September 15, 2026

Brahmasthan in House: घर में किस जगह होता है ब्रह्मस्थान और ये क्या है? जानें यहां कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए

Brahmasthan in House: घर में किस जगह होता है ब्रह्मस्थान और ये क्या है? जानें यहां कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए

ब्रह्मस्थान क्या होता है?Image Credit source: pexels

Vastu Tips For Home: वास्तु शास्त्र में घर की बनावट को सिर्फ कमरों और दिशाओं के आधार पर नहीं देखा जाता, बल्कि घर के केंद्र को भी खास महत्व दिया जाता है. इसी हिस्से को ब्रह्मस्थान कहा जाता है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार यह घर का वह स्थान है जहां अलग-अलग दिशाओं से आने वाली ऊर्जा का मिलन होता है. ब्रह्मस्थान को सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि घर के इस हिस्से को खुला, साफ और हल्का रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बेहतर बना रहता है. यही वजह है कि वास्तु में घर के मध्य भाग को लेकर कुछ खास सावधानियां बताई गई हैं. आइए जानते हैं.

घर में ब्रह्मस्थान कहां होता है?

किसी भी घर या भवन के बिल्कुल बीच का हिस्सा ब्रह्म स्थान कहलाता है. इसे समझने का आसान तरीका यह है कि घर को चारों दिशाओं से बराबर हिस्सों में बांटकर उसके बीच का भाग देखा जाए. तो ये केंद्रीय हिस्सा ही ब्रह्मस्थान माना जाता है.

ब्रह्मस्थान में भारी सामान रखने से क्यों मना किया जाता है?

वास्तु मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मस्थान को हल्का और खुला रखना शुभ माना जाता है. इसलिए यहां भारी अलमारी, बड़ी मशीन, स्टोर का सामान या बहुत ज्यादा वजन रखने से बचने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इस हिस्से में भारी वस्तुएं रखने से घर की ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है.

यहां पिलर या खंभा होना क्यों माना जाता है दोष?

वास्तु के अनुसार ब्रह्मस्थान में पिलर, खंभा या कोई बड़ा स्थायी निर्माण होने से बचना चाहिए. इसका कारण यह माना जाता है कि घर के केंद्र में किसी तरह की रुकावट होने से ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो सकता है.

ब्रह्मस्थान में सीढ़ियां बनाना क्यों नहीं माना जाता शुभ?

वास्तु शास्त्र में घर के केंद्र में सीढ़ियां बनाने से भी बचने की सलाह दी जाती है. सीढ़ियां एक स्थायी और भारी संरचना होती हैं, इसलिए इन्हें ब्रह्मस्थान के लिए सही नहीं माना गया है. मान्यता के अनुसार, इससे घर के केंद्रीय हिस्से की ऊर्जा प्रभावित हो सकती है.

ब्रह्मस्थान में टॉयलेट बनाना क्यों मना किया जाता है?

वास्तु मान्यताओं में ब्रह्मस्थान में टॉयलेट को भी उचित नहीं माना जाता. इसका कारण यह बताया जाता है कि टॉयलेट से जुड़ी गतिविधियों को घर के इस पवित्र केंद्रीय स्थान के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. इसी वजह से घर का नक्शा बनाते समय ब्रह्मस्थान में टॉयलेट बनाने से बचने की सलाह दी जाती है.

क्या ब्रह्मस्थान में रसोई भी नहीं होनी चाहिए?

वास्तु के अनुसार घर के केंद्र में रसोई बनाने से भी बचने की सलाह दी जाती है. रसोई में अग्नि तत्व प्रमुख माना जाता है, जबकि ब्रह्मस्थान को घर का केंद्रीय और संतुलन वाला क्षेत्र माना जाता है. इसी आधार पर वास्तु में रसोई के लिए घर की अन्य दिशाओं को अधिक सही माना जाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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