जितेन्द्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं. वह एयर मार्शल के पद से सेवानिवृत्त हुए और भारतीय वायुसेना के Western Air Command के Air Officer Commanding-in-Chief के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. उनका वायुसेना करियर दिसंबर 1986 से अप्रैल 2026 तक रहा.
ऑपरेशन सिंदूर में थी अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा ने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की Western Air Command (WAC) के Air Officer Commanding-in-Chief (AOC-in-C) का पद संभाला था. अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्त होने तक वे इसी पद पर रहे. ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में हुआ, यानी अभियान के दौरान वे पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे.
पश्चिमी वायु कमान की भूमिका क्यों अहम थी?
Western Air Command भारतीय वायुसेना की सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमानों में से एक है और पाकिस्तान से लगे पश्चिमी मोर्चे की हवाई सुरक्षा तथा ऑपरेशनल गतिविधियों में इसकी बड़ी भूमिका रहती है. इसलिए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस कमान के प्रमुख के तौर पर मिश्रा की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण थी.
उनकी भूमिका को केवल किसी एक विमान या एक हमले का नेतृत्व करने तक सीमित नहीं समझना चाहिए. कमांड स्तर पर ऑपरेशनल प्लानिंग, एयर डिफेंस, संसाधनों का समन्वय और अभियान के दौरान निर्णय-प्रक्रिया उनके दायित्वों का हिस्सा थे.
ऑपरेशन सिंदूर के लिए मिला बड़ा सैन्य सम्मान
उनकी भूमिका का सबसे मजबूत आधिकारिक संकेत यह है कि उन्हें Sarvottam Yudh Seva Medal (SYSM) से सम्मानित किया गया. यह युद्धकालीन विशिष्ट सेवा के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों में से एक है और 2025 के सम्मानित अधिकारियों की सूची में जितेंद्र मिश्रा का नाम ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में शामिल था. जून 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया.
मिश्रा के पास ऑपरेशनल और कमांड से जुड़ा लंबा अनुभव रहा है. वह एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट, 18 विंग और 15 विंग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं. यही नहीं इसके अलावा उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ ऑपरेशन और डॉक्ट्रीन, ऑर्गेनाइजेशन एंड ट्रेनिंग से जुड़ी जिम्मेदारी निभाई.
उन्हें मिले हैं कई सैन्य सम्मान
उनके सैन्य करियर में Sarvottam Yudh Seva Medal (SYSM), Ati Vishisht Seva Medal (AVSM) और Vishisht Seva Medal (VSM) जैसे महत्वपूर्ण सम्मान शामिल हैं.
1986 में भारतीय वायुसेना में कमीशन
जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था. उनका सैन्य करियर करीब चार दशक लंबा रहा. वे फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के रूप में भी काम कर चुके हैं.
3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव
उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में उनका व्यापक उड़ान अनुभव शामिल है. उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने 3,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी और फाइटर, ट्रांसपोर्ट विमान तथा हेलीकॉप्टर समेत 18 से ज्यादा प्रकार के एयरक्राफ्ट उड़ाए.
करगिल युद्ध से भी जुड़ी अहम भूमिका
मिश्रा के करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय करगिल युद्ध के समय Mirage-2000 में लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने से जुड़ा है. वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने इस क्षमता को विकसित और ऑपरेशनल किया. बाद में इन हथियारों का इस्तेमाल टाइगर हिल और मुनथो ढालो जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान किया गया
राम मंदिर CEO की निभाएंगे भूमिका
राम मंदिर के प्रशासन को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने के उद्देश्य से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की और इस लंबी प्रक्रिया के बाद जितेंद्र मिश्रा पहले राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ घोषित किए गए हैं.
इस पद के लिए देशभर से 5,000 से ज्यादा आवेदन आए. छंटनी और इंटरव्यू के बाद अब अंतिम चरण में कुछ नामों पर विचार किया गया. ट्रस्ट के निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के अनुसार CEO की जिम्मेदारियों में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल हो सकता है. CEO ट्रस्ट के अधीन काम करेगा .
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