दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भारत पहुंच चुके हैं. 11 सितंबर को उन्होंने BRICS समिट में भी हिस्सा लिया. पेशे से कार्डियक सर्जन रहे पेजेशकियान की पहचान सिर्फ एक राजनेता के तौर पर नहीं है. डॉक्टर से ईरान के राष्ट्रपति तक पहुंचने के पीछे उनकी जिंदगी की एक ऐसी कहानी भी है, जिसमें मेडिकल की पढ़ाई, युद्ध के दौरान डॉक्टर की भूमिका, विश्वविद्यालय का नेतृत्व और एक बेहद दर्दनाक पारिवारिक त्रासदी शामिल है.
पेजेशकियान ने मेडिकल की पढ़ाई की, जनरल सर्जरी में विशेषज्ञता हासिल की और बाद में कार्डियक सर्जरी में सब-स्पेशलाइजेशन किया. लेकिन 1994 में उनकी जिंदगी में ऐसा हादसा हुआ जिसने उनके निजी जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया. एक सड़क दुर्घटना में उनकी पत्नी और उनके एक बच्चे की मौत हो गई. इसके बाद उन्होंने अपने बाकी बच्चों की परवरिश अकेले की.
29 सितंबर 1954 को हुआ जन्म, 19 साल की उम्र में शुरू की सैन्य सेवा
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मसूद पेजेशकियन का जन्म 29 सितंबर 1954 को महाबाद, ईरान में हुआ था. 1973 में उन्होंने अनिवार्य सैन्य सेवा शुरू की. इसी दौरान चिकित्सा के क्षेत्र में उनकी रुचि बढ़ी. सैन्य सेवा पूरी करने के बाद उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई शुरू की.
बाद में ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी उन्होंने डॉक्टर के तौर पर काम किया. वह युद्ध के मोर्चे पर मेडिकल टीमों से जुड़े रहे और घायलों के इलाज में भूमिका निभाई.
1985 में पूरी की मेडिकल की पढ़ाई
पेजेशकियान ने तबरीज़ यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज से मेडिकल शिक्षा हासिल की. उपलब्ध प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने 1985 में सामान्य चिकित्सा की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद मेडिकल कॉलेज में फिजियोलॉजी पढ़ाना शुरू किया.
जनरल सर्जरी से कार्डियक सर्जरी तक पहुंचा सफर
मेडिकल की पढ़ाई के बाद पेजेशकियान ने जनरल सर्जरी में विशेषज्ञता हासिल की. इसके बाद उन्होंने तेहरान स्थित ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज से कार्डियक सर्जरी में सब-स्पेशलाइजेशन किया. 1993 में उन्होंने कार्डियक सर्जरी में अपनी विशेषज्ञ योग्यता हासिल की. इसके बाद वे एक प्रशिक्षित हृदय शल्य चिकित्सक के तौर पर काम करने लगे.
यानी जिस व्यक्ति ने बाद में ईरान की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया, उसकी पेशेवर जिंदगी की शुरुआत मरीजों के दिल का ऑपरेशन करने से हुई थी.
1994 में यूनिवर्सिटी के प्रमुख बने
कार्डियक सर्जरी में विशेषज्ञता हासिल करने के अगले ही साल, 1994 में पेजेशकियान तबरीज यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्रमुख बने. उन्होंने करीब पांच साल तक इस पद पर काम किया.
यहां उनका काम सिर्फ मेडिकल प्रैक्टिस तक सीमित नहीं था. उन्हें विश्वविद्यालय के प्रशासन और मेडिकल शिक्षा से जुड़े बड़े फैसलों की जिम्मेदारी भी संभालनी थी. लेकिन इसी साल उनकी निजी जिंदगी में ऐसा हादसा हुआ, जिसने उनका पूरा जीवन बदल दिया.
1994 का हादसा, जिसमें पत्नी और बच्चे को खो दिया
1994 में एक सड़क दुर्घटना में पेजेशकियान की पत्नी और उनके एक बच्चे की मौत हो गई. उनकी पत्नी भी मेडिकल प्रोफेशन से जुड़ी थीं. यह घटना पेजेशकियान की जिंदगी का सबसे बड़ा व्यक्तिगत सदमा बनी.
हजारों मरीजों के दिल का इलाज करने वाले इस डॉक्टर की अपनी जिंदगी में ऐसा दर्द आया, जिसका इलाज किसी दवा या सर्जरी से संभव नहीं था. पत्नी की मौत के बाद पेजेशकियान ने दोबारा शादी नहीं की. उन्होंने अपने बाकी बच्चों की परवरिश खुद की.
उनकी बेटी जहरा बाद में सार्वजनिक जीवन में भी नजर आईं और अपने पिता के राजनीतिक अभियानों में उनके साथ दिखाई दीं. पेजेशकियान के निजी जीवन की यह कहानी उनकी सार्वजनिक छवि का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, यानी एक ऐसे पिता की कहानी, जिसने पत्नी को खोने के बाद सिंंगल फादर की तरह अपने बच्चों की जिम्मेदारी खुद संभाली.
डॉक्टर से राजनीति तक ऐसे पहुंची राह
पेजेशकियान की राजनीति में औपचारिक एंट्री 1990 के दशक के आखिर में हुई. वह 1997 में स्वास्थ्य मंत्रालय में डिप्टी हेल्थ मिनिस्टर बने. इसके बाद 2001 से 2005 तक ईरान के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री रहे. मेडिकल क्षेत्र का अनुभव उनके राजनीतिक करियर में भी दिखाई देता रहा. स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल शिक्षा से जुड़े मुद्दे उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे.
2008 से लगातार पांच बार सांसद
पेजेशकियान ने 2008 में पहली बार ईरान की संसद का चुनाव जीता. इसके बाद वह तबरीज का प्रतिनिधित्व करते हुए लगातार पांच बार सांसद चुने गए और 2024 तक संसद में रहे. बाद में वे संसद के फर्स्ट डिप्टी स्पीकर भी बने. यानी डॉक्टर के तौर पर शुरू हुआ उनका करियर धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंच चुका था.
2024 में बने ईरान के राष्ट्रपति
2024 में इब्राहिम रईसी की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद ईरान में राष्ट्रपति चुनाव हुए. मसूद पेजेशकियन ने जुलाई 2024 के चुनाव में कट्टरपंथी उम्मीदवार सईद जलीली को हराया और ईरान के राष्ट्रपति बने. उन्होंने 28 जुलाई 2024 को पद संभाला. आज वह ईरान के नौवें राष्ट्रपति हैं और 2026 में भारत की मेजबानी में हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंचे हैं.
मसूद पेजेशकियन की जिंदगी में मेडिकल और राजनीति दो अलग-अलग रास्ते नहीं रहे. एक डॉक्टर के तौर पर उन्होंने मरीजों के दिल का इलाज किया, मेडिकल छात्रों को पढ़ाया और विश्वविद्यालय का प्रशासन संभाला. बाद में यही अनुभव उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय और फिर संसद तक ले गया.
आज जब वह BRICS के मंच पर दुनिया के बड़े नेताओं के साथ बैठकर ईरान की बात कर रहे हैं, तो उनके पीछे सिर्फ सत्ता और राजनीति का सफर नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा, सर्जरी, युद्ध के दौरान डॉक्टर की भूमिका, विश्वविद्यालय प्रशासन और एक बेहद कठिन निजी त्रासदी से गुजरकर शीर्ष पद तक पहुंचने की कहानी भी है.
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