September 25, 2026

CEC ज्ञानेश का UP दौरा 21 सितंबर को ही किया गया था कैंसिल! आखिर क्यों?अब जाकर खुला चुनाव आयोग का अंदरूनी विवाद

Time Updated: Friday, September 25, 2026, 12:13 [IST]

CEC Gyanesh Kumar UP Visit Cancelled: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मेरठ और वाराणसी दौरा उस वक्त अचानक टल गया, जब चुनाव आयोग के अंदरूनी फैसलों को लेकर मतभेद की खबरें सार्वजनिक भी नहीं हुई थीं। यूपी में कार्यक्रम की तैयारियां 21 सितंबर को ही रोक दी गई थीं। इसके दो दिन बाद 23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने चुनाव आयोग के भीतर चल रही खींचतान को सामने ला दिया। ऐसे में ये एक महज संयोग है या कुछ और, इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सी में कार्यक्रमों में शामिल होना था। इन कार्यक्रमों में बैठकों के साथ जेन-जी युवाओं से संज्ञानेश कुमार को 25 सितंबर को मेरठ और 28 सितंबर को वाराणसीवाद भी रखा गया था। लेकिन मेरठ में तैयारियां 21 सितंबर को ही रोक दी गईं। अधिकारियों को उसी दिन लखनऊ से मौखिक तौर पर दौरा स्थगित होने की जानकारी मिल गई थी।

CEC Gyanesh Kumar UP Visit Cancelled

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बाद में 24 सितंबर को इसकी औपचारिक जानकारी साझा की। इस पत्र पर भी 21 सितंबर की तारीख दर्ज है। साथ में चुनाव आयोग के एसवीईईपी सेक्शन के अधिकारी सौरभ राना की तरफ से भेजे गए ईमेल की प्रति लगाई गई थी। ईमेल में कार्यक्रम स्थगित होने की सूचना थी, लेकिन कारण नहीं बताया गया। यही टाइमलाइन अब सवाल खड़े कर रही है। क्योंकि आयोग के भीतर मतभेद की खबर सार्वजनिक होने से पहले ही सीईसी का यूपी कार्यक्रम रोक दिया गया था।

मेरठ-वाराणसी में क्या करने वाले थे ज्ञानेश कुमार?

ज्ञानेश कुमार का यह दौरा सिर्फ प्रशासनिक बैठक तक सीमित नहीं था। इसका एक बड़ा हिस्सा युवाओं से सीधे संवाद का था। आयोग ने जेन-जी को मतदान, चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज के बारे में जानकारी देने के लिए यह पहल शुरू की थी।

अगस्त में ज्ञानेश कुमार ने युवाओं के साथ संवाद कर ईएलसी 2.0 की शुरुआत की थी। इसके बाद इसी अभियान को क्षेत्रीय स्तर तक ले जाने की योजना बनी। पहले मेरठ और वाराणसी में दो-दो दिन के कार्यक्रम तय हुए थे। बाद में इन्हें घटाकर एक-एक दिन किया गया। अब दोनों कार्यक्रम फिलहाल स्थगित हैं। कार्यक्रम टालने की कोई आधिकारिक वजह आयोग ने नहीं बताई है।

CEC Gyanesh Kumar UP Visit Cancelled

ज्ञानेश कुमार का कार्यक्रम रद्द, डेढ़ करोड़ से ज्यादा खर्च की थी तैयारी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का आज मेरठ में बीएलओ और युवाओं के साथ प्रस्तावित संवाद कार्यक्रम रद्द हो गया। वाराणसी में भी ऐसा ही कार्यक्रम होना था। मेरठ कार्यक्रम की तैयारियों पर डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होना था।

सीसीएस विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज के सभागार में टेंटेज, ब्रांडिंग, ऑडियो-विजुअल, लाइटिंग और जनरेटर समेत दूसरी व्यवस्थाओं पर 114.75 लाख रुपये खर्च किए जाने थे। दोनों जगह भोजन की व्यवस्था पर 39.04 लाख रुपये का खर्च प्रस्तावित था।

आखिर चुनाव आयोग के अंदर चल क्या रहा है?

विवाद की जड़ चुनाव आयोग के काम करने के तरीके और कुछ फैसलों से जुड़ी बताई जा रही है। द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज की।

इनका संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मामलों से था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुछ फैसले दोनों आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए थे। यही दावा अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने इन खबरों के बाद अपना पक्ष रखा। उसने 14 आपत्तियों के अस्तित्व, तारीख या सामग्री को खारिज नहीं किया। लेकिन आयोग का कहना है कि इन्हें फैसले पर असहमति या अंदरूनी बगावत के तौर पर देखना सही नहीं है। आयोग ने कहा कि ऐसे सुझाव और सवाल सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और पिछले एक साल के सभी अंतिम फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं। यानी एक तरफ लिखित आपत्तियों का रिकॉर्ड सामने आया है। दूसरी तरफ आयोग कह रहा है कि अंतिम फैसलों में तीनों सदस्यों की सहमति थी। यही विरोधाभास इस पूरे विवाद को और चर्चा में ला रहा है।

विवाद बाहर आते ही इस्तीफे की मांग क्यों तेज हुई?

23 और 24 सितंबर की रिपोर्टों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई। विपक्षी दलों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए और उनके इस्तीफे की मांग की। कॉकरोच जनता पार्टी ने भी 48 घंटे में इस्तीफा देने की मांग रखी और ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि यूपी दौरा 21 सितंबर को ही स्थगित हो चुका था, जबकि चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों की खबर 23 सितंबर को सार्वजनिक हुई। कार्यक्रम रद्द करने की आधिकारिक वजह अभी सामने नहीं आई है। इसलिए दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध साबित करने से पहले आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार करना जरूरी है।