September 13, 2026

ईरान को मनाया, चीन से 'हां' कहलवाया.. BRICS घोषणा पत्र के एक-एक पॉइंट में भारत की कूटनीतिक जीत

इस घोषणापत्र में आतंकवाद, वैश्विक शासन, जैसे- UNSC और WTO में सुधार, मध्य-पूर्व संकट, संरक्षणवाद और वित्तीय सहयोग पर ब्रिक्स देशों ने अपना साझा और स्पष्ट रुख दर्ज कराया है।

12-13 सितंबर 2026 को भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन सभी सदस्य देशों की सहमति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' जारी किया गया। इस घोषणापत्र में आतंकवाद, वैश्विक शासन, जैसे- UNSC और WTO में सुधार, मध्य-पूर्व संकट, संरक्षणवाद और वित्तीय सहयोग पर ब्रिक्स देशों ने अपना साझा और स्पष्ट रुख दर्ज कराया है।

BRICS के नई दिल्ली घोषणा पत्र की मुख्य बातें

इसी के साथ भारत ने शनिवार को तब एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की, जब इस घोषणा पत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की गई और देश-समर्थित सीमा-पार आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का आह्वान किया।

पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा

घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (बैसरन घाटी) में हुए आतंकवादी हमले का साफ और सीधा जिक्र करते हुए इसकी "कड़े से कड़े शब्दों में" निंदा की गई। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। ब्रिक्स ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद की फंडिंग और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर जोर दिया।

यह भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। चीन और रूस जैसे देशों की मौजूदगी में घोषणापत्र में सीमा पार आतंकवाद और विशिष्ट आतंकी घटना का नाम शामिल होना यह दर्शाता है कि आतंकवाद के मुद्दे पर ब्रिक्स के भीतर "दोहरे मानदंडों" को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

नागरिक परमाणु ठिकानों पर हमलों पर चिंता

घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के पूर्ण सुरक्षा उपायों के तहत आने वाले शांतिपूर्ण न्यूक्लियर प्लांट और आम इंफ्रास्ट्रक्चर पर जानबूझकर किए जाने वाले हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया गया।

मध्य-पूर्व और पूर्वी यूरोप में बढ़ते तनावों के बीच यह बिंदु वैश्विक परमाणु सुरक्षा व्यवस्था को बचाने का संकेत देता है। ऊर्जा सुरक्षा पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए यह सप्लाई चेन की स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

UNSC सुधार और भारत-ब्राजील की दावेदारी का समर्थन

ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधि और प्रभावी बनाने के लिए इसमें व्यापक सुधार की मांग की। सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्यों- चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका और आकांक्षाओं के प्रति अपने समर्थन को दोहराया।

यह स्थायी सदस्यता के लिए भारत की लंबे समय की कोशिशों को रणनीतिक समर्थन प्रदान करता है। हालांकि, वास्तविक सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के स्तर पर व्यापक आम सहमति की आवश्यकता बनी रहेगी।

इसमें सबसे अहम यह है कि चीन हमेशा से ही UNSC में भारत की स्थीय सदस्यता देने की मांग विरोध करता आया है। ऐसे में भारत में ही चीन से इस घोषणा पत्र पर सहमति लेना एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

गाजा संकट: युद्धविराम और जबरन विस्थापन का विरोध

घोषणापत्र में गाजा में जारी हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बिना किसी बाधा के मानवीय सहायता पहुंचाने और स्थायी युद्धविराम बनाए रखने का आह्वान किया गया। ब्रिक्स ने फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन और गाजा की जनसांख्यिकी में किसी भी तरह के बदलाव का कड़ा विरोध किया।

यह रुख अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप है। मध्य-पूर्व में शांति और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों से सीधे जुड़ी है।

दो-राष्ट्र समाधान और फिलिस्तीन की UN सदस्यता

ब्रिक्स ने 1967 की सीमाओं के आधार पर (पूर्वी यरूशलेम को राजधानी मानते हुए) एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीन राज्य के निर्माण यानी 'दो-राष्ट्र समाधान' का समर्थन किया। साथ ही, फिलिस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता देने की मांग का समर्थन किया।

यह 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की लंबे समय से चली आ रही मांग के साथ तालमेल बिठाता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीन के पक्ष में दबाव बनाता है।

एकतरफा टैरिफ और ट्रेड बैरियर्स पर आपत्ति

घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं में हो रही बढ़ोतरी पर चिंता जताई गई और इन्हें विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के विपरीत और व्यापार को बाधित करने वाला बताया गया।

पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे नए व्यापारिक प्रतिबंधों के खिलाफ यह उभरते हुए बाजारों का साझा रुख है। यह निर्यात-संचालित अर्थव्यवस्थाओं को संरक्षणवाद से बचाने का सामूहिक प्रयास है।

एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध

ब्रिक्स ने बिना UNSC की मंजूरी के लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंधों और 'सेकेंडरी सैंक्शंस' की निंदा की। घोषणापत्र के अनुसार, ये प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और वैश्विक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

यह ब्रिक्स देशों खासकर रूस और ईरान की आर्थिक संप्रभुता को बनाए रखने और अपनी वित्तीय प्रणालियों को बाहरी पश्चिमी दबावों से सुरक्षित करने की रणनीति का हिस्सा है।

कार्बन बॉर्डर टैक्स (CBAM) का विरोध

यूरोपीय संघ के 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' (CBAM) जैसे ग्रीन-टैक्स उपायों का विरोध करते हुए ब्रिक्स ने इन्हें पर्यावरण के नाम पर गुप्त "संरक्षणवाद" करार दिया।

भारत और चीन जैसे विकासशील देशों के स्टील, एल्युमीनियम और सीमेंट निर्यात पर CBAM से भारी लागत बढ़ने का जोखिम है। ब्रिक्स की सामूहिक आवाज WTO और COP जलवायु वार्ताओं में इन नीतियों पर दोबारा विचार करने का दबाव बनाएगी।

WTO विवाद निपटान तंत्र और एपेलेट बॉडी की बहाली

ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में तत्काल सुधार करने और इसकी ठप पड़ी दो-स्तरीय अपीलीय संस्था में जजों की नई नियुक्तियां कर विवाद निपटान तंत्र को तुरंत बहाल करने की मांग की।

काम करने वाली अपीलीय निकाय के बिना वैश्विक व्यापार विवाद अनिश्चित काल के लिए लटक जाते हैं। नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था की बहाली भारत के व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स

सदस्य देशों ने आपस में व्यापार और निवेश के लिए अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं (जैसे रुपया, युआन, रूबल) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और पेमेंट सिस्टम के बीच इंटर कनेक्न विकसित करने पर सहमति जताई गई।

यह अमेरिकी डॉलर पर वैश्विक निर्भरता को कम करने और लेन-देन की लागत घटाने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है। इससे भारत के UPI और पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने में मदद मिलेगी।

गिफ्ट सिटी में BRICS रिस्क लैब और AI गवर्नेंस

गुजरात के 'GIFT City IFSC' में BRICS रिस्क लैब स्थापित करने के भारत के प्रस्ताव का सदस्यों ने स्वागत किया, जिसका उद्देश्य री-इंश्योरेंस और जोखिम मॉडल साझा करना है। इसके अलावा, AI शासन पर ब्रिक्स नेताओं के बयान को लागू करने और भारत की ओर से फरवरी 2026 में आयोजित 'AI इंपैक्ट समिट' की सराहना की गई।

GIFT City को एक वैश्विक वित्तीय और बीमा हब के रूप में विकसित करने के भारत के प्रयास को ब्रिक्स स्तर पर बड़ी स्वीकृति मिली है। वहीं, AI गवर्नेंस पर भारत को वैश्विक चर्चा के केंद्र में स्थापित करता है।

लेबनान से इजरायली सेना की वापसी और UNIFIL पर शोक

घोषणापत्र में लेबनान में युद्धविराम के उल्लंघनों की निंदा करते हुए इजराइल से लेबनानी क्षेत्र से अपनी सेना पूरी तरह हटाने का आह्वान किया गया। साथ ही, शांति मिशन (UNIFIL) में तैनात 4 इंडोनेशियाई सैनिकों समेत अन्य शांति सैनिकों की मृत्यु पर दुख व्यक्त किया गया और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई।

यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1701 के पालन और वैश्विक शांति अभियानों में तैनात सैनिकों की सुरक्षा के प्रति ब्रिक्स की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस (IBCA) का समर्थन

घोषणापत्र में भारत की ओर से शुरू किए गए 'इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस' (IBCA) का आधिकारिक समर्थन किया गया और बाघ, शेर, तेंदुए जैसी बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए ब्रिक्स देशों के बीच वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई।