Aug 11, 2026 11:44 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए सीईओ के उम्मीदवारों का मंगलवार को इंटरव्यू हुआ। इस दौरान उनसे अलग-अलग तरह के कुल 18 सवाल पूछे गए। इनमें उनके धार्मिक क्रियाकलापों, खाने-पीने संबंधी आदतों और राम मंदिर के लिए विजन से जुड़े सवाल थे।

राम मंदिर सीईओ के लिए इंटरव्यू शुरू हो चुका है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए सीईओ के उम्मीदवारों का मंगलवार को इंटरव्यू हुआ। इस दौरान उनसे अलग-अलग तरह के कुल 18 सवाल पूछे गए। इनमें उनके धार्मिक क्रियाकलापों, खाने-पीने संबंधी आदतों और राम मंदिर के लिए विजन से जुड़े सवाल थे। 5200 अभ्यर्थियों में से 18 को शॉर्टलिस्ट किया गया है। पहले दिन इनमें से सात उम्मीदवारों का इंटरव्यू हुआ। सूत्रों के मुताबिक इन कैंडिडेट्स से, उनके वर्क एक्सपीरियंस, परिवार और हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों के पालन संबंधी सवाल भी पूछे गए। गौरतलब है कि चंदा चोरी में हेर-फेर का आरोप सामने आने के बाद, फुल टाइम सीईओ नियुक्त करने का फैसला लिया गया था। इन आरोपों की वजह से ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन की भी जांच हो रही है। जबकि इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय समेत तीन अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
34 पॉइंट का गूगल फॉर्म
अयोध्या में हुए इस इंटरव्यू से पहले, सभी अभ्यर्थियों को 34 पॉइंट का गूगल फॉर्म भरना था। इसके अलावा, इन लोगों से नेतृत्व क्षमता और धार्मिक-सामाजिक जुड़ाव को लेकर भी सवाल पूछे गए। नाम न छापने की शर्त पर एक शख्स ने बताया कि पहले सभी 18 उम्मीदवारों का ऑनलाइन इंटरव्यू लिया गया था। मंगलवार को केवल आठ उम्मीदवारों का आमने-सामने इंटरव्यू हुआ, जिनमें चार पूर्व IAS अधिकारी शामिल थे। गूगल फॉर्म में जो सवाल पूछे गए थे, उनमें क्या आप जनेऊ पहनते हैं? क्या आप पूरी तरह से शाकाहारी हैं या मांसाहारी भोजन करते हैं? क्या आप शराब पीते हैं ? क्या आप कट्टर हिंदू हैं? क्या आप हिंदू धर्म के अनुसार कपड़े पहनने में सहज होंगे?
इसके अलावा अभ्यर्थियों से यह भी पूछा गया कि आपने पहले कहां काम किया है? क्या आप बड़ी भीड़ को मैनेज करने में सफल रहेंगे? क्या आपकी भगवान राम में आस्था है? साथ ही परिवार के बारे में भी सवाल पूछे गए। एक दूसरे व्यक्ति ने बताया कि हर उम्मीदवार का इंटरव्यू करीब एक से दो घंटे तक चला। इस दौरान उम्मीदवारों की प्रशासकीय कुशलता के साथ-साथ भक्ति, टेंपरामेंट और विजन के बारे में भी जानकारी ली गई। चूंकि मामला दुनिया के सबसे हाई-प्रोफाइल मंदिर से जुड़ा है, इसलिए यह काफी मायने रखता है।
कौन हैं संभावित उम्मीदवार?
हालांकि अभी शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों की पहचान नहीं जाहिर की गई है। लेकिन अंदरूनी जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक उम्मीदवारों में एक नाम पूर्व आईपीएस अफसर राजेश पांडेय का भी है। जानकारी के मुताबिक उनका इंटरव्यू बुधवार को होने वाला है। राजेश पांडेय, यूपी के पूर्व आईजी हैं। वह लखनऊ के एसएसपी रह चुके हैं और यूपी स्पेशल टास्क फोर्स के फाउंडर भी। वह बरेली में आईजी की सेवा देने के बाद रिटायर हुए थे। वह लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर के सेक्रेट्री भी हैं। त्योहार के समय इस मंदिर में जबर्दस्त भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा फैजाबाद के डीएम रह चुके रिटायर्ड आईएएस योगेश्वर मिश्रा भी उम्मीदवारों में शामिल हैं। हालांकि उन्होंने इस बात से ना तो इनकार किया और ना ही स्वीकार किया।
सेलेक्शन पैनल में कौन, क्या है प्रक्रिया
राम मंदिर के लिए सीईओ के चयन पैनल में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त) और सुरेश हावरे शामिल हैं। कमेटी को तीन नामों को शॉर्टलिस्ट करने और उन्हें ट्रस्ट को 2 सितंबर से पहले सौंपने का काम दिया गया है। उसी दिन ट्रस्ट की कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद ट्रस्ट अंतिम तीन उम्मीदवारों में से सीईओ का इंटरव्यू लेकर चुनेंगे। यह सीईओ ट्रस्ट का सबसे उच्च कार्यकारी अधिकारी होगा। उसका मुख्य काम कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों का प्रबंधन करने, मंदिर के लिए विभिन्न सिस्टम बनाने, करोड़ों तीर्थयात्रियों के लिए केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ सुरक्षा का समन्वय करने और अनुष्ठानों और त्योहारों के सुचारू संचालन सुनिश्चित करने पर होगा।
हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक एक वरिष्ठ ट्रस्ट सदस्य ने बताया कि पद की संवेदनशीलता को देखते हुए, अंतिम चयन संभवतः केंद्र और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रत्यक्ष निगरानी में किया जाएगा। सदस्य ने अनाम रहने की शर्त पर कहाकि जो व्यक्ति सीईओ की कुर्सी पर बैठेगा, वह सरकार और संघ दोनों के लिए उपयुक्त होगा। सदस्य ने यह भी कहा कि भविष्य में सीईओ कार्यालय में की जाने वाली नियुक्तियों के लिए भी संभवतः केंद्र और आरएसएस की मंजूरी चाहिए होगी।
