'भाग जाओ यहां से, वरना इसी जमीन में गाड़ देंगे! जमीन चाहिए तो BOSS को रंगदारी देनी होगी।'
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यह क्राइम थ्रिलर फिल्म का डायलॉग नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर की सड़कों पर हुआ नंगा नाच है। और इस पूरे खौफनाक सिंडिकेट के मास्टरमाइंड आरोपी सत्ताधारी लोजपा (रामविलास) के बेलसंड से विधायक अमित कुमार रानू और उनके भू-माफिया भाई सोनू सिंह हैं।
संडे बिग स्टोरी में पढ़िए, कैसे एक पूर्व कांस्टेबल का पोता उत्तर बिहार का बड़ा 'जमीन माफिया' बना और फिर विधायक…।
अमित कुमार रानू का परिवार मूल रूप से पूर्वी चम्पारण के सुगौली का रहने वाला है। दादा बिहार पुलिस में कांस्टेबल थे। लंबे वक्त तक उनकी पोस्टिंग मुजफ्फरपुर में रही। इसलिए वहीं जमीन ली। घर बनाया और बस गए।
ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, 1992 में जन्मे अमित कुमार ने मुजफ्फरपुर के एलएस कॉलेज से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की है। रानू 2.43 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति के मालिक हैं।
सौरभ के जरिए चिराग के बने खास
सूत्र बताते हैं, ‘लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में टूट से पहले बतौर कार्यकर्ता अमित कुमार रानू जुड़े थे। चिराग पासवान के खास सौरभ पांडेय से नजदीकी बढ़ाई। और उसी चैनल से चिराग के खास बन गए। 2019 में लोजपा IT सेल के मुजफ्फरपुर के जिलाध्यक्ष बने। 2020 में IT सेल के प्रदेश उपाध्यक्ष बन गए और 2022 में IT सेल के प्रदेश अध्यक्ष बन गए। 3 साल से भी अधिक वक्त तक इस पद पर बने रहे।
पहली बार टिकट मिला और विधायक बन गए
अमित की राजनीतिक महत्वकांक्षा बड़ी थी। उसकी तैयारी विधानसभा चुनाव लड़ने की थी, जिसमें वो सफल भी रहे। पार्टी से जुड़े सूत्र के मुताबिक, 2025 विधानसभा चुनाव में सीतामढ़ी के बेलसंड विधानसभा सीट से टिकट पाने के लिए रानू ने खूब पैसा खर्च किया। पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े और विधायक बन गए।

पार्टी में आने के एक साल बाद ही चिराग पासवान के खास हो गए अमित कुमार रानू। (फाइल फोटो)
गैंगस्टर संतोष झा से भी रानू का सीधा कनेक्शन
राजनीतिक कैरियर शुरू करने से पहले अमित कुमार रानू का क्राइम की दुनिया में बड़ा कनेक्शन था। इस बात की तस्दीक सीतामढ़ी के रूनीसैदपुर थाना में दर्ज FIR नंबर 178/12 करती है।
दरअसल, उस वक्त उत्तर बिहार में गैंगस्टर संतोष झा का बोलबाला था। मुजफ्फरपुर पुलिस की मानें तो अमित का कनेक्शन संतोष झा से था। उस गैंग के लिए काम कर चुके हैं।
2012 में इनके ऊपर रूनीसैदपुर थाना में साजिश के तहत रंगदारी वसूलने, जबरन वसूली, चोरी का सामान रखने की धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था।
विधायक का बड़ा भाई चलाता है गैंग
विधायक के बड़े भाई का नाम सोनू सिंह उर्फ अभिनव है। वह बड़ा भू-माफिया है। इसने खुद का एक बड़ा गैंग बना रखा है। वह सामने से गैंग को ऑपरेट करता है। मगर, पुलिस की मानें तो पर्दे के पीछे से पूरा कंट्रोल विधायक का है।
गैंग में 50 से अधिक गुर्गे हैं। मुजफ्फरपुर के अंदर गैंग ने अपना दबदबा बना रखा है। पुलिस का दावा है कि यह गैंग अंतर जिला काम करता है। सीतामढ़ी के साथ-साथ आसपास के कई जिलों में गैंग ने अपना वर्चस्व कायम कर रखा है। अब तक की जांच और कई लोगों के बयान में स्पष्ट हुआ है कि विधायक को इस गैंग के गुर्गे BOSS कहकर बुलाते हैं।
विधायक के भाई के गैंग का मुख्य काम
- दूसरों की जमीन पर जबरन कब्जा करना।
- बगैर पेमेंट के और नशा के इंफ्लूयेंश में जमीन थर्ड पार्टी के नाम कराकर अपने नाम करवाना।
- फर्जी पेपर के आधार पर दूसरे की जमीन पर कब्जा जमाना।
- लोन के नाम पर गुंडा बैंक चलाना।

लोजपा (रामविलास) सांसद राजेश वर्मा के साथ विधायक अमित कुमार रानू।
4 केसेज से समझिए, गैंग कैसे काम करता है
केस-1ः जबरन जमाया कब्जा
प्रहलाद कुमार मुजफ्फरपुर में औराई थाना के तहत बेनुपर के रहने वाले हैं। अपनी पत्नी अनामिका के नाम पर इन्होंने अहियापुर थाना के तहत झपहा में 800 स्क्वायर फीट जमीन खरीदी थी। 2025 में रजिस्ट्री कराई। बोचहा अंचल से दाखिल-खारिज भी कराया। फिर बाउंड्री बनाकर जमीन को घेर भी लिया।
- अचानक 20 अगस्त 2026 को 50 से अधिक लोग इनकी जमीन पर पहुंच गए। इसमें एक स्कॉर्पियो पर लोजपा रामविलास का झंडा और प्रदेश महासचिव का बोर्ड भी लगा था। जबकि, एक बाइक से सुमित श्रीवास्तव नाम का शख्स भी आया था। ये लोग JCB लेकर पहुंचे थे। दिन के 11 बजे के करीब का वक्त रहा होगा।
- प्रदीप की जमीन की बाउंड्री के साथ ही आसपास बने दूसरे लोगों के घर में तोड़फोड़ करने लगे। इसकी सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद प्रदीप पहुंचे। तब तक इनकी जमीन की बाउंड्री को पूरी तरह से तोड़ा दिया गया था और बगल में प्रेमचंद मिश्र के घर को तोड़ा जा रहा था। जब प्रदीप और प्रेमचंद ने विरोध किया तो सुमित ने धमकाया।
- कहा- 'भाग जाओ यहां से। नहीं तो इसी जमीन पर JCB से गड्ढ़ा खोदकर गाड़ देंगे। जमीन अगर चाहिए तो हमारे BOSS को पैसा देना होगा। तभी यहां रह पाओगे।' विधायक की नाम सामने न आए, इसलिए उस वक्त सुमित ने कहा- BOSS का नाम सोनू सिंह है।
इसका मोबाइल नंबर दिया और कहा- बात करके आना। इसके बाद ही यह मामला पुलिस के पास पहुंचा और फिर अहियापुर थाना में 20 अगस्त को ही FIR नंबर 1323/26 दर्ज हुआ।
केस-2ः रुपए दिए बगैर गुर्गों के जरिए विधायक ने ली जमीन
आशा देवी मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुर कष्णा टोली की रहने वाली हैं। 13 फरवरी 2026 को इनके पति रंजीत कुमार का निधन हो चुका है। आशा देवी ने बताया, ‘26 अगस्त 2022 को अहियापुर के राहुल कुमार, मीनापुर के उज्जवल कुमार पांडेय, न्यू पुलिस लाइन बैकुंठपुरी के कार्तिक कुमार, बैरिया बैंकुंठपुरी के सोनू कुमार और अमित कुमार रानू ने धोखाधड़ी कर पैगम्बरपुर कोल्हुआ की 7 डिसमील जमीन हथिया ली। इसके लिए जाली केवाला बनाया।
- साथ ही यह दिखाया कि SBI के चेक नंबर 256323 के जरिए 35 लाख रुपए रंजीत कुमार को मिल चुका है। पति जब जीवित थे तो उन्होंने एक नोटिस राहुल, उज्जवल और कार्तिक को भेजा था। मगर, आज तक इसका कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद सोनू कुमार ने बैरिया में मेरे 6 कमरों के घर में तोड़फोड़ भी की थी।’
- आशा देवी के मुताबिक, उनके पति बीमार थे। रुपए के आभाव में सही से इलाज नहीं हो सका और उनकी मौत हो गई। इसके बाद इनकी जमीन पर इन लोगों ने कब्जा कर लिया। इस पूरे प्रकरण में विधायक शामिल है। साजिश के तहत इस जमीन को अमित कुमार रानू ने खुद के और राहुल, उज्जवल व कार्तिक के नाम करा लिया है। इस मामले में ब्रह्मपुर थाना में पुलिस ने विधायक सभी लोगों को नामजद करते हुए 28 अगस्त को FIR नंबर 259/26 दर्ज किया है।

मुजफ्फरपुर पुलिस ने विधायक के आवास पर छापेमारी की तो कई राज खुले।
केस-3ः रिटायर्ड अवर सचिव की जमीन कराई भाई और गुर्गों के नाम
विजय कुमार भारत सरकार में साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में अवर सचिव पद से रिटायर्ड हुए हैं। दिव्यांग हैं और अहियापुर में शहबाजपुर के मूल निवासी हैं।
70 डिसमील की इनकी खतियानी जमीन, जो पिता जितेंद्र प्रसाद शाही और दादा योगेंद्र प्रसाद शाही के नाम पर थी। उसका फर्जी केवाला बनाकर वैशाली के सलेमपुर किशुनदार कोर्ट हाजीपुर इलाके के रहने वाले कृष्णनंदन पासवान ने पहले अपने नाम रजिस्ट्री करा ली।
फिर इस जमीन को उसने विधायक अमित कुमार रानू के भाई सोनू सिंह उर्फ अभिनव, अरविंद कुमार मेहता और तुषार सिंह के नाम ट्रांसफर दिया। इन लोगों ने रजिस्ट्री करा दी। इस बात का पता इन्हें इसी साल जनवरी में हुआ। तब अपने स्तर से पड़ताल की।
इसमें मुसहरी अंचल के सीओ और वहां के सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई। इसके बाद मुजफ्फरपुर DM के पास शिकायत की। DM ने भी जांच कराई। इसमें विधायक और उसके भाई के सिंडिकेट का पूरा खेल सामने आया। इस मामले में अहियापुर थाना में पुलिस ने 29 अगस्त को FIR नंबर 1375/26 दर्ज किया है।
केस-4ः 10 लाख का 6 महीने में 16 लाख लिया
अपने सिंडिकेट और गैंग के जरिए विधायक और उसका भाई मिलकर गुंडा बैंक चलाते हैं। पुलिस के मुताबिक, 10 लाख रुपया किसी को कर्ज दिया तो उसके बदले 6 महीने में जबरन 16 लाख रुपए की वसूली की। इस बात के सबूत मुजफ्फरपुर पुलिस को अपनी जांच और अहियापुर में विधायक के ठिकाने पर की गई छापेमारी में मिले।
पुलिस के हाथ ऐसे कई कागजात लगे जो गुंडा बैंक की बात को पुख्ता करती हैं। साथ ही 2017 के सिग्नेचर किए हुए कई ब्लैंक स्टाम्प पेपर और जमीन के पार्टनरशिप का एग्रीमेंट पेपर जब्त किया। इस मामले में पुलिस ने अहियापुर थाना में अलग से FIR नंबर 1362/26 दर्ज किया है।
बेलसंड ऑफिस में मिला अवैध हथियार
बेलसंड में विधायक अमित कुमार रानू ने पार्टी के नाम से अपने लिए एक ऑफिस बनाया है। वहां हर वक्त इनके गुर्गे रहते हैं। जो अवैध हथियार से लैश होते हैं। 23 अगस्त को मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना की पुलिस बेलसंड थाना गई।
- फिर वहां से दोनों थाना की टीम ने मिलकर विधायक के पार्टी ऑफिस में छापेमारी की। वहां पर नन्हें सिंह उर्फ नवीन सिंह और छोटू कुमार उर्फ छोटू यादव मिले। पुलिस ने इन्हें पकड़ा। तलाशी के क्रम में नन्हें के पास से एक पिस्टल बरामद हुआ।
- जिसकी मैगजिन में 5 गोली लोड थी। फिर ऑफिस को खंगाला तो शौचालय में सीट के पास एक लोडेड मैगजीन मिली, जिसमें 4 गोली लोड थी। वहां से कुल एक पिस्टल, दो मगजीन और 9 गोली पुलिस ने बरामद की। दोनों गुर्गों को गिरफ्तार किया।
काली कमाई से बनाई करोड़ों की बेनामी संपत्ति
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विधायक और उसके भाई ने काली कमाई के जरिए करोड़ों रुपए की संपत्ति का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया है। यह सब कुछ कब से चल रहा था? कैसे शुरुआत हुई? गैंग का नेटवर्क कहां तक फैला है? इन पॉइंट्स पर जांच चल रही है।
ठोस तरीके से कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। यही वजह है कि एक-एक कर पीड़ित लोग भी सामने आ रहे हैं और विधायक, उसके भाई व गैंग के शामिल लोगों के खिलाफ FIR करवा रहे हैं। 20 अगस्त से शुरू हुए इस पूरे प्रकरण में अब तक कुल 27 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें 10 केस में विधायक अमित कुमार रानू भी नामजद हैं।

पुलिस ने विधायक के कार्यालय से हथियार जब्त की है।
15 गुर्गों की हो चुकी है पहचान, सोनू सिंह समेत 8 फरार
गैंग में 50 से अधिक गुर्गे हैं। पर पुलिस अब तक सिर्फ 15 की ही पहचान कर पाई है। इसमें विधायक के भाई सोनू सिंह उर्फ अभिनव समेत 8 अब भी फरार चल रहे हैं। जबकि, 7 गुर्गों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।
- नन्हें सिंह उर्फ नवीन सिंह
- छोटू कुमार उर्फ छोटू यादव
- सुमित कुमार श्रीवास्तव
- सन्नी सिंह
- आनंद कुमार
- विकास राठौड़
- सुबोध राय (JCB का मालिक)
विधायक से पूछताछ की तैयारी में पुलिस
विधायक अमित कुमार रानू पर शिकंजा कसने के लिए मुजफ्फरपुर पुलिस एक-एक करके कदम उठा रही है। पूरी कानूनी प्रक्रिया को अपना रही है। इसके बाद विधायक जिन केसों में नामजद हैं, उनमें पूछताछ के लिए उन्हें बुला सकती है। साथ ही MP-MLA कोर्ट से विधायक के खिलाफ वारंट हासिल करने में भी जुटी है।
EOU की होगी एंट्री
विधायक और उसके भाई के काले कारनामों की लिस्ट लंबी है। इनके संगठीत गिरोह का जाल सिर्फ मुजफ्फरपुर ही नही, बल्कि कई जिलों में फैला है। ऐसे में मुजफ्फरपुर पुलिस एक दायरे तक ही जांच कर सकती है। इस समस्या से निपटने का रास्ता भी निकाल लिया है।

इस मामले में आने वाले दिनों में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की एंट्री हो सकती है। दरअसल, विधायक और उसके भाई के पूरे सिंडिकेट को खत्म करने के लिए मुजफ्फरपुर पुलिस ने एक रिपोर्ट EOU को भेजी है। आगे की जांच और कार्रवाई को लेकर EOU ने अपनी सहमती दे दी तो फिर यह एक बड़ा कदम साबित होगा।