September 29, 2026

Bollywood का बदलता स्टारडम: पहले सुपरस्टार के पोस्टर बिकते थे, अब Instagram Followers क्यों मायने रखते हैं?

Time Published: Tuesday, September 29, 2026, 17:31 [IST]

Bollywood Stardom: बॉलीवुड में 'स्टार' होना कभी सिर्फ एक नाम नहीं था, ये एक ऐसा जुनून था जिसे सिनेमा हॉल के बाहर लगी लंबी कतारों, दुकानों पर बिकने वाले पोस्टरों, फिल्मी मैगजीन के कवर और फैन क्लबों की दीवानगी से मापा जाता था। किसी एक्टर की फिल्म देखने के लिए टिकट मिलना मुश्किल हो जाए, उसके पोस्टर घर की दीवारों पर लगने लगें और उसके नाम पर चिट्ठियों के ढेर पहुंचने लगें, तो समझा जाता था कि वह 'स्टार' बन चुका है लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है।

बॉलीवुड में स्टारडम का सफर पोस्टर से प्रोफाइल तक पहुंच चुका है
अब किसी स्टार की पॉपुलैरिटी का एक बड़ा हिस्सा उसके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स, यूट्यूब व्यूज, सोशल मीडिया एंगेजमेंट, ब्रांड कोलेब्रेशन, डिजीटल प्रेजेंस और ओटीटी ऑडियंस से दिखाई देता है। अब स्टार की ताकत सिर्फ ये नहीं कि उसकी फिल्म पहले दिन कितने करोड़ कमाती है बल्कि ये भी है कि वह एक पोस्ट डालकर कितने लोगों तक पहुंच सकता है यानी बॉलीवुड में स्टारडम का सफर पोस्टर से प्रोफाइल तक पहुंच चुका है और इस बदलाव को समझने के लिए हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार राजेश खन्ना से शुरुआत करनी होगी।

Bollywood Stardom

राजेश खन्ना: जब स्टारडम का मतलब था दीवानगी

-1960 के दशक के आखिर और 1970 के शुरुआती सालों में राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) ने हिंदी सिनेमा में स्टारडम की परिभाषा ही बदल दी थी। 'आराधना' मूवी की सफलता के बाद उनके प्रति जो उत्साह पैदा हुआ था, वह सिर्फ फिल्मों की पॉपुलैरिटी नहीं थी, वह एक फैन कल्चर था।

-1969 से 1974 के बीच राजेश खन्ना का दौर ऐसा था कि उनकी तस्वीरें, फिल्मी पोस्टर और मैगजीन कवर खुद एक तरह की वस्तु बन गए थे। उनके फैंस की दीवानगी के कई किस्से आज भी बॉलीवुड की लोककथाओं का हिस्सा हैं। Google Arts & Culture पर Shemaroo के संग्रह के अनुसार उन्होंने लगातार 15 हिट फिल्में दी थीं और उनकी महिला फैंस उनके लिए खून से लेटर लिखने और उनकी तस्वीरों से शादी करने जैसे कदम तक उठाती थीं।

-उस समय इंस्टाग्राम नहीं था, यूट्यूब नहीं था और किसी स्टार के पास अपने फैंस तक सीधे पहुंचने का कोई रास्ता नहीं था। फिर भी राजेश खन्ना करोड़ों लोगों की कल्पना का हिस्सा थे। यही उस दौर के स्टारडम की खासियत थी। स्टार तक पहुंचना मुश्किल था और शायद इसी दूरी ने उनके आकर्षण को और बड़ा बनाया।

अमिताभ बच्चन: पोस्टर से 'एंग्री यंग मैन' तक

-फिर आया 1970 का दशक और बॉलीवुड के स्टारडम की दिशा बदल गई। राजेश खन्ना के रोमांटिक सुपरस्टार वाले दौर के बीच अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने 'जंजीर' मूवी के साथ एक बिल्कुल अलग तरह के हीरो को पॉपुलर बनाया। 'एंग्री यंग मैन' सिर्फ एक किरदार नहीं रहा बल्कि उस दौर के सामाजिक गुस्से और युवा बेचैनी का सिनेमाई चेहरा बन गया।

-अब स्टारडम सिर्फ चेहरे की खूबसूरती या रोमांटिक अपील से तय नहीं हो रहा था। एक्टर की आवाज, डायलॉग, स्क्रीन प्रेजेंस और किरदार भी उसकी पहचान का हिस्सा बनने लगे। अमिताभ बच्चन का पोस्टर कमरे में लगाना एक बात थी लेकिन उनकी आवाज और डायलॉग लोगों की रोजमर्रा की भाषा का हिस्सा बन जाना कहीं बड़ा प्रभाव था।

-यही वजह है कि अमिताभ बच्चन का स्टारडम कई दशकों तक चलता रहा और उनकी सबसे बड़ी खूबी शायद ये रही कि उन्होंने समय के साथ खुद को बदला। साल 2000 में 'कौन बनेगा करोड़पति' (Kaun Banega Crorepati) के साथ जब वह टेलीविजन पर पहुंचे, तब इसे लेकर सवाल उठे थे कि क्या एक बड़ा फिल्म स्टार छोटे पर्दे पर जाना स्वीकार करेगा लेकिन KBC ने उनकी लोकप्रियता को खत्म करने के बजाय उन्हें एक नई पीढ़ी तक पहुंचा दिया।

-इस रिएलिटी शो ने उन्हें करोड़ों घरों के लिविंग रूम में पहुंचाया। साल 2025 में KBC के 25 साल पूरे हुए और अमिताभ बच्चन अब भी शो से जुड़े हुए हैं यानी उनका स्टारडम सिर्फ थिएटर पर निर्भर नहीं रहा। यहीं से एक अहम बदलाव शुरू हुआ, स्टार की पहुंच अब सिर्फ फिल्म देखने वाले दर्शकों तक सीमित नहीं रही।

शाहरुख खान: जब फैन क्लब स्टार की सबसे बड़ी ताकत बने

-1990 के दशक में शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) का उदय हुआ। उनके सामने न राजेश खन्ना वाला पोस्टर युग था और न अमिताभ बच्चन वाला एकतरफा सुपरस्टार मॉडल। शाहरुख खान के समय में सैटेलाइट टीवी तेजी से बढ़ रहा था। फिल्मी गाने टीवी पर दिखते थे, फिल्मी मैगजीन की पहुंच बढ़ चुकी थी और स्टार की छवि घर-घर पहुंच रही थी।

-'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'दिल से', 'कुछ कुछ होता है', 'कभी खुशी कभी गम' जैसी फिल्मों ने शाहरुख खान को सिर्फ एक एक्टर नहीं बल्कि एक Global Bollywood Icon में बदल दिया लेकिन शाहरुख खान के स्टारडम की एक खास बात थी, उनके फैंस ने खुद को संगठित करना शुरू किया।

-फैन क्लब उनके लिए फिल्म प्रमोशन का माध्यम बनने लगे। साल 2023 में 'पठान' की रिलीज के दौरान इंडियन एक्प्रेस ने शाहरुख खान के फैन क्लब कल्चर पर विस्तार से रिपोर्ट की थी। फिल्म की रिलीज से पहले और बाद में फैन क्लबों ने थिएटर बुकिंग, सेलिब्रेशन और सोशल मीडिया प्रमोशन में बड़ी भूमिका निभाई। ऐसे में अब स्टार और फैन के बीच सिर्फ एकतरफा रिश्ता नहीं था। फैंस खुद स्टार की डिजिटल और ऑफलाइन विजिबिलिटी का हिस्सा बनने लगे थे।

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सलमान खान: स्टारडम का मतलब 'फिल्म' से ज्यादा 'ब्रांड' होना

-सलमान खान (Salman Khan) ने स्टारडम का एक और मॉडल बनाया। उनकी फिल्मों की सफलता अहम रही लेकिन धीरे-धीरे सलमान खान की पहचान फिल्म से बड़ी हो गई। उनका नाम टीवी शो, विज्ञापन, ब्रांड, ईद रिलीज, फैन क्लब और सोशल मीडिया पर एक साथ दिखाई देने लगा।

-'बिग बॉस' ने इस स्टारडम को एक और आयाम दिया। यहां सलमान खान हर सप्ताह दर्शकों से सीधे बात करते थे। वह किसी फिल्म के प्रमोशन के लिए कुछ मिनट के इंटरव्यू में नहीं आते थे बल्कि महीनों तक घर-घर पहुंचते थे।

-इस मॉडल ने एक अहम बात साबित की, स्टारडम बनाए रखने के लिए हर साल कई फिल्में करना जरूरी नहीं है। अगर स्टार लगातार दर्शकों की नजरों में मौजूद है तो उसकी पॉपुलैरिटी दूसरे माध्यमों से भी कायम रह सकती है।

रणबीर कपूर और रणवीर सिंह: स्टारडम का नया विरोधाभास

-फिर 2000 के दशक के अंत और 2010 के दशक में रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) और रणवीर सिंह (Ranveer Singh) जैसी नई पीढ़ी सामने आई। रणबीर कपूर की स्टार इमेज उनकी फिल्मों के किरदारों, अभिनय और उनकी निजी जिंदगी को लेकर लोगों की दिलचस्पी से बनी। वहीं रणवीर सिंह ने अपनी पर्सनैलिटी को भी अपनी ब्रांड आइडेंडिटी का हिस्सा बना दिया। रणवीर सिंह के कपड़े, उनके इंटरव्यू, सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक अपीरिएंस खुद खबर बनने लगे।

-स्टार अब सिर्फ पर्दे पर नहीं रहता, वह 24 घंटे चलने वाली मीडिया इकोनॉमी का हिस्सा बन जाता है लेकिन यहां एक दिलचस्प बात है आज के दौर में सिर्फ पॉपुलर होना काफी नहीं है, स्टार को लगातार रेलेवेंट भी रहना पड़ता है।

Instagram ने स्टारडम का गणित कैसे बदला?

-पुराने दौर में किसी स्टार की पहुंच का अनुमान लगाने के लिए बॉक्स ऑफिस, फिल्मी मैगजीन की बिक्री, थिएटर की भीड़ और फैन क्लबों को देखा जाता था। आज इनमें एक और बड़ा मेट्रिक जुड़ गया है, वो सोशल मीडिया (Social Media) है।

-इंस्टाग्राम फॉलोअर्स किसी स्टार की कुल लोकप्रियता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं लेकिन वो उसकी संभावित डिजीटल रीच का एक आसान और दिखाई देने वाला संकेत जरूर देते हैं। मान लीजिए किसी एक्टर के करोड़ों फॉलोअर्स हैं। वह अपनी फिल्म का पोस्टर, टीजर या ट्रेलर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर डालता है। उसे प्रचार के लिए अलग से हर दर्शक तक पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ती। स्टार का अपना डिजीटल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तैयार है। यही कारण है कि ब्रांड्स भी सोशल मीडिया प्रेजेंस को गंभीरता से देखते हैं।

-Kroll की 2025 सेलेब्रिटी ब्रांड वैल्यूशेन के मुताबिक सेलेब्रिटी ब्रांड वैल्यू आकलन Endorsement Portfolios और रेलेटिव सोशल मीडिया प्रेजेंश जैसे फैक्टर्स के आधार पर किया जाता है। साल 2025 में शाहरुख खान की ब्रैंड वैल्यू 177.9 मिलियन डॉलर और रणवीर सिंह की 162.9 मिलियन डॉलर आंकी गई। यहां सबसे जरूरी बात सिर्फ पैसे नहीं है बल्कि आज किसी सेलेब्रिटी की कमर्शियल वैल्यू मापते समय उसकी डिजीटल प्रेजेंस को भी गणना में शामिल किया जा रहा है लेकिन क्या इंस्टाग्राम फॉलोअर्स ही नया बॉक्स ऑफिस हैं?

-इस सवाल के जबाव में कई तरह की बातें समझना जरूरी है। किसी स्टार के 50 मिलियन फॉलोअर्स होने का मतलब ये नहीं कि उसकी अगली फिल्म 500 करोड़ रुपये कमाएगी। फॉलोअर्स रीच बताते हैं, टिकट खरीद नहीं। इसी तरह कोई एक्टर सोशल मीडिया पर बहुत पॉपुलर हो सकता है लेकिन उसकी फिल्म थिएटर के दर्शकों को उतनी मजबूती से आकर्षित नहीं भी कर सकती है।

-यही वजह है कि Ormax का 'Stars India Loves' जैसा ऑडियंस पॉपुलैरिटी ट्रैकर सोशल मीडिया फॉलोअर्स से अलग तरीके से स्टार पॉपुलैरिटी को मापता है। इसमें नियमित रूप से थिएटरमें जाने वाले दर्शकों से उनके पसंदीदा स्टार्स के बारे में पूछा जाता है। यानी आज स्टारडम के कई अलग-अलग पैमाने हैं- बॉक्स ऑफिस, ऑडियंस पॉपुलैरिटी, सोशल मीडिया, ब्रांड वैल्यू और स्ट्रीमिंग रीच।

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बॉक्स ऑफिस अभी भी सबसे बड़ा टेस्ट क्यों है?

-सिनेमा के लिए थिएटर अभी भी वह जगह है जहां स्टार की मार्केट वैल्यू का सबसे सीधा परीक्षण होता है। साल 2025 में भारतीय बॉक्स ऑफिस ने रिकॉर्ड 13,395 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया। Ormax के अनुसार ये पहली बार था जब भारतीय बॉक्स ऑफिस 13,000 करोड़ रुपये के पार गया। हिंदी सिनेमा ने भी 5,504 करोड़ रुपये के साथ अपना अब तक का सबसे बड़ा साल दर्ज किया।

-हालांकि इस रिपोर्ट का एक दूसरा पहलू भी है। साल 2025 में भारत में थिएटर्स में जाने वाले दर्शकों की संख्या 83.2 करोड़ रही, जो 2024 के मुकाबले 6 फीसदी कम थी जबकि औसतन टिकट की कीमत 20 फीसदी बढ़कर 161 रुपये हो गई। इसका मतलब है कि बॉक्स ऑफिस के आंकड़े को भी सिर्फ दर्शकों की संख्या से नहीं पढ़ा जा सकता। आज स्टारडम का आर्थिक गणित पहले से कहीं ज्यादा जटिल है।

OTT ने स्टार की परिभाषा बदल दी

-OTT ने एक और बड़ा बदलाव किया। पहले किसी एक्टर की फिल्म छोटे शहर में नहीं चलती थी तो उसकी पहुंच सीमित मानी जा सकती थी। अब एक फिल्म थिएटर में औसत प्रदर्शन करने के बाद भी OTT पर करोड़ों लोगों तक पहुंच सकती है। Netflix, Prime Video, JioHotstar जैसे प्लेटफॉर्म ने दर्शकों को फिल्मों और कलाकारों तक पहुंचने का दूसरा रास्ता दिया।

-इससे एक नया सवाल पैदा हुआ, क्या थिएटर स्टार और OTT स्टार एक ही चीज हैं? ऐसा जरूरी नहीं। OTT पर कई ऐसे कलाकार पॉपुलर हुए जिन्हें पारंपरिक बॉलीवुड स्टार सिस्टम में वैसी जगह नहीं मिली थी। दूसरी तरफ स्थापित सितारों ने भी ओटीटी के जरिए अपनी ऑडियंस को बढ़ाया यानी अब स्टार बनने का रास्ता सिर्फ फिल्म डेब्यू से होकर नहीं गुजरता।

नई पीढ़ी के लिए मुकाबला सिर्फ एक्टर्स से नहीं, इंफ्लूएंसर्स से भी है

-आज का सबसे बड़ा बदलाव शायद यहां है। नई पीढ़ी के एक्टर सिर्फ दूसरे अभिनेताओं से कंपीट नहीं कर रहे। उनके सामने यूट्यूबर्स, इंस्टाग्राम क्रिएटर्स, इंफ्लूएंसर्स और डिजीटल पर्सनैलिटीज भी हैं।

-भारत का Influencer Marketing Industry 2024 में करीब 3,600 करोड़ रुपये का था और WPP Media-Kantar की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में इसमें 25 फीसदी बढ़त का अनुमान लगाया गया था। इसका अर्थ है कि एटेंशन अब सिर्फ बॉलीवुड के पास नहीं है।

-एक इंफ्लूएंसर अपने कमरे से वीडियो बनाकर लाखों लोगों तक पहुंच सकता है। किसी स्टार को इसके लिए करोड़ों रुपये की फिल्म बनाने की जरूरत नहीं। यही वजह है कि आज का स्टार लगातार सोशल मीडिया पर विजिबल रहना चाहता है।

पुराने सुपरस्टार खत्म क्यों नहीं हुए?

-अगर इंस्टाग्राम और डिजीटल क्रिएटर्स ही सब कुछ हैं तो अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और सलमान खान जैसे पुराने स्टार्स आज भी इतने प्रभावशाली क्यों हैं? इसका कारण है स्टारडम सिर्फ फॉलोअर्स की संख्या नहीं है। ये मेमोरी है। ये सालों में बना इमोशनल कनेक्शन है। ये वो भरोसा है कि किसी स्टार का नाम अपने आप में एक पहचान रखता है।

-Ormax के 2025 के रिपोर्ट ने भी एक दिलचस्प तस्वीर दिखाई। हिंदी सिनेमा के टॉप 5 मेल एक्टर की औसत उम्र 2019 के 47 साल से बढ़कर 2025 में 54 साल हो गई। रिपोर्ट के अनुसार 2025 की टॉप 5 लिस्ट में शाहरुख खान, सलमान खान, अक्षय कुमार, ऋतिक रोशन और रणबीर कपूर शामिल थे। ऐसे में नई डिजिटल दुनिया के बावजूद पुराने स्टार सिस्टम की पकड़ अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

पोस्टर खत्म नहीं हुआ, बस उसका आकार बदल गया

-कभी किसी एक्टर का पोस्टर खरीदना फैन होने की निशानी था। आज वही फैन इंस्टाग्राम पर फॉलो करता है, रील शेयर करता है, फैन एडिट बनाता है, ट्रेलर ट्रेंडिंग करवाता है और फिल्म की एडवांस बुकिंग भी कर सकता है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले स्टार की तस्वीर दीवार पर होती थी, आज स्टार की तस्वीर फोन की स्क्रीन पर है। पहले फैन क्लब मोहल्ले में बनते थे, आज WhatsApp, X, Instagram और YouTube पर बनते हैं।

-पहले स्टार की पॉपुलैरिटी का सवाल था- 'उसकी फिल्म देखने कितने लोग गए?' आज सवाल कई हैं-'कितने लोग उसे फॉलो करते हैं?', 'कितने लोग उसका कंटेंट देखते हैं?', 'कितने लोग उसके ब्रांड को पहचानते हैं?', 'कितने लोग उसकी फिल्म के लिए थिएटर पहुंचते हैं?' और 'कितने लोग ओटीटी पर उसकी फिल्म देखते हैं?' यही बॉलीवुड स्टारडम की सबसे बड़ी कहानी है।

-बॉलीवुड में सुपरस्टार पैदा होने का तरीका बदल चुका है। लेकिन एक चीज अब भी वही है, लोग किसी चेहरे से जुड़ना चाहते हैं। बस पहले वह चेहरा दीवार पर था। अब वह आपकी स्क्रीन पर है।