमकर विवाद हुआ. इसके बाद करीब 24 घंटे के भीतर माफी मांगी गई. सोशल मीडिया पर CEO UP के हैंडल से MLC वोटर लिस्ट में हुई गड़बड़ियों पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह के जातिवादी होने के आरोप पर जबाव देते हुए एक पोस्ट किया गया था. इसमें ‘राम ने शर्मा को मारा’ मामले का जिक्र करते हुए लिखा गया कि भगवान का यह भी शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा, नहीं तो जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने का आरोप भी लगता.
पोस्ट सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया. करीब 24 घंटे बाद माफी मांगी गई. चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान से जुड़े आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस तरह की पोस्ट ने उसकी निष्पक्षता और सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए.
इस हैंडल के उद्धृत पोस्ट में टिप्पणियों की भाषा के स्तर और भाव और इनकी तीखी प्रकृति इस आधिकारिक हैंडल से अपेक्षित संचार की प्रकृति के अनुरूप नहीं है। पोस्ट में टिप्पणियों से उत्पन्न वास्तविक आक्रोश को अच्छी तरह से नोट किया गया है। हम इससे अचंभित और नाराज़ लोगों से ईमानदारी से माफी मांगते हैं। अब से हमारा संचार शालीन और औपचारिक होगा।
— CEO Uttar Pradesh (@ceoup) October 27, 2026
3. SIR विवाद में पीलीभीत का मामला, 2 SDM पर कार्रवाई
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान पीलीभीत का मामला भी चर्चा में आया. इस मामले में दो SDM और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की गई. यह मामला पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा था. यहां शिकायत मिली थी कि ऑनलाइन पोर्टल पर EPIC नंबर डालने पर किसी दूसरे वोटर की जानकारी दिखाई दे रही है. EPIC नंबर वोटर आईडी कार्ड पर दर्ज एक खास पहचान नंबर होता है. शिकायत के बाद जांच की गई, जिसमें वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की पुष्टि हुई थी.
SIR के दौरान वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में अधिकारियों पर FIR दर्ज होने से विवाद और बढ़ गया. आगरा में चुनाव के दौरान गड़बड़ी के आरोप, सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद और पीलीभीत में वोटर लिस्ट से जुड़ी गड़बड़ियों के मामलों ने यूपी में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं. इन घटनाओं का असर भारत निर्वाचन आयोग की छवि और चुनावी प्रक्रिया पर लोगों के भरोसे पर भी पड़ सकता है.

देवेश कुमार पांडेय
देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है. साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.
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