BRICS का साझा घोषणापत्र जारी कर दिया गया है, नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर किसी देश ने आपत्ति नहीं जताई है और सभी प्रस्ताव स्वीकार कर लिए गए हैं. शिखर सम्मेलन के पहले दिन कई मुद्दों पर चर्चा हुई
1. नई दिल्ली में वर्ल्ड लीडर्स की मुलाकात
ब्रिक्स देशों के नेता 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मिले. भारत ने ‘लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) थीम के तहत इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें ग्रुप की सामूहिक ताकत, इनोवेशन और सतत विकास पर फोकस किया गया.
---विज्ञापन---
2. ब्रिक्स भावना को लेकर कमिटमेंट
नेताओं ने आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलेपन और आम सहमति को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने शांति, समावेशी विकास और अधिक संतुलित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देते हुए राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, और सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने का संकल्प लिया.
3. भागीदार देशों के लिए बड़ी भूमिका
ब्रिक्स नेताओं ने भागीदार देशों के अहम योगदान को मान्यता दी और उभरते बाजारों तथा विकासशील देशों के साथ मजबूत जुड़ाव को सपोर्ट किया. उन्होंने समावेशी, पारस्परिक रूप से फायदेमंद साझेदारी की जरूरत पर जोर दिया और भागीदार देशों को ब्रिक्स चर्चाओं और प्रैक्टिकल सहयोग में ज्यादा एक्टिव तौर से हिस्सा लेने के लिए एनकरेज किया.
---विज्ञापन---
4. भारत की आउटरीच इनिशिएटिव
नेताओं ने शिखर सम्मेलन के दौरान आउटरीच/ब्रिक्स प्लस डायलॉग की मेजबानी करने के लिए भारत की सराहना की. उन्होंने कहा कि इस पहल ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई गति दी और ब्रिक्स सदस्यों, भागीदार देशों और दूसरी विकासशील देशों के बीच एकजुटता को मजबूत किया.
5 भारत की अध्यक्षता में प्रोग्रेस
घोषणापत्र में 2026 में ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत के काम की सराहना की गई. नेताओं ने कहा कि इस वर्ष के एजेंडे ने सामान्य चुनौतियों के लिए प्रैक्टिकल, इंक्लूसिव और जन-केंद्रित समाधानों को बढ़ावा दिया, जिसमें क्षमता निर्माण, नवाचार, लचीलेपन और सतत विकास पर खास जोर दिया गया.
---विज्ञापन---
6. 400 से ज्यादा ब्रिक्स कार्यक्रम
भारत ने 30 शहरों में ब्रिक्स से जुड़े 400 से ज्यादा मीटिंग्स और कार्यक्रमों की मेजबानी की, जिनमें मंत्री, सांसद, अधिकारी, एक्सपर्ट्स, बिजनेसेज और नागरिक समाज के लोग शामिल हुए. नेताओं ने कहा कि इन गतिविधियों ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया और इनोवेशन, सस्टेनेबल डेवलपमेंट और पीपल टू पीपल एक्सचेंज को आगे बढ़ाया.
7. ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार
ब्रिक्स की 20वीं सालगिरह के मौके पर, नेताओं ने ज्यादा निष्पक्ष, अधिक प्रतिनिधि और जवाबदेह वैश्विक शासन प्रणाली के लिए अपनी मांग दोहराई. उन्होंने मजबूत बहुपक्षवाद और बहुध्रुवीयता, अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सम्मान, तथा ग्लोबल डिसीजन मेकिंग प्रॉसेस में उभरते बाजारों, विकासशील देशों और सबसे कम विकसित देशों की ज्यादा भागीदारी का समर्थन किया.
---विज्ञापन---
8. ‘ग्लोबल साउथ’ की मजबूत आवाज पर जोर
2023 के जोहान्सबर्ग-II लीडर्स डिक्लेरेशन को याद करते हुए, ब्रिक्स नेताओं ने सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार के लिए अपना समर्थन दोहराया. उन्होंने एक ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधि, प्रभावी और कुशल संयुक्त राष्ट्र की मांग की, जिसमें विकासशील देशों की अधिक भागीदारी हो. इस सुधार से ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज मजबूत होनी चाहिए और इसमें अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों की आकांक्षाएं झलकनी चाहिए. चीन और रूस ने भी संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में ब्राजील और भारत की बड़ी भूमिकाओं के लिए अपना समर्थन दोहराया.
9. संयुक्त राष्ट्र हो ज्यादा असरदार
ब्रिक्स नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र को उसके काम को असरदार ढंग से पूरा करने और ठोस नतीजे देने के लिए जरूरी समर्थन प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को फिर से सक्रिय करने और आर्थिक और सामाजिक परिषद को मजबूत करने के प्रयासों को जारी रखने की जरूरी पर जोर दिया. नेताओं ने पीसबिल्डिंग आर्किटेक्चर की 2025 की समीक्षा को लागू करने की दिशा में हुई प्रोग्रेस का भी स्वागत किया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बहुपक्षीय सहयोग के जरिए उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत और ज्यादा इफेक्टिव संयुक्त राष्ट्र संस्थान जरूरी हैं.
---विज्ञापन---
10. 2030 का अजेंडा
ब्रिक्स नेताओं ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए 2030 एजेंडा को आगे बढ़ाने और राष्ट्रीय नीतियों के हिसाब से संतुलित और एकीकृत तरीके से इसके जन-केंद्रित लक्ष्यों को प्राप्त करने की अपनी कमिटमेंट को दोहराया. उन्होंने गरीबी उन्मूलन, जिसमें अत्यधिक गरीबी को खत्म करना भी शामिल है, को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती और सतत विकास के लिए एक प्रमुख शर्त के रूप में पहचाना. नेताओं ने असमानता के मूल कारणों से निपटकर देशों के भीतर और देशों के बीच असमानता को दूर करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. साथ ही, उन्होंने ऐसे उपायों को प्राथमिकता देने पर बल दिया जो समावेशी, अभिनव, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और सतत विकास को बढ़ावा देते हों.
चीन में होगा अगला ब्रिक्स समिट
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स समिट को संबोधित करते हुए सदस्य देशों के ग्रुप से मिडिल ईस्ट के संघर्ष में शांति लाने की रोल अदा करने की गुजारिश की. सरकारी टीवी चैनल CCTV के मुताबिक, शी ने कहा कि चीन इस रोल में दूसरे ब्रिक्स सदस्यों के साथ मिलकर काम करेगा, क्योंकि ये जंग ‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के अनुरूप नहीं है’. उन्होंने कहा कि चीन अगले साल ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा और 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा.
---विज्ञापन---
Reuters reports, "Chinese President Xi Jinping urged the BRICS bloc to be a peacemaker in the Middle East conflict, in an address to a summit of member countries in New Delhi today. China will work with other BRICS members in that role, as the war "does not serve the common…
— ANI (@ANI) September 12, 2026