September 23, 2026

Bombay High Court का सख्त आदेश: सड़कों पर पटाखे, तेज लाउडस्पीकर और लेजर पर कड़ी रोक - Haribhoomi

गणेश उत्सव से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने पटाखों, तेज लाउडस्पीकर, DJ और लेजर लाइट के इस्तेमाल पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि त्योहारों का आयोजन आम लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शांति और पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

Bombay High Court

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में आदेश दिया कि मुंबई जैसे घने और व्यस्त शहर में सार्वजनिक सड़कों पर दिन हो या रात, किसी भी परिस्थिति में पटाखे फोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

  • Published: 23 Sep 2026, 12:58 PM IST
  • Last Updated: 23 Sep 2026, 05:40 PM IST

महाराष्ट्र में गणेश उत्सव और आगामी त्योहारों के सीजन के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने बढ़ते प्रदूषण और शोर-शराबे को लेकर एक बेहद अहम और सख्त फैसला सुनाया है। त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सड़कों पर आतिशबाजी, तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर, डीजे और आंखों को नुकसान पहुंचाने वाली लेजर लाइटों के बेलगाम इस्तेमाल पर अदालत ने कड़ा ऐतराज जताया है।

जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि उत्सव मनाने के नाम पर आम लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण की बलि नहीं दी जा सकती।

सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह रोक
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में आदेश दिया कि मुंबई जैसे घने और व्यस्त शहर में सार्वजनिक सड़कों पर दिन हो या रात, किसी भी परिस्थिति में पटाखे फोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर आतिशबाजी न केवल आम राहगीरों और यातायात के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, बल्कि इससे शहर में दमघोंटू प्रदूषण और जहरीली धुंध फैलती है।

'क्या शोर मचाने से मिलेगा भगवान का अतिरिक्त आशीर्वाद?'
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने आयोजकों के रवैये पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, "क्या इन सभी लाउडस्पीकरों और पटाखों का उपयोग करने से हमें भगवान का अतिरिक्त आशीर्वाद मिल जाएगा? एक जिम्मेदार समाज के रूप में हमें यह सब बंद करना चाहिए।" अदालत ने पंढरपुर की प्रसिद्ध 'वारी' यात्रा की मिसाल देते हुए कहा कि वह अनुशासित आयोजन बिना किसी लाउडस्पीकर या शोर-शराबे के बेहद शांति से निकाला जाता है, जिससे सीख लेनी चाहिए।

'कागजी आदेशों से काम नहीं चलेगा, जमा कराएं भारी सुरक्षा राशि'
सुनवाई के दौरान जब राज्य सरकार ने बताया कि पुलिस ने पहले से ही प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं, तो अदालत ने इस पर असंतोष जताया। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे आदेश सिर्फ फाइलों में ही अच्छे लगते हैं, जबकि हकीकत में नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन होता है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि पंडालों या जुलूसों की इजाजत देते समय सरकार को आयोजकों से भारी सुरक्षा राशि जमा करानी चाहिए।

नियम तोड़ने पर सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त, जनसुरक्षा सर्वोपरि
अदालत ने सख्त हिदायत दी कि यदि कोई भी समिति या आयोजक ध्वनि और वायु प्रदूषण के तय मानकों का उल्लंघन करता है, तो उसकी जमा सुरक्षा राशि को तुरंत जब्त कर लिया जाए। इससे नियम तोड़ने वालों में कानून का खौफ पैदा होगा। खंडपीठ ने यह साफ किया कि अदालत किसी भी त्योहार के खिलाफ नहीं है, लेकिन किसी भी उत्सव को आम नागरिकों की सेहत, शांति और सुरक्षा की कीमत पर मनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।